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January 24, 2026

मुंबई लोकल पर वोकल हुई जनता, तो रेलवे ने बदल दिया इतिहास- अप्रैल से पटरी पर दौड़ेगी नॉन-एसी ऑटोमैटिक डोर लोकल ट्रेन! 

The CSR Journal Magazine

 

CSMT–कल्याण रूट पर होगा पायलट प्रोजेक्ट, यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम! मुंबई लोकल के इतिहास में पहली बार बिना एसी वाली ट्रेनों में ऑटोमैटिक बंद होने वाले दरवाजों की सुविधा शुरू होने जा रही है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और हादसों की रोकथाम को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। CSMT–कल्याण रूट पर होगा पायलट प्रोजेक्ट, यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से बड़ा कदम!

अप्रैल 2026 से पटरी पर उतरेगी ऑटोमैटिक डोर नॉन एसी लोकल

मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन सेवा में जल्द ही एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। सेंट्रल रेलवे (CR) ने संकेत दिए हैं कि अप्रैल 2026 से मुंबई में पहली बार बिना एसी (Non-AC) लोकल ट्रेनें ऑटोमैटिक बंद होने वाले दरवाजों के साथ चलाई जाएंगी। यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और हादसों को रोकने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। रेलवे सूत्रों के मुताबिक, दो नई नॉन-एसी इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (EMU) रेक मार्च 2026 के अंत तक सेंट्रल रेलवे को मिल जाएंगी। इन ट्रेनों में ऑटोमैटिक क्लोज़िंग दरवाजे और वेस्टिब्यूल कनेक्शन जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी, जो अब तक केवल एसी लोकल ट्रेनों में ही उपलब्ध थीं।

CSMT–कल्याण रूट बना पायलट कॉरिडोर

रेलवे प्रशासन ने इस नई तकनीक को पहले CSMT से कल्याण के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनों पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने का फैसला लिया है। यह रूट मुंबई उपनगरीय नेटवर्क का सबसे व्यस्त मार्ग माना जाता है, जहां रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। इस कॉरिडोर पर भीड़, धक्का-मुक्की और चलती ट्रेन से गिरने की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं। ऐसे में ऑटोमैटिक दरवाजों वाली नॉन-एसी ट्रेनें यात्रियों के लिए राहत साबित हो सकती हैं।

मार्च में आएगा प्रोटोटाइप, होंगे कई ट्रायल

सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया कि इन ट्रेनों का निर्माण इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मार्च के अंत तक ICF द्वारा प्रोटोटाइप रेक की डिलीवरीकी जाएगी। इसके बाद सेंट्रल रेलवे द्वारा कई स्तरों पर तकनीकी और सुरक्षा परीक्षण किए जाएंगे। सभी परीक्षणों के बाद ही इन ट्रेनों को यात्रियों के लिए शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।” रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रायल के दौरान दरवाजों की ऑटोमैटिक सिस्टम, वेंटिलेशन, आपातकालीन निकास और भीड़ प्रबंधन जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

नॉन-एसी यात्रियों के लिए बड़ी राहत

अब तक मुंबई लोकल में ऑटोमैटिक दरवाजों की सुविधा केवल एसी लोकल ट्रेनों तक सीमित थी। लेकिन बड़ी संख्या में यात्री रोजाना नॉन-एसी लोकल से ही सफर करते हैं। ऐसे में इस सुविधा के नॉन-एसी ट्रेनों में आने से आम यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। रेलवे आंकड़ों के मुताबिक, हर साल लोकल ट्रेनों से गिरने या दरवाजों पर लटकने के कारण सैकड़ों हादसे होते हैं। ऑटोमैटिक दरवाजे ट्रेन के चलने के दौरान बंद रहेंगे, जिससे यात्रियों के गिरने की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।

वेस्टिब्यूल कनेक्शन से भीड़ होगी नियंत्रित

इन नई रेकों में वेस्टिब्यूल कनेक्शन भी होगा, जिससे यात्री एक कोच से दूसरे कोच में सुरक्षित तरीके से आ-जा सकेंगे। इससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ का दबाव कम करने और ट्रेनों के अंदर यात्रियों के बेहतर वितरण में मदद मिलेगी। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह सुविधा पीक ऑवर के दौरान यात्रियों को काफी राहत दे सकती है।

यात्री संगठनों की लंबे समय से मांग

यात्री संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि नॉन-एसी लोकल ट्रेनों में भी एसी जैसी सुरक्षा सुविधाएं दी जाएं। कई हादसों के बाद यह मांग और तेज हो गई थी। अब रेलवे के इस फैसले को यात्रियों की जीत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कुछ यात्रियों ने यह चिंता भी जताई है कि ऑटोमैटिक दरवाजों से वेंटिलेशन और भीड़ के समय चढ़ने-उतरने में परेशानी हो सकती है।

रेलवे का दावा: सुरक्षा और सुविधा दोनों पर फोकस

रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन नॉन-एसी ट्रेनों में पर्याप्त वेंटिलेशन सिस्टम होगा, ताकि यात्रियों को घुटन महसूस न हो। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों के लिए मैनुअल ओपनिंग सिस्टम भी दिया जाएगा। रेलवे का कहना है कि एसी लोकल ट्रेनों के अनुभव के आधार पर इन नई नॉन-एसी ट्रेनों के डिजाइन को और बेहतर बनाया गया है।

भविष्य में अन्य रूटों पर भी विस्तार संभव

अगर CSMT–कल्याण रूट पर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य उपनगरीय रूटों पर भी लागू किया जा सकता है। इससे मुंबई लोकल की पूरी तस्वीर बदल सकती है। रेलवे सूत्रों का कहना है कि यह कदम मुंबई लोकल को अधिक सुरक्षित, आधुनिक और यात्री-अनुकूलबनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

भारतीय रेलवे की ऐतिहासिक पहल 

मुंबई लोकल में बिना एसी वाली ऑटोमैटिक डोर ट्रेनों की शुरुआत न केवल तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह यात्रियों की जान बचाने की दिशा में एक अहम प्रयास भी है। रोजाना लाखों यात्रियों के जीवन को प्रभावित करने वाली यह योजना अगर सफल रही, तो यह मुंबई लोकल के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। अब सभी की नजरें मार्च में होने वाले ट्रायल और अप्रैल 2026 में प्रस्तावित शुरुआत पर टिकी हैं।

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