मुंबई लोकल की लापरवाही और अंधविश्वास भरी आदत ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नायगांव और भायंदर खाड़ी के बीच रहने वाले 30 वर्षीय संजय भोईर की चलती लोकल से फेंके गए नारियल की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। शनिवार रात संजय भोईर खाड़ी पुल से पैदल नायगांव स्टेशन की ओर जा रहे थे। तभी गुजर रही लोकल ट्रेन से यात्रियों ने पूजा का निर्माल्य और नारियल खाड़ी में फेंका। दुर्भाग्य से नारियल सीधे संजय के सिर पर आकर लगा। जोरदार चोट और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से उनकी हालत बिगड़ गई।
अस्पताल में नहीं बच सकी जान
घायल संजय को तुरंत वसई के सर डीएम पेटिट सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें हालत नाजुक होने पर मुंबई के बड़े अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन गंभीर सिर की चोट और खून ज्यादा बह जाने के कारण रविवार सुबह इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। नायगांव-भायंदर और वैतरणा-विरार खाड़ी पुलों पर यह आम दृश्य है कि यात्री चलती लोकल से निर्माल्य, मूर्तियां और नारियल फेंकते हैं। कई बार यह सामान पुल पर पैदल चलने वालों पर गिरकर दुर्घटनाओं का कारण बनता है। गांव वालों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि इस पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि आगे किसी की जान यूं न जाए।
गांव में मातम
पणजू बेट के संजय भोईर की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि लापरवाही और अंधविश्वास का खामियाजा है, जिसकी कीमत संजय को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। यह घटना लोकल ट्रेनों में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक चेतावनी है कि धार्मिक आस्था के नाम पर की जाने वाली ऐसी लापरवाहियां सीधे इंसानी जान पर भारी पड़ सकती हैं।
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