आज संसद के मॉनसून सत्र में गृह मंत्री अमित शाह ने संविधान (130 वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश किया। इस बिल की सबसे बड़ी बात यह है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिन तक जेल में रहता है, तो उसे पद छोड़ना पड़ेगा।
किस-किस पर लागू होगा यह कानून?
यह नया प्रस्तावित कानून केंद्र के प्रधानमंत्री और मंत्रियों के साथ-साथ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी लागू होगा।
क्या होगा नए कानून में खास?
अगर कोई मंत्री या प्रधानमंत्री 30 दिन लगातार गिरफ्तार रहता है और उस पर ऐसा आरोप है जिसमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है, तो 31वें दिन वह अपने पद से हटा दिया जाएगा।
अगर पीएम या मंत्री स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते, तो स्वतः पद से हट जाएंगे। रिहाई के बाद वे फिर से नियुक्त हो सकते हैं।
किन अनुच्छेदों में बदलाव होगा?
इस विधेयक के तहत संविधान के तीन अनुच्छेदों में संशोधन किया जाएगा: अनुच्छेद 75 – प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के पद से जुड़ा। अनुच्छेद 164 – राज्यों के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बारे में। अनुच्छेद 239AA – दिल्ली और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़ा प्रावधान।
क्यों लाया गया यह बिल?
सरकार का कहना है कि अभी संविधान में ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है जिससे गिरफ्तार नेताओं को हटाया जा सके। ऐसे नेता जनता के भरोसे का प्रतीक होते हैं, इसलिए उनका आचरण साफ-सुथरा होना चाहिए। लंबे समय तक जेल में रहने वाले नेताओं का पद पर बने रहना नैतिकता और लोकतंत्र दोनों के लिए गलत है।
फायदे क्या होंगे?
अपराध में फंसे लोग सरकार में नहीं बने रह पाएंगे। सरकार और लोकतंत्र में पारदर्शिता और ईमानदारी बढ़ेगी। जनता को लगेगा कि उनके नेता साफ छवि वाले हैं।
विपक्ष ने जताया विरोध
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बिल की आलोचना की। उनका कहना है कि सरकार इसका इस्तेमाल विपक्ष को कमजोर करने के लिए कर सकती है। बिना निष्पक्ष जांच के गिरफ्तार कर के किसी भी नेता को पद से हटाया जा सकता है। सत्ता पक्ष के नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं होती, सिर्फ विपक्ष को निशाना बनाया जा रहा है।
पिछले मामलों का जिक्र
इससे पहले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बावजूद वे पद पर बने रहे। तब भी विपक्ष ने केंद्र पर राजनीतिक बदले का आरोप लगाया था। यह नया बिल देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। लेकिन इसे लेकर सत्ताधारी और विपक्षी दलों में टकराव भी तेज हो गया है। अब देखना यह होगा कि यह कानून लोकतंत्र को मजबूत करेगा या सियासी हथियार बनेगा।
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