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January 31, 2026

ग्रीन कार्ड धारक का चौंकाने वाला दावा: USCIS ने देखा LinkedIn प्रोफाइल, सोशल मीडिया निगरानी पर उठे सवाल! 

The CSR Journal Magazine

 

अमेरिका में रह रहे भारतीय ग्रीन कार्ड धारक के दावे ने मचाई हलचल, इमिग्रेशन प्रक्रिया में सोशल मीडिया निगरानी और निजता को लेकर तेज हुई बहस!

ग्रीन कार्ड धारक का दावा: USCIS ने देखा LinkedIn प्रोफाइल, सोशल मीडिया निगरानी को लेकर उठा बड़ा सवाल

अमेरिका में रह रहे एक भारतीय ग्रीन कार्ड होल्डर के दावे ने इन दिनों सोशल मीडिया और प्रवासी समुदाय में हलचल मचा दी है। व्यक्ति का कहना है कि अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी USCIS (United States Citizenship and Immigration Services) ने उसका LinkedIn प्रोफाइल देखा, जिससे वह हैरान और परेशान है। इस कथित घटना के बाद अमेरिका में वीज़ा, ग्रीन कार्ड और नागरिकता प्रक्रिया के दौरान सोशल मीडिया मॉनिटरिंग को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। ग्रीन कार्ड धारक के अनुसार, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उसने हमेशा अमेरिकी कानूनों का पालन किया है और उसका प्रोफाइल पूरी तरह पेशेवर है। इसके बावजूद LinkedIn अकाउंट में “असामान्य गतिविधि” दिखाई दी, जिसके बाद उसे यह संदेह हुआ कि उसकी ऑनलाइन प्रोफाइल पर इमिग्रेशन अधिकारियों की नजर पड़ी है।

क्या है पूरा मामला?

ग्रीन कार्ड धारक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि उसके LinkedIn अकाउंट पर एक ऐसा विज़िटर नोटिफिकेशन दिखाई दिया, जो उसे USCIS से जुड़ा लगा। उसके मुताबिक, यह सामान्य रिक्रूटर या कंपनी प्रोफाइल जैसा नहीं था।व्यक्ति ने लिखा कि वह कई वर्षों से अमेरिका में रह रहा है। उसकी नौकरी और टैक्स रिकॉर्ड पूरी तरह साफ हैं। उसने कभी किसी तरह के नियमों का उल्लंघन नहीं किया। इसके बावजूद इमिग्रेशन एजेंसी द्वारा प्रोफाइल देखे जाने की आशंका ने उसे मानसिक रूप से असहज कर दिया।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

इस दावे के सामने आते ही X (पूर्व ट्विटर), LinkedIn और Reddit जैसे प्लेटफॉर्म पर बहस शुरू हो गई। हजारों यूज़र्स इस मुद्दे पर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि यह सामान्य प्रक्रिया हो सकती है। अमेरिका पहले से ही वीज़ा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच करता रहा है। वहीं कई यूज़र्स ने इसे गोपनीयता (Privacy) का गंभीर उल्लंघन बताया। उनका तर्क है कि अगर कोई व्यक्ति कानून का पालन कर रहा है, तो उसकी निजी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना गलत है। इससे प्रवासियों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ती है।

क्या USCIS सोशल मीडिया की निगरानी करता है?

यह पहला मामला नहीं है जब ऐसा सवाल उठा हो। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि कुछ वीज़ा और इमिग्रेशन प्रक्रियाओं में आवेदकों से सोशल मीडिया हैंडल की जानकारी मांगी जाती है। इसका उद्देश्य बताया गया है-
• राष्ट्रीय सुरक्षा,
• फर्जी पहचान रोकना,
• चरमपंथ या गलत गतिविधियों की जांच! हालांकि, USCIS ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि वह नियमित रूप से LinkedIn जैसे प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म्स को सक्रिय रूप से ट्रैक करता है।

आधिकारिक प्रतिक्रिया का अभाव

इस पूरे विवाद पर अब तक USCIS की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, न ही इस दावे की पुष्टि या खंडन किया गया है। इसी कारण यह मामला और अधिक रहस्यमय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि वास्तव में प्रोफाइल USCIS ने ही देखा था या कोई और सरकारी/थर्ड पार्टी अकाउंट था।

इमिग्रेशन विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

इमिग्रेशन मामलों के जानकारों का कहना है कि-
• सोशल मीडिया आज किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान बन चुका है,
• सरकारें इसे “ओपन सोर्स इंटेलिजेंस” के रूप में देखती हैं,
• खासतौर पर नागरिकता, शरण और कुछ संवेदनशील वीज़ा मामलों में ऑनलाइन गतिविधि पर नजर रखी जा सकती है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी जोड़ते हैं कि केवल प्रोफाइल देखने से किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। गलत जानकारी, भड़काऊ पोस्ट या झूठे दावे होने पर ही सवाल उठते हैं।

भारतीय प्रवासियों में बढ़ी चिंता

यह मामला सामने आने के बाद अमेरिका में रह रहे कई भारतीय अपने पुराने सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कर रहे हैं, प्रोफाइल प्राइवेट कर रहे हैं और राजनीतिक या संवेदनशील मुद्दों पर पोस्ट करने से बच रहे हैं। कई  लोगों का कहना है कि, “अब ऐसा लगता है जैसे हम हर वक्त निगरानी में हैं।”

निजता बनाम सुरक्षा की बहस

यह घटना एक बार फिर निजता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा की पुरानी बहस को सामने ले आई है।
प्रश्न यह है कि-
• क्या सरकार को यह अधिकार होना चाहिए?
• क्या ऑनलाइन प्रोफाइल देखना निगरानी माना जाएगा?
• प्रवासियों की डिजिटल स्वतंत्रता की सीमा क्या है?

इमीग्रेशन फिर बना बहस का मुद्दा 

भारतीय ग्रीन कार्ड धारक के इस दावे ने भले ही अभी तक आधिकारिक पुष्टि न पाई हो, लेकिन इसने अमेरिका में इमिग्रेशन प्रक्रिया से जुड़े एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर कर दिया है। आज के डिजिटल दौर में, जहां हर व्यक्ति की ऑनलाइन मौजूदगी उसकी पहचान का हिस्सा बन चुकी है, यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि सरकारें इस जानकारी का उपयोग किस हद तक और किस उद्देश्य से कर रही हैं। जब तक USCIS की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आता, तब तक यह मामला प्रवासी समुदाय के बीच चर्चा, चिंता और सतर्कता का विषय बना रहेगा।

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