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February 24, 2026

Marathi Medium School Shut Down in Maharashtra: महाराष्ट्र में 255 मराठी स्कूल बंद, मराठी अस्मिता पर चोट

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र की राजनीति में मराठी अस्मिता हमेशा बड़ा मुद्दा रही है, लेकिन Budget Session 2026 में सामने आए आंकड़ों ने चौंका दिया है। विधानसभा में सरकार ने खुद लिखित जवाब में बताया कि राज्य के पांचों विभाग कोकण, विदर्भ, पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और उत्तर महाराष्ट्र में कुल 255 मराठी माध्यम की स्कूलें बंद हो चुकी हैं। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis अक्सर अपने भाषणों में मराठी भाषा और संस्कृति के संरक्षण की बात करते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर सरकार मराठी प्रेम का दावा करती है तो फिर मराठी स्कूलों की यह हालत क्यों?

इंग्लिश मीडियम की तरफ बढ़ता रुझान, सरकार की नाकामी?

सरकार ने विधानसभा में कहा कि छात्र संख्या में लगातार गिरावट और माता-पिता का English Medium Schools की तरफ बढ़ता रुझान इसकी बड़ी वजह है। Competitive Education, Global Opportunities और करियर की चिंता के कारण अब ग्रामीण इलाकों में भी अभिभावक बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में भेज रहे हैं। लेकिन शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता का भी परिणाम है। अगर मराठी माध्यम की स्कूलों में Quality Education, Digital Learning और आधुनिक सुविधाएं समय पर दी जातीं तो शायद यह स्थिति नहीं आती।

255 स्कूल बंद, मराठी अस्मिता पर चोट

सरकार के मुताबिक बंद हुई स्कूलें राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैली हैं। खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में मराठी स्कूलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। छात्र संख्या कम होने के कारण प्रशासन ने इन्हें बंद करने का फैसला लिया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि Marathi Education System के सामने खड़ा बड़ा संकट है। भाषा सिर्फ पढ़ाई का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति और पहचान से जुड़ी होती है। ऐसे में लगातार स्कूल बंद होना चिंता का विषय है।

Marathi Medium School Shut Down in Maharashtra: सरकारी योजनाएं नाकाफी?

सरकार ने दावा किया है कि पहली से आठवीं तक मुफ्त किताबें, ड्रेस और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं दी जा रही हैं। Low Enrollment Schools के लिए विशेष योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन योजनाओं के बावजूद छात्र संख्या नहीं बढ़ रही। इससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकार की नीतियां प्रभावी हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? Marathi Schools Closure का मुद्दा अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। विपक्ष इसे सरकार की विफलता बता रहा है, वहीं शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि अगर तुरंत ठोस नीति नहीं बनी तो आने वाले वर्षों में और स्कूल बंद हो सकते हैं। महाराष्ट्र में 255 मराठी स्कूलों का बंद होना केवल शैक्षणिक संकट नहीं, बल्कि भाषाई और सांस्कृतिक चेतावनी भी है। अब देखना होगा कि सरकार मराठी भाषा को बचाने के लिए ठोस कदम उठाती है या यह आंकड़ा आगे और बढ़ता जाता है।
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