न दिल्ली न नोएडा, PM2.5 स्तर के साथ गाजियाबाद का लोनी बना दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर

The CSR Journal Magazine

निर्मम प्रदूषण से गाजियाबाद का लोनी सबसे ऊपर

हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रदूषण के मामले में कुछ हद तक सुधार हुआ है, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साल 2025 के सुरक्षा मानकों के अनुसार, गाजियाबाद का लोनी शहर 112.5µg/m³ के सालाना औसत PM2.5 स्तर के साथ दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशा-निर्देश से करीब 22 गुना अधिक है। यह निश्चित रूप से एक अलार्मींग स्थिति है।

दिल्ली का चौथा स्थान, सुधार की उम्मीदें

दिल्ली ने साल 2025 में 99.6µg/m³ के PM2.5 स्तर के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया। यह आंकड़ा भी WHO द्वारा तय सीमा से 20 गुना अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण स्तर में मामूली गिरावट आई है, लेकिन अभी भी स्थिति चिंताजनक है। खास बात यह है कि राजधानी क्षेत्र की तुलना में नई दिल्ली का PM2.5 स्तर 82.2µg/m³ दर्ज किया गया।

क्या हैं भारत के प्रदूषण के कारण?

गाजियाबाद और दिल्ली में प्रदूषण के कई कारण हैं, जिनमें उद्योगों का धुआँ, वाहनों की बढ़ती संख्या और निर्माण कार्य शामिल हैं। इन कारणों के चलते प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में समय-समय पर सरकारी हस्तक्षेप आवश्यक है।

दुनिया के अन्य प्रदूषित शहर

रिपोर्ट ने यह भी बताया है कि गाजियाबाद के लोनी के बाद चीन का होटन (109.6µg/m³) और मेघालय का बिरनीहाट (101.6µg/m³) दुनिया के अन्य सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के अलावा भी कुछ अन्य देश इस समस्या का सामना कर रहे हैं। दुनिया के सबसे प्रदूषित टॉप 10 शहरों की सूची में भारत के 5 शहर शामिल हैं, लोनी (1), बर्नीहाट (2), दिल्ली (4), गाजियाबाद (5) और उला (6)। देशों की सूची में पाकिस्तान पहले स्थान पर है, जबकि भारत दुनिया का छठा सबसे प्रदूषित देश बन गया है।

सूचना का अभाव: क्या किया जा रहा है?

भारत के लिए यह जरूरी है कि वह प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से ले। वर्ष 2024 में भारत का PM2.5 स्तर 50.6µg/m³ था, लेकिन अब 48.9µg/m³ तक पहुंच गया है। इस मामूली कमी के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

बांग्लादेश और पाकिस्तान भी प्रदूषण में पीछे नहीं

दुनिया के सबसे अधिक प्रदूषित देशों की सूची में बांग्लादेश और पाकिस्तान शामिल हैं। बांग्लादेश का PM2.5 स्तर 66.1µg/m³ और पाकिस्तान का 67.3µg/m³ है। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए खतरा बनी हुई है।

हरित पहलों की जरूरत

हमें अब सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि प्रदूषण के स्तर में सुधार लाने के लिए हरित पहलों की आवश्यकता है। केवल नीतियों के माध्यम से नहीं, बल्कि जनता को भी जागरूक करने की जरूरत है ताकि सभी मिलकर इस समस्या का सामना कर सकें।

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