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January 27, 2026

Jaya Ekadashi 2026: कब है, क्या है धार्मिक महत्व? जानें पूजा विधि, शुभ योग, कथा, नियम और तिथि से जुड़ी पूरी जानकारी

The CSR Journal Magazine
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहा जाता है। साल 2026 में इसे लेकर लोगों के मन में यह सवाल था कि व्रत 28 जनवरी को रखा जाए या 29 जनवरी को। पंचांग गणना के मुताबिक एकादशी तिथि 28 जनवरी 2026 को शाम 04:35 बजे शुरू होकर 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01:55 बजे समाप्त होगी। चूंकि एकादशी की उदया तिथि 29 जनवरी को है, इसलिए जया एकादशी का व्रत गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को रखा जाएगा।

जया एकादशी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

जया एकादशी को केवल उपवास का दिन नहीं माना जाता, बल्कि इसे आत्मशुद्धि, भय नाश और अदृश्य बाधाओं से मुक्ति देने वाली तिथि कहा गया है। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पिशाच योनि से भी मुक्ति दिलाने वाला है, इसी कारण इसे पिशाच मोचिनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और संयम के साथ यह व्रत करता है, उसके जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, अकाल मृत्यु का भय और दुर्भाग्य दूर हो जाता है।

Jaya Ekadashi 2026 के शुभ योग, बन रहा है दुर्लभ संयोग

साल 2026 में जया एकादशी पर कई विशेष योग बन रहे हैं। इस दिन रवि योग, भद्रावास और शिववास योग का संयोग बन रहा है। इन योगों में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से करियर, व्यापार और स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिलता है। साथ ही रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का संयोग इस दिन को और भी प्रभावशाली बनाता है।

जया एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त

  • सुबह पूजा मुहूर्त: 07:11 बजे से 08:32 बजे तक
  • दोपहर पूजा मुहूर्त: 11:14 बजे से 01:55 बजे तक
  • पारण समय: 30 जनवरी 2026 को सुबह 06:41 से 08:56 बजे के बीच

जया एकादशी की पूजा विधि

एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। शुद्ध जल या गंगाजल से अभिषेक करें और तुलसी दल अवश्य अर्पित करें। इसके बाद पीला चंदन, फूल, फल, पंचामृत और धूप-दीप से विधिवत पूजा करें। इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। अंत में विष्णु जी और एकादशी माता की आरती करें।

जया एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि एक गंधर्व दंपत्ति को श्रापवश कठिन जीवन भोगना पड़ा। ऋषियों की सलाह पर उन्होंने जया एकादशी का व्रत किया, जिसके बाद उन्हें मुक्ति प्राप्त हुई। इस कथा को प्रतीकात्मक रूप से देखा जाता है, जो यह संदेश देती है कि अनुशासन, संयम और सकारात्मक आचरण से जीवन में सुधार संभव है।

जया एकादशी के दिन किन बातों का ध्यान रखें

धार्मिक परंपराओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता। साथ ही क्रोध, निंदा और असंयमित व्यवहार से बचने की सलाह दी जाती है। यह दिन आत्मचिंतन, ध्यान और शांत व्यवहार के लिए उपयुक्त माना जाता है।

जया एकादशी व्रत से मिलने वाले लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जया एकादशी का व्रत शत्रुओं पर विजय दिलाता है, पापों का नाश करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। माघ मास में इस दिन किया गया दान तीन गुना फल देने वाला माना गया है। यही कारण है कि इसे सभी एकादशियों में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।
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