जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि अमरनाथ यात्रा को हमेशा कश्मीरी मुसलमानों ने आसान बनाया है। वे आगे भी इसे आसान बनाते रहेंगे। अब्दुल्ला ने कहा कि आर्टिकल 370 के हटने के बाद यात्रियों के लिए तैयार की गई सुविधाएं केवल उसी समय से नहीं आईं। कश्मीरियों ने हमेशा तीर्थयात्रियों की मदद की है और उनके कंधों पर उन्हें गुफा तक पहुंचाया है। उन्होंने यह बात जम्मू कश्मीर विधानसभा में साल 2026-27 का बजट पेश करते हुए कही।
राज्य बजट में अमरनाथ मंदिर के लिए बड़ा प्रावधान
राज्य बजट में सीएम ने अमरनाथ मंदिर के विकास के लिए 180 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने यह दावा किया था कि अमरनाथ यात्रा के लिए सुविधाएं आर्टिकल 370 के हटने के बाद ही संभव हुईं। अब्दुल्ला ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि कश्मीरी मुसलमान यात्रा के लिए हमेशा तत्पर रहे हैं। उन्होंने सदन को यह भी बताया कि उनकी सरकार यात्रा की सुरक्षा और आराम सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
तीर्थयात्रा के इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार
सीएम अब्दुल्ला ने कहा कि 2025-26 के दौरान 200 से अधिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं। यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के साथ पार्टनरशिप में काम जारी है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को अनुभव करने के लिए पहलगाम रूट इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
अमरनाथ यात्रा के रूट और उनकी विशेषताएं
अमरनाथ यात्रा के लिए दो मुख्य रूट हैं। पहला है पहलगाम रूट, जो प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यहां की सुंदरता के बीच यात्रा करना एक यादगार अनुभव है। हालांकि यह रूट लंबा है और यहाँ कुछ कठिनाईयाँ भी हैं। दूसरा रूट बालटाल है, जहाँ यात्रा अपेक्षाकृत कम समय में पूरी होती है, लेकिन मार्ग कठिन और खतरनाक है। सीएम ने बताया कि पहलगाम रूट पर चढ़ाई कम है, इसलिए यह अधिक कठिनाई नहीं पैदा करता।
सीएम का कश्मीरियों के प्रति आभार
उमर अब्दुल्ला ने कश्मीरियों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनके बिना अमरनाथ यात्रा संभव नहीं हो पाती। उन्होंने यह भी बताया कि यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और आराम के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। जम्मू कश्मीर की पहचान के लिए यह यात्रा महत्वपूर्ण है और इसको लेकर सरकार का दृष्टिकोण सकारात्मक है।