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February 5, 2026

प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लेख-‘परीक्षा पे चर्चा’ को बताया जन आंदोलन, विकसित भारत की नींव! 

The CSR Journal Magazine

 

परीक्षा पे चर्चा: संवाद से जन आंदोलन तक, शिक्षा में तनाव घटाने की पहल! विकसित भारत के लिए नई पीढ़ी की तैयारी!

पीएम मोदी ने साझा किया शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लेख- ‘परीक्षा पे चर्चा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा लिखे गए एक लेख को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह लेख ‘परीक्षा पे चर्चा’ पहल की उस यात्रा को रेखांकित करता है, जिसके तहत यह कार्यक्रम केवल एक संवाद मंच न रहकर एक जन आंदोलन में परिवर्तित हो गया है। उन्होंने इसे भारत की शिक्षा यात्रा में एक निर्णायक बदलाव बताते हुए कहा कि यह पहल विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त कदम है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का लेख यह स्पष्ट करता है कि कैसे ‘परीक्षा पे चर्चा’ ने परीक्षा को भय और तनाव का विषय बनने के बजाय संवाद, आत्मविश्वास और सीखने के अवसर में बदला है। उन्होंने कहा कि यह पहल छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को एक साझा मंच पर लाकर शिक्षा को अधिक मानवीय और संवेदनशील बनाने का कार्य कर रही है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका पर जोर

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए लेख में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अहम भूमिका पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि यह नीति छात्रों को 21वीं सदी की चुनौतियोंके लिए तैयार करने की दिशा में एक व्यापक और दूरदर्शी ढांचा प्रदान करती है। लेख में उल्लेख किया गया है कि NEP 2020 एक बाल-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें रटंत प्रणाली के बजाय समझ, नवाचार और कौशल विकास पर जोर दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने लेख में यह भी दोहराया कि नई शिक्षा नीति भारतीय ज्ञान परंपराओं, संस्कृति और मूल्यों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ती है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणालियों को पाठ्यक्रम में शामिल कर छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे वैश्विक नागरिक बनने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान भी बनाए रखें।

‘परीक्षा पे चर्चा’ : तनाव से संवाद तक

लेख में ‘परीक्षा पे चर्चा’ को शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचारपूर्ण प्रयोग बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इस पहल के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं छात्रों से सीधे संवाद करते हैं, उनके सवालों का जवाब देते हैं और परीक्षा के तनाव से निपटने के व्यावहारिक उपाय साझा करते हैं। यह कार्यक्रम छात्रों को यह संदेश देता है कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है।

विकसित भारत की ओर शिक्षा का नया मार्ग

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे प्रयास भारत को ज्ञान आधारित समाज बनाने की दिशा में आगे ले जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा में यह परिवर्तन युवाओं को आत्मनिर्भर, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। अंततः, प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है और ‘परीक्षा पे चर्चा’ जैसे प्रयास इसी सोच को साकार कर रहे हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के लेख को साझा किया जाना केवल एक औपचारिक सोशल मीडिया गतिविधि नहीं है, बल्कि यह उस सोच का सार्वजनिक समर्थन है, जिसके तहत शिक्षा को भय और दबाव से मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। ‘परीक्षा पे चर्चा’ की शुरुआत एक संवादात्मक पहल के रूप में हुई थी, लेकिन आज यह छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को जोड़ने वाला एक व्यापक जन आंदोलन बन चुका है।

अंकों से आगे सोचने की पहल, तनावमुक्त शिक्षा की दिशा में एक कदम

भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था लंबे समय तक अंकों और प्रतिस्पर्धा के दबाव से ग्रस्त रही है। ऐसे में ‘परीक्षा पे चर्चा’ का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह परीक्षा को जीवन की अंतिम कसौटी नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक पड़ाव मानने की सोच को प्रोत्साहित करता है। प्रधानमंत्री का छात्रों से सीधा संवाद न केवल आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि नीति-निर्माता उनकी मानसिक और  भावनात्मक चुनौतियों को समझते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को जन-जुड़ाव का आधार

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 इस पहल को वैचारिक आधार प्रदान करती है। बाल-केंद्रित दृष्टिकोण, कौशल विकास पर जोर और भारतीय ज्ञान परंपराओं का समावेश, ये सभी तत्व शिक्षा को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में संकेत करते हैं। यदि इन सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो शिक्षा केवल रोजगार तक सीमित न रहकर राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बन सकती है। हालांकि, यह भी आवश्यक है कि ऐसे कार्यक्रम प्रतीकात्मकता तक सीमित न रहें। परीक्षा के तनाव को वास्तव में कम करने के लिए स्कूलों में परामर्श व्यवस्था, शिक्षकों का प्रशिक्षण और मूल्यांकन प्रणाली में व्यावहारिक सुधार समान रूप से जरूरी हैं।

परीक्षा के परे भविष्य की तैयारी

 ‘परीक्षा पे चर्चा’ ने दिशा दिखाई है, अब चुनौती इसे जमीनी बदलाव में बदलने की है। अंततः, विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब शिक्षा प्रणाली छात्रों को न केवल सफल परीक्षार्थी, बल्कि आत्मविश्वासी, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाने में सक्षम होगी। ‘परीक्षा पे चर्चा’ इसी लक्ष्य की ओर बढ़ता हुआ एक सार्थक कदम प्रतीत होता है।

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