Maharashtra Flood: महाराष्ट्र का मराठवाड़ा इलाका, जो कभी सूखे की मार के लिए बदनाम था, आज भयानक बाढ़ से जूझ रहा है। खेत-खलिहान पानी में बह गए, किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, कई गांवों में घर डूब गए हैं और हजारों लोग सड़क किनारे आश्रय लेने को मजबूर हैं। सरकार ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं, लेकिन इस बार किसानों की मदद के लिए खुद ‘भगवान’ भी आगे आ गए हैं।
Maharashtra Flood: जानें किस मंदिर से मिला कितनी मदद
राज्य के कई प्रमुख मंदिर ट्रस्टों ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए करोड़ों की राशि दान की है। यह मदद किसानों और ग्रामीणों के लिए उस समय आई है जब उन्हें सबसे ज्यादा सहारे की जरूरत है।
मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ने राहत कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। श्री गजानन महाराज संस्थान, शेगांव ने 1 करोड़ 11 लाख रुपये दान दिए। तुलजा भवानी मंदिर, तुलजापुर ने 1 करोड़ रुपये सहयोग किया। विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर समिति, पंढरपुर ने 1 करोड़ रुपये दिए। साईबाबा मंदिर ट्रस्ट, शिरडी ने 1 करोड़ रुपये की मदद दी। रेणुका देवी मंदिर, माहूरगढ़ (नांदेड़) ने भी 1 करोड़ रुपये सहयोग किया।
किसान बोले “ईश्वर ने सचमुच हमारी सुनी”
बाढ़ से तबाह हुए किसानों ने मंदिरों की इस मदद पर राहत की सांस ली है। उनका कहना है कि फसल बर्बाद होने और घर उजड़ने के बाद उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी कोई हाथ आगे बढ़ेगा। एक किसान ने कहा कि हम सोचते थे भगवान हमें क्यों दुख दे रहे हैं, लेकिन आज लगता है कि भगवान सचमुच हमारी मदद को आ गए।
Maharashtra Flood: प्रशासन और समाज दोनों सक्रिय
सरकार की ओर से बचाव और पुनर्वास कार्य जारी हैं, वहीं सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थानों का यह सहयोग राहत पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब धर्म और समाज कल्याण हाथ मिलाते हैं, तब मुश्किल हालात से उबरना आसान हो जाता है। महाराष्ट्र के किसानों के लिए यह बाढ़ किसी त्रासदी से कम नहीं, लेकिन मंदिरों की इस उदार पहल ने दिखा दिया कि मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि समाज सेवा का भी बड़ा माध्यम हैं। इस बार किसानों को सचमुच महसूस हो रहा है कि “भगवान उनके साथ खड़े हैं।”
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