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March 4, 2026

भारतीय नौसेना का अलर्ट, ओमान की खाड़ी में तैनात INS सूरत

The CSR Journal Magazine
मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष से हवाई और समुद्री यातायात पर बड़ा असर पड़ा है। कई भारतीय नागरिक वहां फंसे हुए हैं। इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार विशेष उड़ानों से उन्हें वापस लाने का प्रयास कर रही है। वहीं, भारतीय नौसेना भी राहत एवं बचाव के लिए पूरी तरह तैयार है। ओमान की खाड़ी में तैनात INS सूरत, जरूरत पड़ने पर नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद कर सकता है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर देखा जा रहा है। कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं, जिससे भारतीय यात्री भी संकट में हैं।

INS सूरत की तकनीकी ताकत

ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना का गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS सूरत तैनात है। स्रोतों के मुताबिक, हालात बिगड़ने पर यह युद्धपोत राहत और निकासी के अभियान में तुरंत शामिल हो सकता है। INS सूरत, दुश्मन के रडार से बचकर ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसमें सतह से हवा में मार करने वाली 32 मीडियम रेंज मिसाइलें और 16 ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलें मौजूद हैं।

INS सूरत की विशेषताएं

INS सूरत की लंबाई करीब 163 मीटर है और इसका वजन लगभग 7400 टन है। यह अधिकतम 30 नॉटिकल मील प्रति घंटा की रफ्तार से चलने में सक्षम है। इसके चार शक्तिशाली गैस टर्बाइन इंजन, आधुनिक सर्विलांस रडार, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो लॉन्चर जैसे तकनीकी विशेषताएं इसे अन्य युद्धपोतों से अलग बनाती हैं। आवश्यकता पड़ने पर अदन की खाड़ी में तैनात और भारतीय युद्धपोतों को भी जल्दी ही तैनात किया जा सकता है।

मिशन डेप्लॉयमेंट का महत्व

भारतीय नौसेना ने 2017 में मिशन डेप्लॉयमेंट की शुरुआत की थी, जिसके तहत भारतीय युद्धपोत विश्व के महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में तैनात रहते हैं। ये न सिर्फ सुरक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि समुद्री व्यापार को भी सुनिश्चित करते हैं। स्ट्रेट ऑफ होरमुज, ओमान की खाड़ी, अदन की खाड़ी, और बंगाल की खाड़ी जैसे क्षेत्रों में इन विशिष्ट युद्धपोतों की तैनाती बेहद महत्वपूर्ण है।

अदन की खाड़ी का रणनीतिक महत्व

अदन की खाड़ी भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां से होकर देश का बड़ा व्यापार स्वेज नहर और रेड सी के रास्ते जाता है। अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप से होकर लंबा सफर तय करना होगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते हैं। भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत बनाकर समुद्री व्यापार को सुनिश्चित करना चाहती है।

भारतीय नौसेना की तत्परता

मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच भारतीय नौसेना पूरी तरह सतर्क है। ओमान और अदन की खाड़ी में तैनात युद्धपोत जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू कर सकते हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि संकट के इस समय में सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जाए एवं समुद्री व्यापार पर किसी भी प्रभाव को रोका जाए।
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