भारत में मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य देव की पूजा, नयी फसल का उत्सव और सामाजिक मिलन का प्रतीक है। हर साल यह पर्व 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है, लेकिन 2026 में इसे 14 जनवरी को विशेष रूप से मनाया जाएगा। इस बार मकर संक्रांति पर एक खास स्थिति बनी है, जिसके चलते पारंपरिक खिचड़ी का सेवन चुनौतीपूर्ण हो गया है।
मकर संक्रांति: सूर्य का उत्तरायण और नए साल की शुरुआत
मकर संक्रांति उस समय आती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है और दिन लंबे होने लगते हैं। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व या लोहड़ी के नाम से मनाया जाता है, जबकि तमिलनाडु में पोंगल, पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति और गुजरात में पतंग महोत्सव के रूप में प्रसिद्ध है।इस दिन लोग विशेष रूप से गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, जिससे पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही, दान, वस्त्र और अन्न दान करने का विशेष महत्व माना गया है।
खिचड़ी: साधारण भोजन नहीं, बल्कि परंपरा का प्रतीक
उत्तर प्रदेश, बिहार और आसपास के क्षेत्रों में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा बहुत पुरानी है। यह केवल स्वादिष्ट भोजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्रतीक भी है। ठंड के मौसम में खिचड़ी शरीर को गर्मी और शक्ति देती है।
कहा जाता है कि खिचड़ी की परंपरा बाबा गोरखनाथ से जुड़ी हुई है। खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को भोजन की कमी थी। बाबा गोरखनाथ ने उन्हें चावल, दाल और सब्जियों को एक साथ पकाने का सुझाव दिया। इस सरल और पौष्टिक भोजन ने योगियों को शक्ति दी और उन्हें कठिन समय में साहस और ऊर्जा प्रदान की। आज भी, गोरखनाथ मंदिरों में मकर संक्रांति पर खिचड़ी अर्पित की जाती है और इसे भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
ज्योतिषशास्त्र और खिचड़ी का संबंध
मकर संक्रांति पर खिचड़ी का महत्व केवल परंपरा तक सीमित नहीं है। ज्योतिषशास्त्र में हर सामग्री को किसी ग्रह से जोड़ा गया है।
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चावल – चंद्रमा: मानसिक शांति और संतुलन के लिए
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काली दाल (उड़द) – शनि: शनिदेव के प्रभाव को कम करने के लिए
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हल्दी – बृहस्पति: ज्ञान और सौभाग्य बढ़ाने के लिए
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तुप/घी – सूर्य: ऊर्जा और जीवन शक्ति के लिए
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हरी सब्जियां – बुध: बुद्धि और सामंजस्य के लिए
इस तरह, मकर संक्रांति की खिचड़ी एक प्रकार से सभी ग्रहों का संतुलन बनाने में मदद करती है।
2026 में खिचड़ी क्यों नहीं बनेगी?
इस बार मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही है। एकादशी के दिन शास्त्रों के अनुसार चावल और उससे बने भोजन का सेवन वर्जित होता है। इसे संयम और सात्विकता का दिन माना गया है।
इस कारण, 14 जनवरी 2026 को पारंपरिक खिचड़ी खाने से बचने की सलाह दी जा रही है। भक्तों को सलाह दी जा रही है कि वे खिचड़ी का दान कर सकते हैं, लेकिन स्वयं सेवन न करें। इसके बजाय तिल, गुड़, मूंगफली और फल का प्रयोग शुभ माना गया है।
पूरे भारत में विविध उत्सव
मकर संक्रांति के अवसर पर देश भर में अलग-अलग रीति-रिवाज मनाए जाते हैं:
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उत्तर भारत: लोहड़ी के रूप में आग जलाकर तिल-गुड़ और खिचड़ी का प्रसाद
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तमिलनाडु: चार दिन तक पोंगल उत्सव
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गुजरात: पतंग महोत्सव और तिल-गुड़ आदान-प्रदान
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महाराष्ट्र और मध्य भारत: सूर्य पूजा और तिलगुल के आदान-प्रदान
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पश्चिम बंगाल: पौष संक्रांति के रूप में नई फसल का उत्सव

