app-store-logo
play-store-logo
January 27, 2026

बस्तर से चली बदलाव की बयार: पद्मश्री से सम्मानित हुईं सामाजिक कार्यकर्ता बुधरी ताती ! 

The CSR Journal Magazine

 

दंतेवाड़ा के हीरानार गांव से शुरू हुआ बुधरी ताती का सामाजिक सफर शिक्षा, महिला सशक्तिकरण,  नशामुक्ति और आदिवासी कल्याण के ज़रिये बस्तर अंचल में स्थायी बदलाव की मिसाल बना, जिसे अब पद्मश्री सम्मान के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली !

सेवा, संघर्ष और सम्मान: पद्मश्री अलंकरण से नवाज़ी गईं बुधरी ताती

बस्तर अंचल की दुर्गम पहाड़ियों और अबूझमाड़ के सघन जंगलों से उठी एक साधारण आदिवासी महिला की असाधारण यात्रा को देश ने आखिरकार पहचान दी है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती को सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए पद्मश्री सम्मान से

नवाज़ा गया है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस जमीनी बदलाव का प्रतीक है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति के ज़रिये बस्तर में आकार ले सका।

साधारण शुरुआत, असाधारण संकल्प

बुधरी ताती का जीवन संघर्षों से भरा रहा। सीमित संसाधन, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और आदिवासी  इलाकों में फैली अशिक्षा, गरीबी व नशे की लत, इन सबके बीच उन्होंने हार मानने के बजाय बदलाव की राह चुनी। वर्ष 1986 से उन्होंने गांव-गांव जाकर आदिवासी समाज को शिक्षा के महत्व से जोड़ने का कार्य शुरू किया। उनका मानना रहा कि जब तक परिवार जागरूक नहीं होगा, तब तक समाज में स्थायी परिवर्तन संभव नहीं है।

शिक्षा को बनाया बदलाव का आधार

बस्तर जैसे संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र में शिक्षा को पहुंचाना आसान नहीं था। बावजूद इसके, बुधरी ताती ने किराए के एक छोटे से मकान में बच्चों के लिए छात्रावास की शुरुआत की। यही प्रयास आगे चलकर “रानी दुर्गावती छात्रावास” के रूप में विकसित हुआ। आज इस छात्रावास से निकले कई बच्चे डॉक्टर, शिक्षक, नर्स, इंजीनियर और सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। ये युवा न सिर्फ अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति बदल रहे हैं, बल्कि अपने समाज के लिए भी प्रेरणा बन चुके हैं।

महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति की मुहिम

बुधरी ताती का काम केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने आदिवासी महिलाओं को बचत समूहों, स्व-सहायता समूहों और स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने का अभियान चलाया। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के साथ-साथ उन्होंने परिवारों के बीच बैठकर नशे के दुष्परिणामों पर संवाद किया। उनकी नशामुक्ति की पहल किसी औपचारिक अभियान की तरह नहीं, बल्कि भरोसे और संवाद पर आधारित रही, जहां वे परिवारों को समझाती थीं कि नशा सिर्फ व्यक्ति नहीं, पूरे समाज को खोखला कर देता है।

दशकों की तपस्या को मिला राष्ट्रीय सम्मान

बिना किसी बड़े मंच या प्रचार के, ज़मीन पर रहकर किए गए इस काम को अब राष्ट्रीय पहचान मिली है। पद्मश्री सम्मान से नवाज़े जाने पर क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। स्थानीय आदिवासी समाज इसे अपनी जीत मान रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुधरी ताती का मॉडल यह साबित करता है कि स्थायी सामाजिक बदलाव सरकारी योजनाओं के साथ-साथ स्थानीय नेतृत्व और समाज के भरोसे से ही संभव है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

बुधरी ताती आज भी स्वयं को “समाज की सेवक” मानती हैं। उनका कहना है कि सम्मान उनके काम को और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी देता है। बस्तर और दंतेवाड़ा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए उनका जीवन एक जीवंत उदाहरण है कि सीमित साधनों में भी बड़े परिवर्तन किए जा सकते हैं। पद्मश्री सम्मान वास्तव में उस बदलाव की मुहर है, जिसे बुधरी ताती ने दशकों तक चुपचाप, ईमानदारी और दृढ़ संकल्प के साथ ज़मीन से शुरू किया।

पद्मश्री सम्मान: भारत के नागरिक सम्मान की गौरवशाली परंपरा

पद्मश्री सम्मान भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने कला, साहित्य, शिक्षा, समाज सेवा, विज्ञान, खेल, चिकित्सा, जनसेवा और अन्य विविध क्षेत्रों में असाधारण एवं विशिष्ट योगदान दिया हो।

पद्म पुरस्कारों की शुरुआत

पद्म पुरस्कारों की स्थापना वर्ष 1954 में की गई थी। इसके अंतर्गत तीन श्रेणियां हैं- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री ! इनमें पद्मश्री का उद्देश्य जमीनी स्तर पर समाज को दिशा देने वाले व्यक्तियों के कार्यों को राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित करना है। पद्मश्री पुरस्कार के लिए चयन एक पारदर्शी और बहु-स्तरीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। नामांकन आम नागरिक, राज्य सरकारें, केंद्रीय मंत्रालय और संस्थान कर सकते हैं। प्राप्त प्रस्तावों की जांच एक विशेष पद्म पुरस्कार समिति करती है। समिति की संस्तुति पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति विचार करती है। अंतिम स्वीकृति राष्ट्रपति द्वारा दी जाती है।

सम्मान का स्वरूप

पद्मश्री सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया गया पदक (मेडल), प्रशस्ति पत्र (सानद) शामिल होता है। यह  सम्मान आमतौर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है। पद्मश्री केवल  व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह उस सेवा भावना का सम्मान है, जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक बदलाव पहुंचाने का कार्य करती है। विशेष रूप से, ग्रामीण, आदिवासी और वंचित वर्गों के लिए कार्य करने वाले लोगों को यह सम्मान सामाजिक प्रेरणा का माध्यम बनाता है।

समाज के लिए संदेश

पद्मश्री सम्मान यह संदेश देता है कि निःस्वार्थ सेवा, ईमानदारी और समर्पण को देश कभी अनदेखा नहीं करता। यह नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। संक्षेप में, पद्मश्री सम्मान भारत की उस परंपरा का प्रतीक है, जहां जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों को सर्वोच्च सम्मान और पहचान दी जाती है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos