मोगरा पंपिंग स्टेशन परियोजना 15 अक्टूबर से होगी शुरू, मुंबई के बाढ़ नियंत्रण को मिलेगी मजबूती

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20 साल का इंतजार खत्म: 15 अक्टूबर से शुरू होगा मोगरा पंपिंग स्टेशन, अंधेरी-वर्सोवा-जोगेश्वरी को जलभराव से राहत की उम्मीद

मुंबई में बरसात के दौरान अंधेरी, जोगेश्वरी और वर्सोवा के निचले इलाकों में होने वाले जलभराव से राहत की दिशा में लंबे समय से प्रतीक्षित मोगरा पंपिंग स्टेशन परियोजना अब आगे बढ़ने जा रही है। करीब दो दशक से लंबित इस परियोजना का निर्माण 15 अक्टूबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। पर्यावरणीय मंजूरियों और स्थान से जुड़े विवादों के कारण वर्षों तक अटकी रही इस परियोजना को अब सभी जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद गति मिली है।

20 साल बाद जमीन पर उतरेगी परियोजना

मोगरा नाले के किनारे प्रस्तावित पंपिंग स्टेशन मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को मजबूत करने की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। यह परियोजना मुख्य रूप से अंधेरी, जोगेश्वरी, मालपाड़ा-डोंगरी और वर्सोवा के करीब 7.43 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र के जलनिकासी तंत्र से जुड़ी है। इन इलाकों में तेज बारिश के साथ-साथ समुद्र में ज्वार आने पर पानी की निकासी प्रभावित होती है और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। मौजूदा व्यवस्था में जब समुद्र में ज्वार ऊंचा होता है, तब समुद्र का पानी शहर की ओर न आए, इसके लिए नालों के मुहानों पर गेट बंद करने पड़ते हैं। ऐसे समय में बारिश का पानी गुरुत्वाकर्षण के आधार पर समुद्र में नहीं जा पाता। पंपिंग स्टेशन इसी स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्टेशन पानी को पंप करके तेजी से समुद्र की ओर भेजते हैं, जिससे जलभराव का समय और उसकी गंभीरता कम करने में मदद मिलती है।

₹393 करोड़ की परियोजना, 2029 से पहले पूरा करने का लक्ष्य

मोगरा पंपिंग स्टेशन परियोजना को 2021 में मंजूरी दी गई थी। इसकी शुरुआती समयसीमा करीब 24 महीने रखी गई थी, लेकिन जमीन, न्यायिक प्रक्रिया, परियोजना स्थल में बदलाव और पर्यावरणीय मंजूरियों के कारण निर्धारित समय में काम शुरू नहीं हो सका। मौजूदा योजना के अनुसार निर्माण पूरा होने में लगभग तीन वर्ष लग सकते हैं, जबकि मुंबई महानगरपालिका का लक्ष्य इसे 2029 से पहले चालू करने का है। परियोजना में पंपिंग स्टेशन के साथ ज्वारीय गेट, सुरक्षा दीवारें और नाले से संबंधित अन्य जरूरी ढांचागत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनका उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी को तेज करना और समुद्र में ऊंचे ज्वार के दौरान बैकफ्लो की समस्या से निपटने में मदद करना है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में परियोजना की लागत को लेकर अंतर दिखाई देता है। हालिया रिपोर्टों में मौजूदा परियोजना की लागत ₹393 करोड़ बताई गई है, जबकि महाराष्ट्र की एक रिपोर्ट में 2021 में तय किए गए मूल ठेके की राशि करीब ₹290 करोड़ बताई गई है। यह अंतर परियोजना के संशोधित स्वरूप, स्थान परिवर्तन और बाद की लागत में बदलाव से संबंधित हो सकता है।

जमीन के विवाद ने रोका रास्ता

मोगरा पंपिंग स्टेशन का मामला केवल निर्माण से जुड़ी तकनीकी चुनौती नहीं रहा है। परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध कराने में लंबे समय तक अड़चन बनी रही। जमीन के स्वामित्व को लेकर मामला अदालत तक पहुंच गया था। 2024 में न्यायिक प्रक्रिया के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला और महानगरपालिका को विवादित जमीन से जुड़े मामले में करीब ₹33 करोड़ जमा करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद मार्च 2025 में प्रारंभिक काम शुरू किया गया। लेकिन इसके बाद एक और बड़ी समस्या सामने आई। जिस स्थान पर पंपिंग स्टेशन विकसित किया जा रहा था, उसका कुछ हिस्सा प्रस्तावित वर्सोवा-दहिसर कोस्टल रोड के दूसरे चरण के मार्ग से प्रभावित हो रहा था। दोनों परियोजनाओं के बीच टकराव से बचने के लिए पंपिंग स्टेशन का स्थान बदलकर लोखंडवाला क्रीक रोड की ओर किया गया। स्थान बदलने के बाद परियोजना के लिए नए सिरे से पर्यावरणीय और तटीय क्षेत्र से संबंधित मंजूरियां लेना जरूरी हो गया।

नई जगह के कारण फिर लेनी पड़ी मंजूरी

स्थान परिवर्तन के बाद परियोजना को कोस्टल रेगुलेशन जोन (सीआरजेड) से संबंधित नई मंजूरी की आवश्यकता पड़ी। इसके अलावा केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से भी जरूरी अनुमति लेनी पड़ी। इन प्रक्रियाओं ने निर्माण शुरू होने में और समय लिया। अब अधिकारियों के अनुसार आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हो चुकी हैं और इसी वजह से अक्टूबर में वास्तविक निर्माण शुरू करने का रास्ता साफ हुआ है। यह देरी इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि मोगरा पंपिंग स्टेशन की जरूरत मुंबई में 26 जुलाई 2005 की विनाशकारी बाढ़ के बाद सामने आई व्यापक जलनिकासी सुधार योजना से जुड़ी है। उस बाढ़ के बाद गठित चितले समिति की सिफारिशों के आधार पर मुंबई में आठ प्रमुख वर्षाजल पंपिंग स्टेशनों की योजना बनाई गई थी। इनमें से इरला, हाजी अली, क्लीवलैंड, लवग्रोव, ब्रिटानिया और गजधर बांध जैसे स्टेशन अब काम कर रहे हैं। मोगरा और माहुल परियोजनाएं लंबे समय से लंबित परियोजनाओं में बनी हुई हैं।

अंधेरी के जलभराव वाले इलाकों को राहत की उम्मीद

मोगरा पंपिंग स्टेशन बनने से विशेष रूप से उन इलाकों को फायदा मिलने की उम्मीद है जहां भारी बारिश के बाद पानी तेजी से जमा हो जाता है। लिंक रोड, वीरा देसाई रोड और अंधेरी के अन्य निचले इलाकों में मानसून के दौरान जलभराव स्थानीय लोगों के लिए बड़ी समस्या रहा है। नागरिक संगठनों ने परियोजना में हो चुकी देरी को देखते हुए अब निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि केवल पंपिंग स्टेशन बना देना पर्याप्त नहीं होगा। नालों की क्षमता बनाए रखना, उनमें कचरा और भारी सामान फेंकने पर रोक लगाना तथा नियमित सफाई भी जरूरी है। स्थानीय नागरिक प्रतिनिधियों ने नालों में सोफा और अन्य भारी कचरा डाले जाने की शिकायत की है। ऐसे कचरे से पानी के बहाव में रुकावट आती है और जलनिकासी की क्षमता प्रभावित होती है।

मुंबई के बड़े बाढ़ नियंत्रण अभियान का हिस्सा

मोगरा पंपिंग स्टेशन को मुंबई महानगरपालिका के करीब ₹13,000 करोड़ के एकीकृत बाढ़ नियंत्रण कार्ययोजना का हिस्सा बनाया गया है। इस व्यापक योजना में शहर की वर्षाजल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने, नालों की क्षमता बढ़ाने, पंपिंग व्यवस्था में सुधार, मीठी नदी के पुनरुद्धार और प्रकृति आधारित बाढ़ नियंत्रण उपायों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य केवल किसी एक इलाके में पानी भरने की समस्या दूर करना नहीं, बल्कि मुंबई की पूरी जलनिकासी व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाना है। मुंबई की भौगोलिक स्थिति के कारण शहर को हर मानसून में दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है। एक तरफ कम समय में बहुत अधिक बारिश होती है, वहीं दूसरी तरफ ऊंचे ज्वार के समय समुद्र में पानी का स्तर बढ़ जाने से नालों से बारिश का पानी बाहर निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में केवल बड़े नाले और ड्रेनेज लाइन पर्याप्त नहीं होतीं। पंपिंग स्टेशनों की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है।

15 अक्टूबर से शुरू होगा नया चरण

अब लगभग 20 वर्ष के इंतजार के बाद मोगरा पंपिंग स्टेशन परियोजना निर्माण के चरण में प्रवेश करने जा रही है। अक्टूबर 15 से काम शुरू होने के बाद अगले करीब तीन वर्षों में इसे पूरा करने की योजना है। महानगरपालिका का लक्ष्य इसे 2029 से पहले चालू करने का है। हालांकि परियोजना शुरू होना पश्चिमी उपनगरों के लिए महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माण निर्धारित समय में कितना पूरा होता है और इसके साथ जुड़े नालों की सफाई तथा जलनिकासी नेटवर्क को कितना प्रभावी बनाया जाता है। यदि पंपिंग स्टेशन समय पर तैयार होता है और मोगरा नाले तथा आसपास के जलनिकासी तंत्र की क्षमता भी बढ़ाई जाती है, तो अंधेरी-जोगेश्वरी-वर्सोवा क्षेत्र में मानसूनी जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
मोगरा परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मुंबई की उस पुरानी चुनौती से जुड़ी है जिसमें भारी बारिश, ऊंचे ज्वार, सीमित प्राकृतिक ढलान और तेजी से बढ़े शहरीकरण के बीच बारिश के पानी को कम समय में समुद्र तक पहुंचाना शामिल है। दो दशक की देरी के बाद अब परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि मंजूरियों और कागजी प्रक्रियाओं का दौर समाप्त होने के बाद निर्माण कार्य लगातार गति से आगे बढ़े और प्रस्तावित पंपिंग स्टेशन मानसून से पहले वास्तविक रूप से शहर की बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था का हिस्सा बन सके।

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