केरल में बुजुर्गों के लिए ऐतिहासिक विधेयक: तीन साल की जेल और 50 हजार रुपये का जुर्माना

The CSR Journal Magazine
केरल सरकार ने बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा और उनके साथ होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विधानसभा में ‘केरल सीनियर सिटीजंस (केयर एंड प्रोटेक्शन आफ राइट्स) बिल, 2026’ पेश किया। यह विधेयक बुजुर्गों के जीवन में एक नई उम्मीद की किरण लेकर आया है। इसके तहत बुजुर्गों के साथ मारपीट, मानसिक प्रताड़ना, संपत्ति पर अवैध कब्जा और बिना पंजीकरण के देखभाल केंद्र चलाने जैसे अपराधों के लिए तीन साल तक की जेल और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

सिल्वर इकोनमी का नया दृष्टिकोण

इस विधेयक के अंतर्गत राज्य में वृद्धजनों की देखभाल के लिए एक समर्पित विभाग का गठन किया जाएगा। यह विभाग 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के अनुभव का लाभ उठाकर ‘सिल्वर इकोनमी’ को बढ़ावा देगा। सिल्वर इकोनमी उन आर्थिक गतिविधियों, उत्पादों और सेवाओं का एक सिस्टम है, जो 50 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाती है। यह नाम बुजुर्गों के सफेद बालों के आधार पर रखा गया है।

मुख्यमंत्री का भावुक जिक्र

मुख्यमंत्री सतीशन ने विधेयक पेश करते समय उद्योगपति दिवंगत विजयपत सिंघानिया की आत्मकथा ‘ऐन इनकंप्लीट लाइफ’ का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे सिंघानिया, जो कभी हजारों करोड़ की संपत्ति के मालिक थे, अपने जीवन के अंतिम दिनों में अपने बेटे द्वारा संपत्ति सौंपने के बाद एक छोटे से वन-बीएचके फ्लैट में रहने को मजबूर हो गए थे। यह कहानी केवल सिंघानिया की नहीं, बल्कि हमारे समाज के उन सभी बुजुर्गों की है, जिन्हें उनके अपने बच्चे वृद्धाश्रमों में छोड़ देते हैं।

कड़े नियम और व्यापक सुरक्षा तंत्र

यह विधेयक बुजुर्गों की व्यापक परिभाषा तय करता है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और वित्तीय शोषण के साथ-साथ बुनियादी जरूरतों की उपेक्षा को भी अपराध माना गया है। राज्यभर में वृद्धाश्रमों, डे-केयर सेंटरों और होम-केयर एजेंसियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘राज्य वरिष्ठ नागरिक संरक्षण इकाई’ और जिला स्तर पर मंचों का गठन किया जाएगा।

स्वयंसेवकों का नेटवर्क और विशेष डाटा बेस

सरकार बिस्तर पर लेटे मरीजों, डिमेंशिया और कैंसर से पीड़ित बुजुर्गों के लिए विशेष डाटा बेस तैयार कर रही है। यह डाटा बेस व्यापक स्तर पर स्वयंसेवकों का एक मजबूत नेटवर्क विकसित करेगा। इस पहल से बुजुर्गों की देखभाल में सुधार होगा और उन्हें बेहतर सामाजिक सुरक्षा मिलेगी।

बुजुर्गों की देखभाल में सामूहिक जिम्मेदारी

इस विधेयक का लक्ष्य केवल कानून बनाना नहीं है, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना भी है। यह विधेयक उन सभी के लिए एक संदेश है कि बुजुर्गों की देखभाल हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार का प्रयास है कि बुजुर्गों को वह सम्मान और सुरक्षा मिले, जिसके वे हकदार हैं।

समाज में बदलाव की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विधेयक समाज में बदलाव की आवश्यकता को दर्शाता है। बुजुर्गों की देखभाल और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार करना जरूरी है। यह विधेयक न केवल कानूनी प्रावधानों को लागू करेगा, बल्कि समाज में बुजुर्गों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

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