देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में प्रस्तावित ‘बिहार भवन’ अब केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक टकराव और क्षेत्रीय अस्मिता की बहस का केंद्र बन गई है। बिहार सरकार द्वारा इस परियोजना के लिए 314 करोड़ 20 लाख रुपये की मंजूरी दिए जाने के बाद जहां बिहार के प्रवासी नागरिकों में उम्मीद जगी है, वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के विरोध ने इसे विवादों में ला खड़ा किया है।
314.20 करोड़ की परियोजना, मुंबई में 30 मंजिला बिहार भवन परियोजना को मंज़ूरी
बिहार सरकार ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक विशाल और आधुनिक ‘बिहार भवन’ के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए राज्य मंत्रिमंडल द्वारा 314 करोड़ 20 लाख रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार का कहना है कि यह भवन मुंबई में रहने या काम करने वाले बिहारवासियों के साथ-साथ इलाज, रोजगार और सरकारी कार्यों से आने वाले लोगों के लिए एक मजबूत सहारा बनेगा। यह भवन बिहार की पहचान और प्रशासनिक सुविधा का केंद्र होगा।
मुंबई में बिहार की पहचान बनेगा बिहार भवन 🏛️
बिहार भवन, मुंबई के निर्माण कार्य हेतु ₹314,20,59,000.00 (तीन सौ चौदह करोड़ बीस लाख उनसठ हजार रुपये मात्र) की प्रशासनिक स्वीकृति।#BiharCabinetDecisions #BiharCabinetSecretariatDept #BiharCabinetDecisions2026 pic.twitter.com/bi5DgWwNSD
— Cabinet Secretariat Department, Govt. of Bihar (@BiharCabinet) January 14, 2026
एलिफिंस्टन एस्टेट में बनेगा बिहार भवन, 30 मंजिल की होगी इमारत
प्रस्तावित बिहार भवन मुंबई के बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट (MbPT) की जमीन पर स्थित एलिफिंस्टन एस्टेट क्षेत्र में बनाया जाएगा। यह इलाका दक्षिण मुंबई का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और व्यावसायिक क्षेत्र माना जाता है। भवन को करीब 69 मीटर ऊंचा बनाया जाएगा, जिसमें कुल 30 मंजिलें होंगी। इस अत्याधुनिक इमारत का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक और आधुनिक शहरी मानकों के अनुसार किया जाएगा, ताकि यह लंबे समय तक सुरक्षित और उपयोगी बनी रहे।
178 कमरों की सुविधा, अधिकारियों और आम लोगों दोनों के लिए व्यवस्था
बिहार भवन में कुल 178 आधुनिक कमरे प्रस्तावित हैं। इनमें से कुछ कमरे सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के लिए आरक्षित होंगे, जबकि शेष कमरे आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। भवन में सम्मेलन कक्ष, मीटिंग हॉल, कार्यालय, प्रतीक्षालय और आवश्यक प्रशासनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी, जिससे मुंबई में बिहार सरकार के कार्य सुचारु रूप से संचालित किए जा सकें।
इलाज के लिए आने वाले मरीजों के लिए बड़ी राहत
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बिहार से इलाज के लिए मुंबई आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए विशेष ठहराव व्यवस्था की जा रही है। भवन में करीब 240 बेड की डॉर्मिट्री (छात्रावास/सामूहिक आवास) विकसित की जाएगी, जहां मरीजों के परिजन कम खर्च में सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से ठहर सकेंगे। मुंबई के निजी अस्पतालों में इलाज पहले से ही बेहद महंगा है और ठहरने की व्यवस्था मरीजों के लिए बड़ी समस्या बन जाती है। बिहार भवन इस परेशानी को काफी हद तक कम करेगा।
बिहार सरकार का तर्क- बाहर रहकर भी मिले ‘घर जैसा सहारा’
बिहार सरकार का कहना है कि देश के कई बड़े राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और गुजरात के भवन पहले से ही दिल्ली और अन्य महानगरों में मौजूद हैं। ऐसे में मुंबई जैसे शहर में बिहार भवन का निर्माण कोई असामान्य कदम नहीं है। सरकार का दावा है कि यह भवन प्रवासी बिहारियों के लिए एक ‘सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र’ के रूप में कार्य करेगा और राज्य की प्रतिष्ठा को भी बढ़ाएगा।
मनसे का विरोध, ‘मुंबई की जमीन पर बिहार भवन क्यों?’
हालांकि इस परियोजना के सामने राजनीतिक विरोध भी खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने मुंबई में बिहार भवन बनाए जाने का कड़ा विरोध किया है। मनसे नेताओं का कहना है कि मुंबई पहले ही अत्यधिक भीड़, आवास संकट और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। ऐसे में किसी दूसरे राज्य का भवन बनाना स्थानीय लोगों के हितों के खिलाफ है। मनसे नेता यशवंत किलेदार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार सरकार को मुंबई में करोड़ों रुपये खर्च करने के बजाय बिहार में ही विश्वस्तरीय अस्पताल और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि बिहार में बेहतर इलाज उपलब्ध होगा, तो लोगों को इलाज के लिए मुंबई आने की मजबूरी ही नहीं रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मनसे इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का रास्ता भी अपनाएगी।

