इस कंपनी में न वॉचमैन, न अटेंडेंस और न 9 से 5 की नौकरी! क्या यही है काम करने का भविष्य?

The CSR Journal Magazine
कल्पना कीजिए कि सोमवार की सुबह आपकी नींद खुलती है और आप थकान महसूस कर रहे हैं। ऐसे में ऑफिस जाने की जल्दबाजी करने या बॉस को छुट्टी के लिए मनाने के बजाय आप अपनी सेहत के हिसाब से काम करने का फैसला लेते हैं। सुनने में यह किसी सपने जैसा लग सकता है, लेकिन बेंगलुरु के एक स्टार्टअप का वर्क कल्चर इसी सोच पर आधारित है। यहां कर्मचारियों के लिए पारंपरिक ऑफिस टाइमिंग और अटेंडेंस से ज्यादा उनके काम के नतीजों को महत्व दिया जाता है। यह स्टार्टअप FRND है, जो अपने अलग वर्क कल्चर को लेकर चर्चा में है। कंपनी का मॉडल इस सवाल को सामने लाता है कि क्या भविष्य में कर्मचारियों की काबिलियत का आकलन ऑफिस में बिताए गए घंटों से नहीं, बल्कि उनके काम और प्रदर्शन से किया जाएगा?

न वॉचमैन का दबाव, न अटेंडेंस की चिंता

आमतौर पर कंपनियों में कर्मचारियों के आने-जाने का समय तय होता है। ऑफिस में एंट्री, अटेंडेंस, छुट्टी और काम के घंटों पर नजर रखी जाती है। कई जगह देर से पहुंचने या समय से पहले निकलने पर सवाल भी पूछे जाते हैं। लेकिन FRND का वर्क कल्चर इस पारंपरिक व्यवस्था से अलग है। यहां कर्मचारियों को काम करने के तरीके और समय को लेकर अधिक आजादी देने पर जोर दिया जाता है। कंपनी का फोकस इस बात पर है कि कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी कितनी अच्छी तरह निभा रहे हैं और उनके काम से बिजनेस को क्या फायदा मिल रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों को बिना जिम्मेदारी के काम करने की छूट है। आजादी के साथ काम के नतीजों की जवाबदेही भी जुड़ी हुई है।

कर्मचारियों को मिलती है काम करने की आजादी

इस मॉडल की खासियत यह है कि कर्मचारियों को केवल ऑफिस में मौजूद रहने के आधार पर नहीं परखा जाता। इसके बजाय उनके काम की गुणवत्ता, लक्ष्य पूरे करने की क्षमता और कंपनी के प्रदर्शन में उनके योगदान को महत्व दिया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर कोई कर्मचारी सुबह के बजाय किसी दूसरे समय पर बेहतर तरीके से काम कर सकता है, तो उसके लिए लचीली व्यवस्था उपयोगी हो सकती है। इसी तरह, जरूरत पड़ने पर आराम करने या निजी काम संभालने की सुविधा मिलने से कर्मचारी अपने काम और निजी जीवन के बीच बेहतर तालमेल बना सकते हैं। हालांकि, यह व्यवस्था हर पद और हर तरह के काम के लिए समान रूप से लागू हो, यह जरूरी नहीं है। कई जिम्मेदारियों में तय समय पर उपलब्ध रहना भी जरूरी होता है।

FRND का बिजनेस मॉडल क्या है?

FRND एक भारतीय स्टार्टअप है, जो ऑडियो आधारित सोशल नेटवर्किंग और ऑनलाइन बातचीत से जुड़ी सेवाओं के लिए जाना जाता है। ऐसे प्लेटफॉर्म पर यूजर एंगेजमेंट यानी लोग ऐप पर कितना समय बिताते हैं और कितनी सक्रियता से उसका इस्तेमाल करते हैं, बिजनेस के प्रदर्शन को समझने का एक अहम पैमाना हो सकता है। कंपनी के वर्क कल्चर में भी कर्मचारियों के काम के नतीजों और उनके योगदान को महत्व देने की बात सामने आई है। इस सोच के तहत कर्मचारियों को काम करने की आजादी देने के साथ उनसे बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा की जाती है। यानी यहां जोर केवल इस बात पर नहीं है कि कर्मचारी कितने घंटे काम कर रहा है, बल्कि इस पर है कि वह अपने काम से कितना असर पैदा कर रहा है।

क्या बिना सख्त नियमों के बढ़ सकती है प्रोडक्टिविटी?

लचीले वर्क कल्चर के समर्थकों का मानना है कि जब कर्मचारियों को अपने समय पर नियंत्रण मिलता है, तो वे तनाव कम महसूस कर सकते हैं और बेहतर तरीके से काम कर सकते हैं। इससे नौकरी से संतुष्टि और काम की गुणवत्ता में सुधार की संभावना रहती है। दूसरी ओर, इस मॉडल के सामने चुनौतियां भी हैं। अगर लक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं या टीम के बीच तालमेल कमजोर है, तो काम में देरी हो सकती है। इसी तरह, कुछ कर्मचारी लचीले समय के कारण जरूरत से ज्यादा काम करने लग सकते हैं, जिससे निजी जीवन प्रभावित होने का खतरा रहता है। इसलिए ऐसी व्यवस्था को सफल बनाने के लिए भरोसे के साथ स्पष्ट लक्ष्य, समय पर संवाद और काम की नियमित समीक्षा भी जरूरी है।

क्या 9 से 5 वाली नौकरी का दौर बदल रहा है?

FRND जैसे स्टार्टअप का मॉडल काम करने के पारंपरिक तरीकों पर नई बहस शुरू करता है। पहले नौकरी में समय पर ऑफिस पहुंचना और तय घंटों तक काम करना अनुशासन का अहम हिस्सा माना जाता था। अब कई कंपनियां कर्मचारियों के प्रदर्शन, काम की गुणवत्ता और लक्ष्य पूरे करने पर अधिक ध्यान दे रही हैं। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर कंपनी में अटेंडेंस और तय समय की जरूरत खत्म हो जाएगी। अस्पताल, ग्राहक सेवा, उत्पादन और दूसरी समय-आधारित सेवाओं में कर्मचारियों की उपलब्धता जरूरी बनी रह सकती है। फिर भी, जहां काम के नतीजों को स्पष्ट रूप से मापा जा सकता है, वहां लचीले वर्क कल्चर की भूमिका बढ़ सकती है। आने वाले समय में कंपनियों के सामने चुनौती यही होगी कि कर्मचारियों को आजादी देने और काम की जवाबदेही बनाए रखने के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।

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