देश में बढ़ते साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। यह गृह मंत्रालय के तहत काम करता है और ठगों पर शिकंजा कसने के लिए तकनीकी और डेटा का इस्तेमाल कर रहा है। जब भी कोई संदिग्ध लेनदेन होता है, तब 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करते ही उसे ट्रैक और फ्रीज किया जा सकता है। इस केंद्रीय व्यवस्था के अंतर्गत ठगी के मामलों में तेजी से कार्रवाई हो रही है।
शिकायत से कार्रवाई तक कैसे काम करता है I4C?
जब किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है, तो वह तुरंत 1930 नंबर पर कॉल करता है या ऑनलाइन शिकायत करता है। शिकायत दर्ज होते ही मामला सिस्टम में ट्रांसफर हो जाता है। इस प्रक्रिया के बाद Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System में केस दर्ज होता है। जैसे ही शिकायत आती है, साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर सक्रिय हो जाता है।
अलग-अलग एजेंसियां मिलकर करेंगी काम
इस प्रणाली में कई महत्वपूर्ण एजेंसियां एक साथ काम कर रही हैं, जैसे कि राज्यों की पुलिस, बैंकिंग संस्थान, टेलीकॉम कंपनियां और ऑनलाइन पेमेंट गेटवे। सभी सिस्टम एक-दूसरे से API इंटीग्रेशन के जरिए जुड़े हैं, जो संदिग्ध ट्रांजैक्शन को तुरंत ट्रैक और फ्रीज करने में मदद करता है। इसके लिए मानकीकृत SOP भी लागू की गई है ताकि सभी एजेंसियां समन्वित कार्रवाई कर सकें।
साइबर फ्रॉड के हॉटस्पॉट की पहचान
मौजूदा डेटा के अनुसार, साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेन-देन की निगरानी में कुछ बड़े हॉटस्पॉट सामने आए हैं। 10 जनवरी 2025 से 20 जनवरी 2026 के बीच चेक निकासी, एटीएम निकासी और संदिग्ध बैंक खातों के मामलों में वृद्धि हुई है। चेक निकासी के मामलों में राजस्थान सबसे ऊपर है, इसके बाद उत्तर प्रदेश और गुजरात का स्थान है।
चेक निकासी मामले: शीर्ष राज्यों की सूची
राजस्थान (581 मामले), उत्तर प्रदेश (452 मामले), गुजरात (358 मामले) और बिहार (311 मामले) जैसे राज्य चेक निकासी में अव्वल रहे हैं। अन्य राज्यों में भी संदिग्ध निकासी के मामलों की बढ़ती संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। एटीएम निकासी में भी बिहार शीर्ष पर है, इसके बाद उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली का स्थान है।
संदिग्ध गतिविधियों वाले बैंक खाते
देशभर में संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े हजारों बैंक खातों की पहचान की गई है। इन संदिग्ध खातों की संख्या में राजस्थान (8355), उत्तर प्रदेश (6528) और बिहार (5721) जैसे राज्य शामिल हैं। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि साइबर ठगी अब सिर्फ लोकल नहीं, बल्कि संगठित और इंटर-स्टेट नेटवर्क के रूप में फैल रही है।
साइबर ठगों के नेटवर्क को तोड़ने की कवायद
इस मामले में एजेंसियों का मानना है कि हॉटस्पॉट मैपिंग, रियल-टाइम निगरानी, और मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन से साइबर ठगों के नेटवर्क को तेजी से तोड़ा जा सकेगा। हाल ही में हुई कार्रवाई से अब यह साफ है कि साइबर ठगों पर डिजिटल जवाबी हमला शुरू हो चुका है और सभी एजेंसियां पूरी तैयारी में हैं।
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