गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम तट पर आयोजित माघ मेला (Magh Mela Snan) अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। मेला के चौथे स्नान पर्व बसंत पंचमी (Uttar Pradesh Basant Panchami) और उसके बाद पड़ने वाली अचला सप्तमी को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। सप्ताहांत के साथ लगातार तीन दिनों तक पड़ रहे प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए मेला प्रशासन ने करीब 3.5 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम में पुण्य स्नान करने का अनुमान लगाया है।
बसंत पंचमी पर उमड़ेगी सबसे ज्यादा भीड़
मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार, मौनी अमावस्या के बाद बसंत पंचमी ऐसा पर्व है, जब संगम में सबसे अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक पंचमी तिथि 22 जनवरी की रात 2.28 बजे से शुरू होकर 23 जनवरी की रात 1.56 बजे तक रहेगी। इस दौरान श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में स्नान कर पीले वस्त्र, पीले अन्न और दान-पुण्य करेंगे। इसके बाद 25 जनवरी को अचला सप्तमी (भानु सप्तमी) का पर्व है, जिसमें अन्न भंडारे की परंपरा निभाई जाती है। 24 जनवरी को सप्ताहांत होने के कारण माघ मेला क्षेत्र में तीन दिन तक भारी भीड़ रहने की संभावना है।
24 घाटों पर स्नान, सभी बुनियादी सुविधाएं पूरी
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र में 3.5 किलोमीटर लंबाई में 24 स्नान घाट तैयार किए गए हैं। घाटों की नियमित सफाई, निर्मल जल की उपलब्धता, चेंजिंग रूम, पेयजल, शौचालय, मेडिकल सुविधा और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि स्नान व्यवस्था से लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी तक हर स्तर पर तैयारी पूरी है।
पांटून पुलों पर ऑड-इवेन व्यवस्था
भीड़ को नियंत्रित रखने और सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए पांटून पुलों पर ऑड-इवेन सिस्टम लागू किया गया है।
परेड से झूंसी जाने के लिए पांटून पुल संख्या 3, 5 और 7
झूंसी से परेड आने के लिए पांटून पुल संख्या 4 और 6
आपात स्थिति के लिए पांटून पुल 1 और 2 पर भारी पुलिस बल तैनात रहेगा
23 जनवरी को नया यमुना पुल रहेगा बंद
मेला पुलिस अधीक्षक नीरज पांडेय के मुताबिक, बसंत पंचमी स्नान पर्व के दिन 23 जनवरी को नया यमुना पुल पूरी तरह बंद रहेगा। केवल पुराने यमुना पुल से ही आवागमन की अनुमति होगी। माघ मेला से संबंधित वाहनों को छोड़कर अन्य भारी और हल्के वाहनों को शहर की सीमा से पहले ही रूट डायवर्जन के जरिए वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुगम दर्शन और शांतिपूर्ण स्नान उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। माघ मेला क्षेत्र में पुलिस, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि आस्था के इस महापर्व को पूरी तरह सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके।
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