संस्कृत में ‘शास्त्री’ की डिग्री लेकर आईपीएस बने विजय सिंह गुर्जर ने किसानों को उनकी जमीन दिलवाने में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

The CSR Journal Magazine

किसान परिवार से आईपीएस बनने की प्रेरणादायक कहानी

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, जिसे देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है, को पास करने के लिए लोग कई बार महंगी कोचिंग और सालों की मेहनत करते हैं। लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो हर दीवार को चीरकर बाहर आती हैं। राजस्थान के साधारण किसान परिवार में जन्मे विजय सिंह गुर्जर की कहानी कुछ ऐसी ही है। संस्कृत में ‘शास्त्री’ की डिग्री हासिल करने वाले विजय ने दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी की और कई असफलताओं का सामना किया। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास की और आज गुजरात कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अफसर के रूप में राजकोट ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

साधारण पृष्ठभूमि से शुरूआत

विजय सिंह गुर्जर का जन्म झुंझुनूं जिले के देवीपुरा बणी गांव में हुआ। उनके पिता खेती करते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। इसके बावजूद, विजय ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

पढ़ाई और नौकरी का संघर्ष

ग्रेजुएशन के बाद विजय सिंह ने परिवार की जिम्मेदारियों को संभालने के लिए 2010 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के रूप में नौकरी शुरू की। इसके बाद, उन्होंने डिपार्टमेंटल परीक्षा पास कर सब-इंस्पेक्टर (SI) का पद हासिल किया। विजय ने सेंट्रल एक्साइज और इनकम टैक्स विभाग में भी अपनी सेवाएं दीं। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी शुरू की।

असफलताओं के बावजूद हिम्मत नहीं हारी

विजय ने पहले तीन साल (2013 से 2015) यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं की। 2016 में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं आया। इन असफलताओं के बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरियों को ताकत बनाया और नौकरी के बचे समय में पढ़ाई जारी रखी।

सफलता की ओर कदम बढ़ाते हुए

विजय सिंह गुर्जर ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई की और बड़े कोचिंग संस्थानों की कमी के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उनकी पत्नी और परिवार ने हर कदम पर उनका मानसिक संबल बढ़ाया। अंततः, 2017 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में विजय ने 574वीं रैंक हासिल की। वर्ष 2018 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी के रूप में उनका चयन हुआ।

किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष

वर्तमान में, विजय सिंह गुर्जर राजकोट ग्रामीण एसपी के रूप में तैनात हैं। उनकी सख्त कार्यशैली और जनता के प्रति संवेदना के लिए वे चर्चा में हैं। उन्होंने सूदखोरों के चंगुल से किसानों को उनकी करोड़ों रुपये की जमीन कानूनी कार्रवाई कर वापस दिलवाई है। इस कार्य ने उन्हें किसानों के बीच एक नायक बना दिया है।

समाज में बदलाव लाने की कोशिश

विजय सिंह गुर्जर की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो किसी भी बैकग्राउंड से सफलता पाई जा सकती है। उनकी मेहनत और संघर्ष ने न केवल उन्हें आईपीएस बनाया, बल्कि समाज में भी बदलाव लाने का कार्य किया है। आज वे एक प्रेरणा स्रोत हैं, जो यह दिखाते हैं कि कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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