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February 28, 2026

गिग वर्कर्स के लिए बड़ा कदम: सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत जल्द ही राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन

The CSR Journal Magazine

 राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड गिग वर्कर्स के लिए जल्द ही बनेगा: महाराष्ट्र श्रम मंत्री

महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने शनिवार को विधानसभा में बताया कि केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (जैसे ऑनलाइन डिलीवरी, कैब ड्राइवर, फ्रीलांसर आदि) के हितों के लिए एक नया सोशल सुरक्षा कोड लागू किया है, जिसमें उनके लिये एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड बनाने का प्रावधान है। मुख्य बातें-
• यह कोड (Social Security Code) नवंबर 2025 से लागू है और पहली बार गिग वर्कर्स की स्थिति (Status) को स्पष्ट रूप से कर्मचारी/वर्कर के रूप में परिभाषित करता है।
• कोड के तहत जल्द ही राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो इन वर्कर्स को स्वास्थ्य सेवा, बीमा और पारिवारिक कल्याण के लाभ देगा।
• केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को इस कोड के प्रावधानों को अपनाने और लागू करने का निर्देश दिया है।
• मंत्री ने बताया कि जब यह राष्ट्रीय बोर्ड स्थापित हो जाएगा, तो राजस्थान और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों की अपनी अलग-अलग गिग वर्कर्स से जुड़ी कानून व्यवस्था समाप्त/लैप्स हो जाएगी।
• फुंडकर ने यह जवाब कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के सवालों के जवाब में दिया।

गिग वर्कर्स कौन हैं?

गिग वर्कर्स वे लोग हैं जो किसी कंपनी के कर्मचारी नहीं होते, बल्कि प्लेटफॉर्म (जैसे Ola, Uber, Swiggy, Zomato) के जरिए अस्थायी, प्रोजेक्ट-आधारित या डिलीवरी के हिसाब से काम करते हैं। पहले इनका श्रमिक (वर्कर) के रूप में दर्जा नहीं माना जाता था।

राष्ट्रीय बोर्ड के गठन की तैयारी तेज

महाराष्ट्र के श्रम मंत्री आकाश फुंडकर ने विधानसभा में जानकारी दी कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए Social Security Code 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए जल्द ही एक राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस कदम को देशभर में काम कर रहे लाखों डिलीवरी एजेंट, कैब ड्राइवर, फ्रीलांसर और ऐप-आधारित कामगारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। मंत्री ने बताया कि नया कोड पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को औपचारिक रूप से श्रमिक की श्रेणी में पहचान देता है। अब तक ये कामगार पारंपरिक श्रम कानूनों के दायरे से बाहर थे, जिससे उन्हें पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा और अन्य सामाजिक लाभ नहीं मिल पाते थे।

क्या है सोशल सिक्योरिटी कोड?

Social Security Code 2020 केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए चार श्रम संहिताओं में से एक है। इसका उद्देश्य संगठित और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसमें कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), कर्मचारी राज्य बीमा (ESI), मातृत्व लाभ और अन्य योजनाओं को एकीकृत किया गया है। इस कोड में विशेष रूप से गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल किया गया है, जो ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से काम करते हैं। उदाहरण के तौर पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी, टैक्सी सेवा, ई-कॉमर्स डिलीवरी और फ्रीलांस डिजिटल सेवाएं।

राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड क्या करेगा?

प्रस्तावित राष्ट्रीय बोर्ड का मुख्य कार्य होगा-
• गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का पंजीकरण,
• उनके लिए स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा योजना तैयार करना,
• पेंशन और भविष्य निधि जैसी योजनाओं पर काम करना,
• आपातकालीन सहायता और पारिवारिक लाभ सुनिश्चित करना,
• केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बनाना!
मंत्री ने कहा कि जैसे ही यह राष्ट्रीय बोर्ड स्थापित होगा, राज्यों में अलग-अलग बनाए गए कानूनों को एक समान ढांचे में समाहित किया जा सकता है, जिससे देशभर में एक समान व्यवस्था लागू होगी।

गिग वर्कर्स को क्या मिलेगा फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवस्था से गिग वर्कर्स को निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं-
• काम के दौरान दुर्घटना होने पर बीमा कवर,
• अस्पताल में इलाज के लिए आर्थिक सहायता,
• वृद्धावस्था में पेंशन की संभावना,
• महिला वर्कर्स को मातृत्व लाभ,
• सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक सीधी पहुंच!
यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और लाखों युवा ऐप आधारित नौकरियों से जुड़े हुए हैं। अब तक ये कामगार नियमित कर्मचारियों की तरह सुरक्षा कवच से वंचित थे।

लाखों गिग कर्मचारियों को सुरक्षा की नई उम्मीद

राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि केंद्र के दिशा-निर्देश मिलने के बाद महाराष्ट्र स्तर पर भी आवश्यक प्रक्रियाएं शुरू की जाएंगी। श्रम विभाग गिग वर्कर्स का डेटा एकत्र करने और पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी रूप से लागू होती है, तो यह भारत के श्रम क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है और असंगठित क्षेत्र के लाखों कामगारों को सुरक्षा की नई उम्मीद मिलेगी।

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