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January 31, 2026

Gold History and Production in India: भारत में सोने का इतिहास, कहां निकलता है Gold, कितना होता है उत्पादन और आयात क्यों बना मजबूरी?

The CSR Journal Magazine
Gold History and Production in India: भारत में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और संपत्ति का प्रतीक रहा है। शादी-ब्याह से लेकर मंदिरों और त्योहारों तक, Gold की मौजूदगी हर जगह दिखती है। बीते कुछ महीनों में Gold Price in India रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार (Gold Price in International Market) में तेजी और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सोना फिर से Safe Haven Asset बनकर उभरा है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि भारत में सोने का इतिहास क्या है, (Gold History in India) देश में कहां-कहां सोना निकलता है (Gold Production in India News) और फिर भी हमें हर साल भारी मात्रा में Gold Import क्यों करना पड़ता है।

जब दुनिया ने सोना पहचाना, भारत भी पीछे नहीं था

Why India Import Gold: इतिहासकारों के मुताबिक दुनिया में सोने के इस्तेमाल के सबूत करीब 6500 साल पुराने हैं (Since when are we wearing Gold in India)। उसी दौर में भारत में भी सोने का उपयोग शुरू हो चुका था। सिंधु घाटी सभ्यता के समय, यानी 3900 से 1700 ईसा पूर्व के बीच, हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से सोने के आभूषण मिले हैं। इससे साफ है कि भारत उस समय Gold Jewellery और शिल्प कला में काफी आगे था। दक्षिण भारत के धारवाड़ क्रेटन क्षेत्र में 2000 से 1000 ईसा पूर्व के बीच Gold Mining के प्रमाण मिलते हैं। महापाषाण काल में लोग खनन की तकनीक जानते थे और सोने को आभूषण के रूप में इस्तेमाल करते थे।

सिक्कों से लेकर साम्राज्यों तक सोने का असर

लगभग 100 ईस्वी में कुषाण शासक विम कडफिसेस ने पहली बार मानकीकृत Gold Coins चलाए। इसके बाद गुप्त काल में सोने के सिक्के अपने शिखर पर पहुंचे। समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय के सोने के सिक्के आज भी कला और अर्थव्यवस्था का बेहतरीन उदाहरण माने जाते हैं। मध्यकाल में मंदिरों में सोने का विशाल भंडार जमा हुआ। अनुमान है कि आज भी भारतीय मंदिरों में करीब 20,000 टन सोना मौजूद है, जो दुनिया में सबसे बड़ा निजी Gold Reserve माना जाता है।

ब्रिटिश काल और आजादी के बाद

ब्रिटिश शासन के दौरान कर्नाटक की कोलार गोल्ड फील्ड्स (KGF – Kolar Gold Field) दुनिया की प्रमुख खदानों में गिनी जाती थी। आजादी के बाद सरकार ने Gold Control Laws लागू किए ताकि विदेशी मुद्रा बचे और अवैध व्यापार रुके। 1968 का स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम और 14 कैरेट की सीमा इसी सोच का नतीजा थी। 1990 के बाद उदारीकरण आया, Gold Import आसान हुआ और 2007 में Gold ETF जैसी योजनाओं से निवेश के नए रास्ते खुले।

Gold Production in India: आज भारत में कहां निकलता है सोना?

फिलहाल कर्नाटक की हट्टी गोल्ड माइन्स भारत की एकमात्र प्रमुख सक्रिय Gold Mine है। यहां से सालाना करीब 1.8 टन सोना निकलता है। इसके अलावा तांबे के उप-उत्पाद के रूप में गुजरात और झारखंड में भी सीमित मात्रा में सोना निकाला जाता है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के मुताबिक देश में करोड़ों टन Gold Ore मौजूद है, जिसमें से 88 फीसदी आर्थिक रूप से उपयोगी भंडार कर्नाटक में है। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में भी बड़े भंडार की बात सामने आई है, लेकिन अभी उत्पादन शुरू नहीं हुआ है।

Gold History and Production in India: फिर आयात क्यों जरूरी है?

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Gold Consumer है। हर साल करीब 800 Metric Ton Gold Import किया जाता है, जबकि घरेलू उत्पादन सिर्फ 2 टन के आसपास है। खनन लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया, ऊंची लागत, दूरदराज इलाकों में बुनियादी ढांचे की कमी और पर्यावरणीय नियम इसकी बड़ी वजह हैं। सरकार ने National Mineral Policy 2019 और नए ब्लॉकों की नीलामी जैसे कदम उठाए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही नीति और निवेश से भारत भविष्य में 20 टन तक सोने का उत्पादन कर सकता है। सोना भारत के अतीत, वर्तमान और भविष्य तीनों से जुड़ा है। लेकिन जब तक खनन की चुनौतियां दूर नहीं होतीं, तब तक Gold Import भारत की मजबूरी बना रहेगा।
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