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April 4, 2025

Telangana में सैकड़ों एकड़ जंगल की कटाई शुरू, HU छात्रों का विरोध प्रदर्शन

Telangana में Hyderabad University के पास स्थित 400 एकड़ ज़मीन की नीलामी के ख़िलाफ़ छात्रों का विरोध तेज़ हो गया है। छात्र और Environment Activists सरकार के इस कदम को Ecosystem के लिए ख़तरे के रूप में देख रहे हैं।
Telangana Hyderabad के कांचा गचीबोवली Kancha Gachibowali इलाके में तेलंगाना की Congress सरकार 400 एकड़ जंगल की ज़मीन से पेड़-पौधों और झाड़ियों को हटा रही है। सरकार के इस कदम से Hyderabad University के छात्र और पर्यावरण कार्यकर्ता नाराज़ हैं। प्रस्तावित IT Park के निर्माण के लिए 400 एकड़ का जंगल साफ़ किया जा रहा है। हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ ने मंगलवार (1 अप्रैल) से अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन और कक्षाओं के बहिष्कार की घोषणा की है। उनकी मांग है कि पुलिस बल और निर्माण कार्य में लगी मशीनों को University Campus से तुरंत हटाया जाए।

Telangana Hyderabad University छात्रों का विरोध प्रदर्शन

छात्र संघ के उपाध्यक्ष आकाश ने छात्रों और शिक्षकों से इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और शैक्षणिक गतिविधियों को रोकने की अपील की है। Hyderabad University Students Council और अन्य छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों को धोखा देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि प्रशासन ने सरकार को 400 एकड़ जमीन साफ करने की अनुमति दी है, जो Kancha Gachibowali में विश्वविद्यालय से सटी हुई है। छात्र शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई की भी आलोचना कर रहे हैं। ‘ज़मीन सफ़ाई’ का कार्य 30 मार्च दोपहर से पुलिस की मौजूदगी में चल रहा है। जब छात्रों ने इसे रोकने की कोशिश की तो 50 से अधिक छात्रों को हिरासत में ले लिया गया, जिन्हें बाद में रिहा किया गया। Hyderabad के Rangareddy ज़िले में स्थित इस 400 एकड़ भूमि की प्रस्तावित नीलामी से राज्य सरकार को 10,000 से 15,000 करोड़ रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। सरकार यहां विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, IT Park और आधुनिक शहरी आवासीय क्षेत्र विकसित करना चाहती है।

Hyderabad सरकार की सफाई

Hyderabad CM Revanth Reddy के कार्यालय की तरफ से जारी बयान में ज़मीन पर राज्य सरकार के कानूनी स्वामित्व का दावा किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय तक चले कानूनी विवाद में आखिरकार मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया, जिससे उसे इस जमीन पर पूरा अधिकार मिल गया। Telangana राज्य सरकार का दावा है कि 2004 में यह जमीन एक प्राइवेट कंपनी IMG Academies India PVT LTD को Sports इंफ्रास्टक्चर विकसित करने के लिए दी गई थी। लेकिन 2006 में कंपनी परियोजना शुरू करने में विफल रही और सरकार ने आवंटन रद्द कर जमीन आंध्र प्रदेश युवा उन्नति, पर्यटन और सांस्कृतिक विभाग को सौंप दिया। इसके बाद IMG Academies ने 2006 में इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिससे कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। 7 मार्च 2024 को Telangana High Court ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया और पुष्टि की कि जमीन सरकार की है। IMG एकेडमीज़ ने High Court के फैसले को Supreme Court में चुनौती दी, लेकिन 3 मई 2024 को Supreme Court ने उनकी याचिका खारिज कर दी। सभी कानूनी बाधाओं के हटने के बाद Telangana सरकार ने जमीन अपने नियंत्रण में ले ली। Telangana सरकार का दावा है कि 19 जून 2024 को तेलंगाना इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन (TGIIC) ने इस जमीन पर IT Park और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास की योजना बनाई और सरकार से अनुमति मांगी। 24 जून 2024 को राजस्व विभाग के प्रधान सचिव ने आधिकारिक रूप से इस जमीन के अधिकार TGIIC को सौंप दिए।
Telangana सरकार का ये भी दावा है कि 4 जुलाई 2024 को TGIIC ने Hyderabad University से संपर्क कर जमीन की सीमाओं को स्पष्ट करने में सहयोग मांगा। 19 जुलाई 2024 को एक सर्वेक्षण किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय और सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में यह पुष्टि की गई कि यह विवादित जमीन विश्वविद्यालय की संपत्ति नहीं है। Ecosystem चिंताओं पर Telangana सरकार कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन जंगल क्षेत्र के रूप में दर्ज नहीं है, बल्कि सरकार की संपत्ति है।
सरकार ने छात्रों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि इस विकास क्षेत्र में कोई झील नहीं है। Telangana सरकार ने आश्वासन दिया की ज़मीन पर निर्माण के दौरान मशहूर Mushroom Rock समेत सभी प्रमुख चट्टानों को संरक्षित किया जाएगा। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता और रियल एस्टेट से जुड़े लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए छात्रों को गुमराह कर रहे हैं। सरकार ने जोर देकर कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और विश्वविद्यालय का इस जमीन पर कोई दावा नहीं बनता।

प्रदर्शनकारी छात्रों का क्या है कहना

Hyderabad University के छात्रों के अनुसार लगभग 50 Earth Movers को हरित क्षेत्र (ग्रीन स्पेस) को समतल करने के लिए तैनात किया गया है। एक छात्र नेता ने कहा, ‘वे रातभर (30 मार्च की रात) काम करते रहे और पूरे Ecosystem को नष्ट कर दिया। Social Media पर वाइरल इस विडिओ में अपना घरौंदा उजड़ते देख पक्षियों का कातर रुदन सुना जा सकता है। जबकि इस 400 एकड़ भूमि को National Park घोषित करने की मांग वाली याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई है, जिसकी सुनवाई 7 अप्रैल को होनी है।’ छात्रों ने 2008-09 में हैदराबाद विश्वविद्यालय और वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWAF)-India द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि यह क्षेत्र 455 से अधिक प्रकार की वनस्पतियों और जीवों का निवास स्थान है। इसमें जड़ी-बूटियां, झाड़ियां, बेलें, तितलियां, ड्रैगनफ्लाई जैसी प्रजातियां, मकड़ियां, उभयचर जीव, पक्षी और स्तनधारी शामिल हैं। सरकार जुलाई 2024 में सर्वेक्षण का दावा कर रही है लेकिन छात्रों का कहना है कि सरकार ने अभी तक इस भूमि को विश्वविद्यालय परिसर से अलग करने के लिए कोई सर्वेक्षण नहीं किया है। University Management ने भी सरकार के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि जुलाई 2024 में कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार देवेश निगम ने पुष्टि की कि केवल एक प्रारंभिक निरीक्षण किया गया था, लेकिन सीमा को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ।

छात्रों का दावा है कि 400 एकड़ का यह क्षेत्र बड़े Ecosystem का हिस्सा है, जिसमें कई वनस्पतियां और जीव-जंतु, संरक्षित और लुप्तप्राय (Extinct) प्रजातियों की श्रेणी में आते हैं। कार्यकर्ता और छात्र, 1996 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (T N Godavaraman Thirumulapada vs Indian Government) का हवाला देते हैं, जिसमें कहा गया था कि यदि किसी भूमि पर वनस्पति आच्छादन (Green Cover) है, तो उसे ‘वन भूमि’ माना जाएगा, भले ही वह आधिकारिक रूप से अधिसूचित या Registered न हो। अदालत ने स्पष्ट किया था कि ‘वन’ शब्द का अर्थ उसकी पारंपरिक परिभाषा के अनुसार समझा जाना चाहिए।  ‘Save City Forest’ नामक संगठन के कार्यकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि ‘अगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध प्रजातियों वाले किसी जंगल को बिना किसी पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन या पर्यावरणीय मंजूरी के नष्ट किया जाता है, तो यह वन्यजीव और पर्यावरण कानूनों के तहत एक गंभीर अपराध है।’

विपक्ष का विरोध और Telangana सरकार की सख्ती

Hyderabad Police ने मंगलवार (1 अप्रैल) को Telangana के BJP विधायक पायल शंकर को हिरासत में ले लिया। पायल शंकर Hyderabad के MLA Quarters से हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी और विवादित 400 एकड़ जमीन का दौरा करने के लिए निकले, तभी उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया। BJP विधायक ने Congress के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि Gachibowali इलाके में स्थित Hyderabad University से जुड़ी 400 एकड़ जमीन को सरकार कथित रूप से बेचने की योजना बना रही है। BJP विधायक ने कहा कि यह ज़मीन भले ही सरकार की है, लेकिन सरकार को इसे बेचने का ‘अधिकार’ नहीं है।
भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष K T Ramarao ने जमीन नीलामी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। Telangana भवन में प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने के बाद, K T Ramarao ने आरोप लगाया कि पुलिस ने विश्वविद्यालय के कुलपति की अनुमति के बिना परिसर में प्रवेश किया। उन्होंने कहा, ‘छात्राओं को घसीटा गया, उनके कपड़े फाड़े गए, और दो छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वे अब कहां हैं? सरकार को तुरंत उनकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।’ उन्होंने छात्रों को कानूनी और नैतिक समर्थन देने का आश्वासन दिया और कहा कि BRS इस मुद्दे को संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक उठाएगा और CM Revanth Reddy व उनकी सरकार को इसका जवाब देना होगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने भी राज्य सरकार के कदम की कड़ी आलोचना करते हुए दावा किया कि यह ज़मीन वन क्षेत्र में आती है। उन्होंने कहा, ‘वह 400 एकड़ ज़मीन, जिसे राज्य सरकार नीलाम करने की योजना बना रही थी, वन क्षेत्र के अंतर्गत आती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, केंद्र सरकार की मंज़ूरी के बिना किसी भी वन भूमि को साफ नहीं किया जा सकता। Kancha Gachibowali में 400 एकड़ भूमि से जुड़ा मामला वर्तमान में हाईकोर्ट में लंबित है।’ इस बीच, केंद्रीय मंत्री G Kishan Reddy ने सरकार से इस 400 एकड़ भूमि की बिक्री को तुरंत रोकने की मांग की। उन्होंने सरकार से पेड़ काटने की गतिविधियों को भी रोकने का अनुरोध किया।

पत्रकार को हिरासत में लिया गया

रविवार (31 मार्च) को हैदराबाद विश्वविद्यालय में चल रहे छात्र आंदोलन को कवर कर रहे पत्रकार सुमित झा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। South First के पत्रकार सुमित विरोध प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे थे। उन्होंने अपना Press Card भी Police को दिखाया, इसके बावजूद पुलिस उन्हें कोल्लूर थाने ले गई, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। पुलिस ने पत्रकार का फोन भी छीन लिया था, जो बाद में लौटा दिया।

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