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मेडिकल स्टूडेंट का ड्रॉपआउट रोकता है Metropolis का ये CSR

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मेडिकल स्टूडेंट का ड्रॉपआउट रोकता है Metropolis का ये सीएसआर
 
कहते है कि जान है तो जहान है, जान तब रहेगी जब हम स्वस्थ और निरोगी रहेंगे। आज समूचा विश्व स्वास्थ्य दिवस मना रहा है। स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने का दिन यानी World Health Day. मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की पर्याप्त मात्रा और ज्यादा से ज्यादा मेडिकल सुविधाओं की आम जनमानस और दूरदराज इलाकों तक पहुंच से देश और देशवासियों को स्वस्थ बनाया जा सकता है। अपने आप को हेल्दी रखने के लिए सबसे पहले प्रिवेंटिव हेल्थ केयर बहुत जरुरी है। अगर आप बीमार है तो बीमारी का कारण और बीमारी क्या है ये पता चल जाए ताकि सही समय पर सही इलाज हो सके इसलिए लेबोरेटरी और डायग्नोस्टिक सेंटर बहुत महत्वपूर्ण हो जाते है। मेट्रोपॉलिस हेल्थकेयर लिमिटेड प्रिवेंटिव हेल्थ केयर और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर एनहान्स करने के लिए सीएसआर Initiatives कर रहा है। The CSR Journal ने World Health Day के इस ख़ास अवसर पर Metropolis Healthcare Ltd. के फाउंडर और चेयरमैन डॉ सुशिल शाह से ख़ास बातचीत की।

स्वास्थ्य की जब भी बात आती है, हम कोरोना काल को याद करते है, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर कोलैप्स हो गया था, उसके बाद सरकार हो या प्रशासन, अस्पताल हो या डायग्नोस्टिक सेंटर हर कोई अब सतर्क है, आपके क्या प्लान है?

Metropolis Healthcare Ltd. का हेल्थ केयर में महत्वपूर्ण रोल है, हम सबसे पहले प्रिवेंटिव हेल्थ केयर करते है, जहां आपको बीमारी ना हो इसके लिए चेकअप करते हैं, या बीमारी क्या है और क्यों है इसका चेकअप करते हैं, या फिर बीमारी के बारे में पहले से जानकारी हो जाए ताकि समय रहते सही इलाज हो सके। ये बेसिक डायग्नोस्टिक सब करने लगे है। ये डायग्नोस्टिक बेसिक है, उसके बाद आता गंभीर बीमारियां जैसे एनीमिया, डायबिटीज की जांच आजकल सामान्य डायग्नोस्टिक सेंटर करने लगे है लेकिन उसके बाद स्पेशलाइज्ड Acute टेस्ट जहां ट्रीटमेंट बेहद जरुरी हो जाता है जहां टेस्ट का रिजल्ट बहुत जरुरी हो जाता है, इन स्पेशलाइज्ड Acute टेस्ट का रिजल्ट पिन पॉइंट होना चाहिए। और हम  रिजल्ट देते है, डॉक्टर्स इन रिजल्ट्स पर भरोसा करते है, और इसी में हम आगे बढ़ रहें हैं। हम आगे चल कर डिजिटल स्पेस में भी आ रहे है ताकि आम जनता तक Healthcare आसानी से पहुंच सके। वो भी किफायती दर पर और हर जगह।

हेल्थकेयर काफी महंगा होता जा रहा है। आपने अभी जिक्र किया आम जनमानस का तो किस तरह से Metropolis आम जनता तक पहुंचकर मदद कर रही है?

गरीब और जरूरतमंद जनता को अच्छा ट्रीटमेंट मिले इसलिए आज ही नहीं बल्कि मेट्रोपोलिस अरसे से मदद करती आ रही है। हम 25 सालों से लगातार लोगों को क़्वालिटी ट्रीटमेंट दे रहें हैं। हम देश के ज्यादातर शहरों के सरकारी अस्पतालों में टेस्ट करने के लिए कलेक्शन सेंटर खोले है। जहां हम 50 फीसदी और इससे कम दरों पर लोगों का टेस्ट करते है। ये टेस्ट उन्ही मरीजों का हम कम दरों पर करते है जो मरीज सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवा रहा है। ये मरीज हमारे सरकारी अस्पतालों के कलेक्शन सेंटर पर आये और केस पेपर दिखाकर टेस्ट करवाएं। ये सुविधाएं मुंबई के सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है। ये सुविधाएं रायपुर, बैंगलोर, दिल्ली जैसे तमाम शहरों में मौजूद है। इसके साथ ही गरीब और जरूरतमंद मरीजों को हम एक और सहूलियत देते हैं। अगर मरीज अपना राशन कार्ड या फिर इनकम प्रूफ दिखाता है तो उसे भी टेस्ट में छूट मिलता है। ये सभी सेंटर मेडिकल सेंटर या फिर सरकारी अस्पतालों में है।

Metropolis के ऐसे कौन-कौन से CSR ऐक्टिविटीज़ है जो आप कर रहें हैं?

वैसे तो Metropolis के कई CSR Initiatives है लेकिन मुख्य तौर पर हमारा MedEngage Scholarship Program है, हमने कई लैब सेटअप किये है जहां यंग डॉक्टर आकर लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से रूबरू होते है। बहुत सारे सरकारी मेडिकल कॉलेज में सभी हाई टेक तकनीक नहीं होता है ऐसे में ये डॉक्टर्स हमारे सेंटर में आकर सीखते है ताकि ये उसे जनता तक पहुंचा सकें। हम कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की मदद से टीबी और एनीमिया प्रोग्राम भी चलाते है। टीबी और एनीमिया प्रोग्राम हम सरकार के साथ चलाते है।

MedEngage Scholarship Program एक महत्वपूर्ण CSR ऐक्टिविटीज़ है, इस प्रोग्राम के जरिये कैसे Metropolis डॉक्टर्स की कमी को पूरा कर रही है?

देश में अगर डॉक्टर्स की पर्याप्त मात्रा होगी तो इसमें कोई शक नहीं कि हमारा हेल्थ सिस्टम में काफी सुधार होगा। कई ऐसे मेडिकल स्टूडेंट्स है जो अपने मेहनत के बलबूते मेडिकल की पढ़ाई कर रहे है लेकिन इसमें बहुत खर्चा आता है। 5 साल पहले हमने MedEngage Scholarship Program की शुरुआत की, इसके पीछे हमारा आईडिया ये था कि जब ये मेडिकल की पढ़ाई करते है तो इन्हे आर्थिक परेशानियां आती है। कई बार आर्थिक परेशानियों की वजह से मेडिकल स्टूडेंट ड्राप आउट भी कर लेते है, ऐसे होनहार बच्चों को हम आर्थिक मदद देते है। हम इन्हे Scholarship देते हैं। इस साल 250 मेडिकल स्टूडेंट को Scholarship मिला है। ये बच्चे हमारे देश के अच्छे डॉक्टर बनेंगे मुझे ये उम्मीद है।