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January 20, 2026

कर्नाटक के DGP के. रामचंद्र राव निलंबित, वायरल वीडियो कांड में सरकार की बड़ी कार्रवाई !

The CSR Journal Magazine

 

कर्नाटक सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) के. रामचंद्र राव को निलंबित किया! उनका आचरण “सरकारी सेवक के लिए अनुचित” पाया गया और इससे “राज्य सरकार की छवि को ठेस” पहुंची! यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर सामने आए एक विवादित वीडियो से जुड़े मामले में की गई है, जिसे लेकर राज्य की  राजनीति और प्रशासन में हलचल मच गई है। महिला की पहचान और वीडियो की प्रामाणिकता की जांच जारी, गृह मंत्री बोले-“तथ्यों के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई! किसी को बख्शा नहीं जाएगा!”

कर्नाटक डीजीपी निलंबन मामला: वीडियो कांड में सरकार की बड़ी कार्रवाई

कर्नाटक सरकार ने पुलिस प्रशासन के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी के खिलाफ अभूतपूर्व कार्रवाई करते हुए राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) के. रामचंद्र राव को निलंबित कर दिया है। यह कदम सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विवादित वीडियो के बाद उठाया गया है, जिसे सरकार ने “सरकारी सेवक के लिए अनुचित आचरण और “सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला” बताया है।

सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला उस समय सामने आया जब एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में एक महिला से जुड़ा आपत्तिजनक संदर्भ होने का दावा किया गया और इसे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जोड़कर देखा जाने लगा। वीडियो के प्रसार के साथ ही सार्वजनिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। वीडियो सामने आने के बाद इसकी सत्यता पर सवाल उठे। यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि वीडियो असली है या उसमें छेड़छाड़ की गई है। साथ ही वीडियो में दिख रही महिला की पहचान को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने किसी भी निष्कर्ष से पहले जांच का फैसला किया।

सरकार की प्रारंभिक समीक्षा

विवाद बढ़ने पर राज्य सरकार ने मामले की प्रारंभिक समीक्षा करवाई। उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि मामले से राज्य सरकार को सार्वजनिक रूप से असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। इसके बाद डीजीपी के. रामचंद्र राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया गया।

‘कथित आचरण सरकारी सेवा नियमों के अनुरूप नहीं’- निलंबन आदेश

सरकारी आदेश में कहा गया है कि डीजीपी का कथित आचरण “सरकारी सेवा नियमों के अनुरूप नहीं” है और इससे सरकार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। आदेश के अनुसार, जांच पूरी होने तक वे अपने पद पर कार्य नहीं करेंगे और उनके खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी। कर्नाटक के गृह मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महिला की पहचान और वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार न तो किसी दबाव में है और न ही किसी को संरक्षण दिया जाएगा। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि वीडियो किसने बनाया, किसने वायरल किया और इसके पीछे क्या मंशा थी।

वीडियो की फॉरेंसिक जांच

सरकार ने संकेत दिए हैं कि वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी। सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार की पूरी कड़ी की जांच होगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित महिला का बयान भी दर्ज किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी और विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

कौन हैं कर्नाटक DGP के. रामचंद्र राव?

के. रामचंद्र राव कर्नाटक कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे राज्य पुलिस के  सर्वोच्च पद पुलिस महानिदेशक (DGP) के रूप में तैनात रहे हैं। पुलिस सेवा में उन्हें एक अनुभवी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने वाला अधिकारी माना जाता रहा है। के. रामचंद्र राव ने अपने लंबे पुलिस करियर में कानून-व्यवस्था, प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। वे राज्य और केंद्र सरकार के अधीन विभिन्न पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनके पास फील्ड पोस्टिंग के साथ-साथ वरिष्ठ स्तर पर नीतिगत और प्रशासनिक अनुभव भी रहा है।

DGP के रूप में भूमिका

कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक के तौर पर उनके पास राज्य की संपूर्ण पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी थी। इसमें कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध नियंत्रण, पुलिस बल का प्रशासन और संवेदनशील मामलों में सरकार को सलाह देना शामिल है। DGP पद को पुलिस सेवा का सबसे अहम और जिम्मेदार पद माना जाता है। हाल ही में एक वायरल वीडियो से जुड़े विवाद के बाद उनका नाम सुर्खियों में आया। इस मामले को लेकर कर्नाटक सरकार ने उनके आचरण को लेकर सवाल उठाए और जांच लंबित रहने तक उन्हें निलंबित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक मर्यादा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग की है, वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। जानकारों का मानना है कि यह मामला भविष्य में प्रशासनिक नैतिकता के लिए एक मिसाल बन सकता है। फिलहाल डीजीपी निलंबित हैं और जांच जारी है। पूरे राज्य की निगाहें अब जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित रहेगा या आगे कानूनी कार्रवाई का रूप लेगा।

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