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March 7, 2026

चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, जानिए कैसे करें पंजीकरण और कब खुलेंगे धामों के कपाट

The CSR Journal Magazine
 उत्तराखंड में होने वाली पवित्र चारधाम यात्रा 2026 के लिए श्रद्धालुओं का इंतजार अब खत्म हो गया है। उत्तराखंड सरकार ने यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया आज सुबह 7 बजे से शुरू कर दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष भी चारधाम यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, ताकि यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और नियंत्रित तरीके से संचालित किया जा सके।

अप्रैल में खुलेंगे चारधाम के कपाट

सरकारी जानकारी के अनुसार इस वर्ष चारधाम के कपाट अप्रैल महीने में खुलेंगे। सबसे पहले यमुनोत्री धामऔर गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल 2026 को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इसके बाद 22 अप्रैल 2026 को केदारनाथ धाम के कपाट खुलेंगे, जबकि 23 अप्रैल 2026 को बद्रीनाथ धाम के द्वार दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी।

घर बैठे ऐसे करें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु अब घर बैठे ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके लिए उत्तराखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी भरनी होगी। इसके अलावा श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन में Tourist Care Uttarakhand ऐप डाउनलोड करके भी आसानी से रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

व्हाट्सएप के जरिए भी मिलेगा रजिस्ट्रेशन का विकल्प

सरकार ने यात्रियों की सुविधा के लिए व्हाट्सएप रजिस्ट्रेशन सुविधा भी शुरू की है। अगर कोई व्यक्ति वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण नहीं कर पा रहा है, तो वह +91 8394833833 नंबर पर “Yatra” लिखकर भेज सकता है। इसके बाद मिलने वाले निर्देशों का पालन करके वह अपना पंजीकरण पूरा कर सकता है।

आधार कार्ड से होगा भारतीय श्रद्धालुओं का पंजीकरण

सरकार के अनुसार भारतीय श्रद्धालु आधार कार्ड के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं, जबकि विदेशी श्रद्धालुओं के लिए ई-मेल आईडी के जरिए पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है या जो ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं, उनके लिए ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी की गई है। ऑफलाइन पंजीकरण 17 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इसके लिए ऋषिकेश के ट्रांजिट कैंप, हरिद्वार के ऋषिकुल ग्राउंड और देहरादून के विकास नगर में विशेष पंजीकरण केंद्र बनाए जाएंगे।

हेल्पलाइन नंबर पर मिल सकती है सहायता

चारधाम यात्रा से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए श्रद्धालु टोल-फ्री नंबर 0135-1364 पर संपर्क कर सकते हैं।

चारधाम यात्रा की विशेष धार्मिक मान्यता

हिंदू धर्म में चारधाम यात्रा को अत्यंत पवित्र और मोक्ष प्रदान करने वाली यात्रा माना जाता है। उत्तराखंड में स्थित चार प्रमुख तीर्थ यमुनोत्री धामगंगोत्री धामकेदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम को सामूहिक रूप से चारधाम कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन चारों धामों के दर्शन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति यानी मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्गों से गुजरकर इन पवित्र स्थलों तक पहुंचते हैं और भगवान की पूजा-अर्चना करते हैं।

यमुनोत्री से होती है यात्रा शुरू

धार्मिक परंपरा के अनुसार चारधाम यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से होती है, जहां से यमुना नदी का उद्गम माना जाता है। इसके बाद श्रद्धालु गंगोत्री में गंगा नदी के उद्गम स्थल के दर्शन करते हैं। तीसरे धाम के रूप में केदारनाथ में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है, जबकि बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि इन चारों पवित्र धामों की यात्रा करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति मिलती है और उसका जीवन पवित्र हो जाता है।
हर साल की तरह इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं के चारधाम पहुंचने की संभावना है। सरकार ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर जाने से पहले अपना पंजीकरण अवश्य कराएं और यात्रा के दौरान मिलने वाले रजिस्ट्रेशन लेटर या QR कोड को सुरक्षित रखें, क्योंकि धामों में दर्शन के समय इसकी आवश्यकता होगी।

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