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January 25, 2026

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस- सोशल मीडिया के डिजिटल युग में घूमने की संस्कृति का बदलता स्वरूप !

The CSR Journal Magazine

 

National Tourism Day हर साल 25 जनवरी को भारत में मनाया जाता है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य देश में पर्यटन के महत्व को बढ़ावा देना और लोगों में देश की सांस्कृतिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

National Tourism Day- पर्यटन का बढ़ता दायरा

1. पर्यटन के महत्व को समझाना– पर्यटन न सिर्फ आर्थिक विकास का स्रोत है बल्कि यह स्थानीय संस्कृति, कला, परंपरा और प्राकृतिक सौंदर्य को भी दुनिया के सामने लाता है।
2. रोज़गार के अवसर बढ़ाना– पर्यटन क्षेत्र में होटल, ट्रैवल एजेंसी, गाइड और अन्य सेवाओं के जरिए लाखों लोगों को रोजगार मिलता है।
3. देश की विविधता का प्रचार– भारत विविधताओं से भरा देश है- अलग-अलग भाषा, संस्कृति, भोजन और त्योहार। National Tourism Day के माध्यम से लोगों को इस विविधता की जानकारी दी जाती है।
4. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देना– यह दिन सरकारी और निजी स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है ताकि अधिक लोग भारत घूमने आएं।
सरल शब्दों में कहें तो National Tourism Day का उद्देश्य है पर्यटन के महत्व को समझाना और देश की खूबसूरती व संस्कृति को बढ़ावा देना।

भारतीय पर्यटन पर सोशल मीडिया का असर

भारत अपने अद्वितीय सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विविधताओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां के दर्शनीय स्थल, पर्वत, समुद्र तट, मंदिर, किले, वन्य जीवन और विभिन्न त्योहारों का आकर्षण पर्यटकों को हमेशा आकर्षित करता रहा है। पिछले कुछ दशकों में, जब इंटरनेट और डिजिटल तकनीक का तेजी से विकास हुआ, तब सोशल मीडिया ने भारतीय पर्यटन पर गहरा प्रभाव डाला। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म जैसे कि Facebook, Instagram, Twitter, YouTube, Pinterest और X ने न केवल यात्रियों को आकर्षित किया बल्कि उन्हें यात्रा की योजना बनाने, अनुभव साझा करने और पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने में भी मदद की। आज के समय में, भारतीय पर्यटन और सोशल मीडिया का रिश्ता इतना घनिष्ठ हो गया है कि यह देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सोशल मीडिया का पर्यटन पर सकारात्मक असर-1. पर्यटन स्थलों का प्रचार और पहचान

सोशल मीडिया ने भारत के कम ज्ञात पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने में मदद की है। उदाहरण के  लिए, हिमाचल प्रदेश का मछिन्द्रनाथ हिल स्टेशन, उत्तराखंड के अल्मोड़ा और कर्णप्रयाग, और दक्षिण भारत के कोड़िकनाल और वैली ऑफ़ फ्लावर्स जैसे स्थान अब डिजिटल माध्यम से लोकप्रिय हुए हैं। Instagram और YouTube पर यात्रियों द्वारा साझा किए गए फोटोज और वीडियो ने इन जगहों को युवा पीढ़ी के बीच ट्रेंडिंग बना दिया है। इससे स्थानीय पर्यटन उद्योग में आर्थिक वृद्धि हुई और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले।

2. यात्रा की योजना बनाने में मदद

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर ट्रैवल ब्लॉगर्स, इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूब चैनल्स ने यात्रा को आसान और आकर्षक बनाने में मदद की है। लोग अब आसानी से देख सकते हैं कि किसी जगह पर कहां ठहरना है, किस समय यात्रा करना सही है, कौन सी गतिविधियां करनी चाहिए और स्थानीय संस्कृति क्या है।उदाहरण के लिए, ट्रैवल व्लॉगर “एम्ब्रोज़िया ट्रैवल्स” और “ट्रैवल विद जॉन” जैसे चैनल्स ने राजस्थान के कम लोकप्रिय किलों, उत्तराखंड के हाइकिंग ट्रेल्स और केरला के बैकवाटर्स को वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया।

3. सांस्कृतिक जागरूकता और पर्यटन बढ़ावा

सोशल मीडिया ने भारत की सांस्कृतिक विविधताओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। त्योहार, शिल्पकला, लोकनृत्य, संगीत और स्थानीय भोजन अब केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लोकप्रिय हो रहे हैं। उदाहरण के लिए:
• पुष्कर मेला और काजीरंगा नेशनल पार्क जैसे स्थान अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।
• इंस्टाग्राम रील्स और शॉर्ट वीडियो के माध्यम से स्थानीय संस्कृति को युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा रहा है।
इस प्रकार, सोशल मीडिया पर्यटन को सांस्कृतिक शिक्षा और जागरूकता के माध्यम के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

4. युवा पीढ़ी का आकर्षण और पर्यटन में वृद्धि

सोशल मीडिया ने युवाओं में यात्रा के प्रति रुचि बढ़ाई है। इंस्टाग्राम पर ट्रेंडिंग हैशटैग जैसे #IncredibleIndia, #TravelIndia, #IndianCulture ने नए-नए पर्यटन स्थलों की खोज को आसान बना दिया। युवा पीढ़ी अब केवल प्रसिद्ध स्थानों पर नहीं बल्कि कम ज्ञात हिल स्टेशन, साहसिक पर्यटन स्थल और प्राकृतिक स्थलों की यात्रा करने लगी है। इसका परिणाम है कि छोटे शहरों और गांवों में पर्यटन से जुड़ी आर्थिक गतिविधियाँ और रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

5. आर्थिक और रोजगार के अवसर

सोशल मीडिया के माध्यम से पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता बढ़ने से होटल, रिसॉर्ट, गाइड सेवाएँ, ट्रैवल एजेंसी और लोकल शिल्पकला उद्योग में रोजगार बढ़ा है। डिजिटल प्रचार के कारण पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई। स्थानीय लोगों ने होमस्टे, कैफे और ट्रैवल सर्विस शुरू की। डिजिटल मार्केटिंग ने छोटे व्यवसायों को वैश्विक ग्राहकों तक पहुंचाया। उदाहरण के लिए, सिक्किम और उत्तराखंड के छोटे गांवों में होमस्टे और ट्रैकिंग टूरिज़्म का कारोबार सोशल मीडिया की वजह से तेजी से बढ़ा।

सोशल मीडिया से मशहूर हुए भारतीय पर्यटन स्थल

डिजिटल क्रांति ने भारतीय पर्यटन के स्वरूप को जिस तरह बदला है, वैसा परिवर्तन इससे पहले कभी नहीं देखा गया। सोशल मीडिया के आगमन से पहले भारत में पर्यटन मुख्यतः प्रसिद्ध और पारंपरिक स्थलों तक सीमित रहता था, जैसे दिल्ली, आगरा, जयपुर, शिमला, नैनीताल, गोवा या केरल। लेकिन बीते एक दशक में इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने भारत के उन कोनों को भी पहचान दिलाई है, जो लंबे समय तक पर्यटन मानचित्र से बाहर रहे। आज किसी पर्यटन स्थल की प्रसिद्धि उसके ऐतिहासिक महत्व से अधिक उसके डिजिटल प्रभाव से तय होने लगी है। सोशल मीडिया ने पर्यटन को केवल सूचना आधारित नहीं, बल्कि अनुभव आधारित बना दिया है। अब लोग किसी स्थान के बारे में पढ़ने से पहले उसे वीडियो और तस्वीरों में देखना चाहते हैं। शोध बताते हैं कि युवा पर्यटक यात्रा का निर्णय लेने से पहले सोशल मीडिया कंटेंट को सबसे विश्वसनीय स्रोत मानते हैं। यही कारण है कि कई भारतीय पर्यटन स्थल केवल कुछ वायरल पोस्ट, रील्स या व्लॉग्स के कारण रातों-रात लोकप्रिय हो गए।

हिमाचल का कसोल- भारत का मिनी इज़राइल

हिमाचल प्रदेश का कसोल इसका प्रमुख उदाहरण है। कुछ वर्ष पहले तक कसोल एक शांत और सीमित पर्यटकों वाला गांव था, जिसे मुख्यतः विदेशी बैकपैकर्स जानते थे। लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी प्राकृतिक सुंदरता, पार्वती नदी, कैफे संस्कृति और ट्रेकिंग रूट्स के वीडियो वायरल होने लगे। देखते ही देखते कसोल युवाओं का पसंदीदा पर्यटन स्थल बन गया। इंस्टाग्राम पर कसोल की तस्वीरें और यूट्यूब व्लॉग्स ने इसे “भारत का मिनी इज़राइल” तक कहे जाने की पहचान दिलाई। कसोल के साथ-साथ तोश और मलाणा जैसे गांव भी सोशल मीडिया के कारण चर्चा में आए। पहले ये स्थान स्थानीय लोगों और कुछ साहसिक यात्रियों तक ही सीमित थे, लेकिन अब यहां साल भर पर्यटकों की भीड़ देखी जाती है। हालांकि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ, लेकिन पर्यावरण और संस्कृति पर दबाव भी बढ़ा, जो सोशल मीडिया से लोकप्रिय हुए स्थलों की एक आम समस्या बन चुकी है।

उत्तराखंड का चोपता- मिनी स्विट्जरलैंड 

उत्तराखंड का चोपता भी सोशल मीडिया से प्रसिद्ध हुआ एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। “मिनी स्विट्ज़रलैंड” के नाम से वायरल हुए चोपता की बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हरियाली और तुंगनाथ ट्रेक के वीडियो ने देशभर के पर्यटकों को आकर्षित किया। पहले यह स्थान धार्मिक यात्रियों तक सीमित था, लेकिन सोशल मीडिया के बाद यहां ट्रेकर्स, फोटोग्राफर्स और सोलो ट्रैवलर्स की संख्या तेज़ी से बढ़ी।

औली- फेवरेट विंटर डेस्टिनेशन

औली का नाम पहले भी पर्यटन स्थलों में शामिल था, लेकिन सोशल मीडिया ने इसकी लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया। स्कीइंग, रोपवे और हिमालय की पृष्ठभूमि में बनी रील्स ने औली को भारत के प्रमुख विंटर  डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित कर दिया। शोध बताते हैं कि औली की लोकप्रियता बढ़ने में इंस्टाग्राम और यूट्यूब का योगदान पारंपरिक प्रचार से कहीं अधिक रहा है।

महाराष्ट्र का भंडारदरा- वीकेंड डेस्टिनेशन

महाराष्ट्र का भंडारदरा भी सोशल मीडिया से उभरा हुआ पर्यटन स्थल है। झीलें, झरने और पहाड़ों से घिरे इस क्षेत्र की तस्वीरें सोशल मीडिया पर इतनी वायरल हुईं कि यह मुंबई और पुणे के युवाओं का पसंदीदा वीकेंड डेस्टिनेशन बन गया। खासतौर पर मानसून के दौरान यहां के वीडियो लाखों व्यूज़ बटोरते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया मौसम आधारित पर्यटन को भी बढ़ावा दे रहा है।

राजस्थान के होमस्टेज

राजस्थान को आमतौर पर किलों और रेगिस्तान के लिए जाना जाता था, लेकिन सोशल मीडिया ने इसके छोटे हेरिटेज गांवों को नई पहचान दी है। कुंभलगढ़ के आसपास के गांव, बिश्नोई गांव और ग्रामीण होमस्टे सोशल मीडिया के कारण चर्चा में आए। इन स्थानों की लोकसंस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और ग्रामीण अनुभव को डिजिटल मंच ने वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाया।

अनछुआ पूर्वोत्तर बना टूरिज्म की जान

पूर्वोत्तर भारत सोशल मीडिया से मशहूर होने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र माना जा सकता है। लंबे समय तक यह क्षेत्र पर्यटन की मुख्यधारा से दूर रहा, लेकिन सोशल मीडिया ने मेघालय, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को नई पहचान दी। मेघालय के लिविंग रूट ब्रिज, दावकी नदी और शिलांग की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, जिससे यहां पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई।

ट्राइबल टूरिज्म को बढ़ावा

नागालैंड का हॉर्नबिल फेस्टिवल सोशल मीडिया के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाने लगा। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और संगीत के वीडियो ने इस उत्सव को सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना दिया। इसी तरह अरुणाचल प्रदेश के तवांग और जीरो वैली भी सोशल मीडिया के माध्यम से लोकप्रिय हुए।

बॉलीवुड का फेवरेट लद्दाख

लद्दाख का उदाहरण भी उल्लेखनीय है। हालांकि यह पहले से पर्यटन स्थल था, लेकिन सोशल मीडिया ने इसे एडवेंचर और बाइक ट्रैवल का प्रतीक बना दिया। पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी और मैग्नेटिक हिल के वीडियो सोशल मीडिया पर अत्यंत लोकप्रिय हुए। फिल्मों और सोशल मीडिया के संयुक्त प्रभाव ने लद्दाख को युवाओं का ड्रीम डेस्टिनेशन बना दिया।

केरल का बैकवॉटर्स- नेचरलवर्स का प्यार

केरल के मुन्‍नार और वायनाड भी सोशल मीडिया से नई पहचान पाने वाले स्थलों में शामिल हैं। चाय बागानों, झरनों और हरियाली की तस्वीरों ने इन स्थानों को “नेचर लवर्स” के लिए आदर्श बना दिया। सोशल मीडिया के कारण केरल का इको-टूरिज्म मॉडल भी चर्चा में आया।

धार्मिक पर्यटन में आश्चर्यजनक वृद्धि

धार्मिक पर्यटन स्थलों पर भी सोशल मीडिया का गहरा असर पड़ा है। अयोध्या, काशी, उज्जैन और केदारनाथ जैसे स्थानों की भव्य तस्वीरों और वीडियोज़ ने श्रद्धालुओं की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की है। धार्मिक स्थलों के विकास कार्यों को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रचार मिला, जिससे धार्मिक पर्यटन एक बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में उभरा। सोशल मीडिया से मशहूर हुए इन स्थलों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नया जीवन दिया है। होमस्टे, टैक्सी सेवाएं, लोकल गाइड, हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े लोगों को सीधा लाभ मिला। शोध बताते हैं कि डिजिटल प्रचार ने ग्रामीण पर्यटन को मजबूती दी है और पलायन की समस्या को कुछ हद तक कम किया है।

सोशल मीडिया का नेगेटिव इंपैक्ट भी जारी

सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग होने के कारण कुछ पर्यटन स्थलों पर पर्यावरणीय दबाव बढ़ गया है। अधिक पर्यटक आने से पहाड़ी क्षेत्रों में कचरा बढ़ गया, नदियां और झीलें प्रदूषित हुईं, वन्य जीवन प्रभावित हुआ। उदाहरण के तौर पर गोवा के बीच और मनाली के हिल स्टेशन पर सोशल मीडिया ट्रेंडिंग के कारण भारी भीड़ और कचरे की समस्या बढ़ गई। सोशल मीडिया की लोकप्रियता ने कुछ स्थलों को अति व्यावसायिक और भीड़भाड़ वाला बना दिया जिसके चलते प्राकृतिक सुंदरता कम हो रही है और स्थानीय संस्कृति का असली रूप खोने का खतरा है। उदाहरण के रूप में केरल के बैकवाटर्स पर अत्यधिक बोट टूरिज़्म ने पारंपरिक जीवनशैली को प्रभावित किया।

स्थानीय संस्कृति पर प्रभाव

सोशल मीडिया के प्रभाव से कुछ पर्यटन स्थल पर्यटन केंद्रित और औद्योगिक हो गए हैं। इनमें स्थानीय परंपराओं को बदलने का दबाव पड़ा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को केवल पर्यटकों के लिए आयोजित किया जाने लगा।राजस्थान के कुछ गांवों में पारंपरिक त्योहार अब केवल विदेशी पर्यटकों के आकर्षण के लिए आयोजित किए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया और भारतीय पर्यटन का भविष्य

कुल मिलाकर सोशल मीडिया भारतीय पर्यटन के लिए दोहरी भूमिका निभा रहा है। एक तरफ जहां यह पर्यटन स्थलों की पहचान बढ़ाता है, रोजगार बढ़ाता है, सांस्कृतिक जागरूकता फैलाता है और युवा पीढ़ी को आकर्षित करता है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण पर दबाव, अति व्यावसायीकरण, संस्कृति पर प्रभाव और भ्रमित जानकारी जैसी चुनौतियां सामने आती हैं। भविष्य में स्मार्ट और सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया का जिम्मेदार उपयोग जरूरी है।

सोशल मीडिया के ज़िम्मेदार उपयोग की ज़रूरत

भारतीय पर्यटन और सोशल मीडिया का रिश्ता आज अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। सोशल मीडिया ने भारत की अद्भुत सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को दुनिया के सामने लाने में मदद की है। यह न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी सहारा देता है।हालांकि इसका जिम्मेदार  उपयोग करना आवश्यक है ताकि पर्यावरण, स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक जीवन पर इसके नकारात्मक प्रभाव कम से कम हों।भारत को दुनिया का एक सतत, सुरक्षित और विविध पर्यटन स्थल बनाने में सोशल मीडिया की भूमिका अहम होगी। यदि इसे सचेत और रणनीतिक रूप से उपयोग किया जाए, तो भारत में पर्यटन का भविष्य और भी उज्जवल और समृद्ध बन सकता है।

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