लाल किले में आयोजित 25वें भारत पर्व के दौरान IHM रांची के स्टॉल पर झारखंड के पारंपरिक, आदिवासी और मिलेट आधारित व्यंजनों को चखने उमड़ रही लोगों की भीड़! 26 से 31 जनवरी तक चल रहे भारत पर्व में झारखंड पर्यटन के अंतर्गत IHM रांची द्वारा राज्य की पारंपरिक भोजन संस्कृति और पोषणयुक्त मिलेट व्यंजनों की प्रभावशाली प्रस्तुति !
IHM रांची के स्टॉल पर मिलेट आधारित व्यंजनों को मिल रहा विशेष आकर्षण
देश की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने वाले 25वें भारत पर्व का आयोजन इस वर्ष भी राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में भव्य रूप से किया जा रहा है। यह सांस्कृतिक उत्सव 26 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक आम जनता के लिए खुला है। छह दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, खान-पान और पर्यटन की झलक देखने को मिल रही है। इसी क्रम में झारखंड पर्यटन के अंतर्गत लगाए गए इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (IHM), रांची के स्टॉल ने झारखंड की पारंपरिक और मिलेट आधारित खाद्य संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। यह स्टॉल भारत पर्व में आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों और राजधानीवासियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व का उद्देश्य देश की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त करना है। हर वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाला यह पर्व भारतीय लोक कलाओं, पारंपरिक व्यंजनों, नृत्य-संगीत, हस्तकला और पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा देता है। 25वें भारत पर्व में विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य, शिल्प बाज़ार, व्यंजन स्टॉल और पर्यटन प्रदर्शनी लगाई गई हैं, जिससे आम नागरिक भारत की विविधता को एक ही स्थान पर अनुभव कर सकें।
झारखंड की मिट्टी से जुड़ा स्वाद
IHM रांची द्वारा तैयार किया गया झारखंड का यह फूड स्टॉल राज्य की आदिवासी और ग्रामीण भोजन परंपराओं पर आधारित है। स्टॉल की सजावट सादगीपूर्ण रखी गई है, जहां ब्लैकबोर्ड शैली में मेन्यू लिखा गया है। यह प्रस्तुति झारखंड की मिट्टी, परंपरा और सरल जीवनशैली का प्रतीक है। यहां परोसे जा रहे व्यंजन झारखंड के रोज़मर्रा के खान-पान और पारंपरिक त्योहारों से जुड़े हैं। धुस्का और आलू-चना की सब्ज़ी स्टॉल का प्रमुख आकर्षण है। यह चावल और दाल से बना पारंपरिक व्यंजन झारखंड के हर वर्ग में लोकप्रिय है और स्थानीय स्वाद की पहचान माना जाता है।
पारंपरिक मिठाइयां और आदिवासी स्नैक्स- मिलेट रेसिपीज़ मुख्य आकर्षण
मिठाइयों में अरसा पीठा, जो चावल के आटे और गुड़ से बनाया जाता है, झारखंड की पारंपरिक मिठास को दर्शाता है। वहीं डुम्बू जैसे कम प्रसिद्ध लेकिन पारंपरिक आदिवासी स्नैक्स लोगों को राज्य की अनूठी खाद्य विरासत से परिचित करा रहे हैं। स्टॉल की एक विशेष पहचान इसका मिलेट आधारित मेन्यू है। रागी और मड़ुआ जैसे मोटे अनाज झारखंड की पारंपरिक खेती और भोजन का अहम हिस्सा रहे हैं। यहां रागी सेव, रागी समोसा, चावल चिल्का सब्ज़ी के साथ और मड़ुआ चिल्का सब्ज़ी के साथ जैसे पौष्टिक और संतुलित भोजन विकल्प उपलब्ध हैं। ये व्यंजन न केवल स्वादिष्ट हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज़ से भी अत्यंत लाभकारी माने जाते हैं।
पेय पदार्थ और आधुनिक प्रस्तुति
पेय पदार्थों में चावल की चाय आगंतुकों के लिए एक नया अनुभव साबित हो रही है। यह पारंपरिक चाय की तुलना में हल्की होती है और झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित रही है। इसके अलावा, घर ले जाने के लिए मड़ुआ कुकीज़ और मड़ुआ लड्डू आकर्षक पैकेजिंग में उपलब्ध हैं। आधुनिक स्वाद को ध्यान में रखते हुए मड़ुआ-रागी रैप जैसे व्यंजन भी शामिल किए गए हैं, जो पारंपरिक अनाज को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करते हैं।
संस्कृति, पोषण और आत्मनिर्भर भारत का संदेश
IHM रांची का यह प्रयास केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोषण जागरूकता, सतत कृषि, स्थानीय उत्पादों के उपयोग और आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती देता है। 25वें भारत पर्व में झारखंड का यह स्टॉल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रहा है और लोगों को पारंपरिक भारतीय भोजन की ओर लौटने के लिए प्रेरित कर रहा है। भारत पर्व में आने वाले हजारों दर्शक यहां झारखंड के स्वाद, संस्कृति और परंपरा का अनुभव कर रहे हैं, जिससे यह आयोजन न केवल उत्सव, बल्कि भारतीय विविधता का जीवंत उदाहरण बन गया है।
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