Jewar Airport Controversy: 61 किमी में दो एयरपोर्ट! विकास की रफ्तार या नियमों की अनदेखी? जेवर प्रोजेक्ट को लेकर योगी सरकार पर उठे गंभीर सवाल

The CSR Journal Magazine
Jewar Airport Controversy: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida Jewar International Airport) को जहां सरकार विकास का सबसे बड़ा प्रतीक बता रही है, वहीं अब यह प्रोजेक्ट नियमों की अनदेखी और जल्दबाजी का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। महज 61 किलोमीटर की दूरी पर इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Indira Gandhi International Airport) जैसे बड़े एयरपोर्ट के बावजूद नए एयरपोर्ट का निर्माण कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

150 किमी नियम: कागज पर या जमीन पर?

देश में एविएशन सेक्टर का एक स्थापित नियम है कि किसी मौजूदा एयरपोर्ट के 150 किलोमीटर के भीतर नया ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नहीं बनाया जाएगा। इसका मकसद साफ है एयरस्पेस टकराव से बचाव और मौजूदा एयरपोर्ट की कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना। लेकिन जेवर एयरपोर्ट के मामले में यह नियम या तो नजरअंदाज किया गया या फिर खास छूट के जरिए दरकिनार कर दिया गया। योगी आदित्यनाथ सरकार इस प्रोजेक्ट को गेम चेंजर बताकर प्रचारित कर रही है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या विकास के नाम पर नियमों को कमजोर किया जा सकता है?

Jewar Airport Controversy: एयरस्पेस पर बढ़ेगा दबाव

दिल्ली-NCR का एयरस्पेस पहले से ही देश के सबसे व्यस्त एयरस्पेस में गिना जाता है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट के जुड़ने से ट्रैफिक और जटिल हो सकता है। इसका असर न केवल फ्लाइट ऑपरेशन पर पड़ेगा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और समयबद्धता पर भी सवाल उठ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी नजदीकी पर दो बड़े एयरपोर्ट होने से एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट, फ्लाइट सेफ्टी और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन में गंभीर चुनौतियां आ सकती हैं।

राजनीति में भी गरमाया मुद्दा

विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए नियमों को दरकिनार किया गया। सवाल यह भी है कि क्या इस फैसले में पारदर्शिता बरती गई या सिर्फ “बड़े प्रोजेक्ट” के नाम पर प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया?

Jewar Airport Controversy: उपलब्धि या भविष्य का जोखिम?

जेवर एयरपोर्ट निश्चित रूप से एक बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, लेकिन इसकी योजना और नियमों को लेकर उठते सवाल इसे विवादों में खड़ा कर रहे हैं। अगर भविष्य में एयरस्पेस से जुड़े तकनीकी या सुरक्षा मुद्दे सामने आते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी यह बड़ा सवाल है। विकास जरूरी है, लेकिन नियमों और सुरक्षा मानकों की कीमत पर नहीं। योगी आदित्यनाथ सरकार के लिए जेवर एयरपोर्ट अब सिर्फ एक उपलब्धि नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की परीक्षा बन गया है।
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