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January 19, 2026

ग्रेटर बनारस की ओर बढ़ता काशी का विस्तार: रिंग रोड के किनारे नया आधुनिक शहर बसाने की तैयारी! 

The CSR Journal Magazine

 

ग्रेटर बनारस की नींव रखने की तैयारी तेज! उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत काशी के व्यापक शहरी विस्तार की दिशा में उठाया जा रहा बड़ा कदम! रिंग रोड के किनारे “ग्रेटर बनारस” के रूप में नया टाउनशिप विकसित करने की योजना पर काम तेज हुआ जिसके लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। यह टाउनशिप करीब 1,000 एकड़ क्षेत्र में हरहुआ, राजातालाब और आसपास के गांवों में विकसित होगा, जहां आधुनिक आवासीय कॉलोनियों के साथ बाजार, मॉल, होटल, अस्पताल, स्कूल, खेल मैदान और रोजगार केंद्र बनाए जाएंगे।

मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत काशी का नया स्वरूप

उत्तर प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना (Chief Minister’s Urban Expansion Scheme) के तहत प्रदेश के प्रमुख शहरों को नया आकार देने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नगरी काशी के लिए “ग्रेटर बनारस” की परिकल्पना को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस योजना का उद्देश्य शहर के पुराने और घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर दबाव कम करना, सुनियोजित शहरी विकास को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार व बेहतर जीवन सुविधाएं तैयार करना है।

4,000 करोड़ की योजना, ग्रेटर वाराणसी के लिए 1,000 करोड़

मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत प्रदेश के चार शहरों में नए टाउनशिप विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए कुल 4,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसमें से 1,000 करोड़ रुपये ग्रेटर वाराणसीके लिए आवंटित किए गए हैं। यह नया टाउनशिप लगभग 1,000 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा, जो मुख्य रूप से हरहुआ, राजा तालाब और आसपास के गांवों में फैला होगा। यह पूरा क्षेत्र रिंग रोड के आसपास विकसित किया जाएगा, जिससे कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

आधुनिक टाउनशिप की पूरी रूपरेखा

वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की योजना के अनुसार ग्रेटर बनारस को एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और नियोजित शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित टाउनशिप में शामिल होंगी-
• आधुनिक आवासीय कॉलोनियां,
• शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बाजार,
• मॉल, होटल और कन्वेंशन सेंटर,
• अस्पताल और मेडिकल सुविधाएं,
• स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान,
• खेल मैदान, पार्क और ओपन स्पेस,
• मल्टी-लेवल पार्किंग और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर! इसका उद्देश्य लोगों को शहर के भीड़भाड़ वाले पुराने इलाकों से बाहर बेहतर जीवन और काम करने का अवसर देना है।

भूमि अधिग्रहण का मॉडल: सरकार और स्थानीय निकाय की साझेदारी

इस योजना के तहत भूमि अधिग्रहण का खर्च 50-50 प्रतिशत के आधार पर राज्य सरकार और स्थानीय प्राधिकरण (VDA) मिलकर वहन करेंगे। पहले सर्वे कराया जाता है, उसके बाद किसानों और भूमि स्वामियों से संवाद किया जाता है। सहमति बनने के बाद ही भूमि खरीद की प्रक्रिया शुरू होती है। सरकार का दावा है कि किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखते हुए पारदर्शी तरीके से भूमि अधिग्रहण किया जाएगा।

स्पोर्ट्स सिटी और हाई-टेक प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

ग्रेटर बनारस की दिशा में कई अहम परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। जून 2025 में VDA ने गंजारी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के पास, राजातालाब रिंग रोड के किनारे 150 एकड़ की टाउनशिपको मंजूरी दी। इसे “स्पोर्ट्स सिटी” के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें हाई-टेक सुविधाएं, आधुनिक सड़कें और मल्टी-लेवल पार्किंग शामिल होंगी। मधनी हाई-टेक सिटी, जो रिंग रोड पर संधा गांव के पास 150 एकड़ में प्रस्तावित है, भी मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना का हिस्सा है। वर्ल्ड सिटी एक्सपो, हरहुआपरियोजना फिलहाल भूमि अधिग्रहण चरण में है। इस संबंध में जनवरी 2026 में जनसुनवाई आयोजित की जानी है।

रिंग रोड फेज-2 से मिलेगी नई रफ्तार, ग्रामीण इलाकों को सीधा फायदा

ग्रेटर बनारस के विकास में रिंग रोड फेज-2 (राजातालाब से हरहुआ तक) की अहम भूमिका है। इस सड़क के बन जाने से इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। बेहतर सड़क, परिवहन और बुनियादी ढांचे के कारण आसपास के गांव शहरी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। ग्रेटर बनारस परियोजना से सिर्फ शहर ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। बेहतर सड़क और बुनियादी सुविधाएं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच और जमीन और संपत्ति के बढ़ते मूल्य जैसे फायदे मिलेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए VDA ने 2024 में कई नए गांवों को विकास क्षेत्र में शामिल किया है।

काशी के रियल एस्टेट और भविष्य पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रेटर बनारस के आकार लेने से काशी में हाउसिंग और रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा मिलेगी। बड़े प्लॉट, बेहतर प्लानिंग और आधुनिक सुविधाओं के चलते मध्यम वर्ग और व्यवसायियों के लिए नए विकल्प खुलेंगे। सर्वे पूरे होने और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही ग्रेटर बनारस की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती जा रही है। अगर योजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में वाराणसी सिर्फ एक प्राचीन तीर्थ नगरी ही नहीं, बल्कि आधुनिक, सुनियोजित और विकसित महानगर के रूप में भी पहचान बनाएगी, एक ऐसी काशी, जो परंपरा और प्रगति दोनों को साथ लेकर चलेगी।

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