एलपीजी संकट के बीच भारत ने अमेरिका से खरीदा 1.76 लाख टन गैस

The CSR Journal Magazine
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईंधन संकट के बीच भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका से 1.76 लाख टन एलपीजी (रसोई गैस) की खरीद की है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया से गैस की सप्लाई में लगातार कमी देखी जा रही है।

क्यों पड़ा यह कदम उठाना?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च के तीसरे हफ्ते में भारत की कुल एलपीजी आयात घटकर 3.22 लाख टन से 2.65 लाख टन रह गई। खासतौर पर पश्चिम एशिया से आने वाली सप्लाई गिरकर सिर्फ 89,000 टन रह गई, जो पिछले कुछ महीनों में सबसे कम है। इसी कमी को पूरा करने के लिए भारत ने अमेरिका से गैस खरीदने का फैसला किया।

अमेरिका से बढ़ रही सप्लाई

अमेरिका से आने वाली गैस की मात्रा अब तेजी से बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, एक हफ्ते में ही अमेरिका से 1.76 लाख टन एलपीजी भारत पहुंची। अनुमान है कि साल 2026 में भारत अमेरिका से करीब 2.2 मिलियन टन एलपीजी आयात कर सकता है।

अन्य देशों से भी कोशिश जारी

सरकार केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहती, इसलिए रूस और जापान जैसे देशों से भी एलपीजी मंगाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, एलपीजी की उपलब्धता फिलहाल “चिंताजनक” बनी हुई है।

डिलीवरी में लगता है ज्यादा समय

जहां पश्चिम एशिया से गैस 7-8 दिन में भारत पहुंच जाती है, वहीं अमेरिका से आने में करीब 45 दिन लगते हैं। रूस और जापान से यह समय 35-40 दिन का होता है।

भारत की निर्भरता कितनी?

भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का करीब 60% आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई पश्चिम एशिया से आती है। ऐसे में वहां तनाव बढ़ने का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है।
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