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February 6, 2026

वाराणसी एयरपोर्ट पर यात्री के हैंड बैग से चार जिंदा कारतूस बरामद, CISF ने रोका सफर ! 

The CSR Journal Magazine

 

वाराणसी एयरपोर्ट पर यात्री के हैंड बैग से चार जिंदा कारतूस बरामद, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गुरुवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब नियमित सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के हैंड बैग से चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए। यह घटना शाम करीब 5 बजे की है, जब केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान टर्मिनल पर यात्रियों की स्क्रीनिंग कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, सुरक्षा जांच के दौरान स्कैनर से गुजर रहे एक हैंड बैग में संदिग्ध वस्तु दिखाई दी। CISF कर्मियों ने तत्काल बैग को अलग कर यात्री को रोका और जब बैग की तलाशी ली गई तो उसमें 32 बोर के चार जिंदा कारतूस मिले। कारतूस मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं और यात्री को मौके पर ही हिरासत में ले लिया गया।

यात्री से पूछताछ- गलती से हुई चूक

हिरासत में लिए गए यात्री की पहचान मंजूर आलम (55 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बलिया जिले के बेल्थरा रोड क्षेत्र के चौकिया गांव के निवासी बताए गए हैं। मंजूर आलम स्पाइसजेट की फ्लाइट SG-330 से वाराणसी से मुंबई जाने वाले थे। कारतूस बरामद होने के बाद उन्हें विमान में सवार होने से रोक दिया गया। घटना की सूचना तुरंत फूलपुर थाने को दी गई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस भी एयरपोर्ट पहुंची। फूलपुर थाना प्रभारी निरीक्षक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यात्री को थाने लाकर पूछताछ की गई और उसके द्वारा प्रस्तुत शस्त्र लाइसेंस की जांच की गई। जांच में लाइसेंस वैध पाया गया। पूछताछ के दौरान यात्री ने स्वीकार किया कि कारतूस गलती से उनके बैग में रह गए थे और उन्हें एयरपोर्ट लाने का कोई इरादा नहीं था।

एयरपोर्ट अधिकारी- यात्रा से पहले सावधानीपूर्वक करें सामान की जांच

थाना प्रभारी ने बताया कि नियमों के अनुसार कारतूस को जब्त कर लिया गया है और आगे की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। फिलहाल मामले में किसी तरह की आपराधिक मंशा सामने नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा मानकों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार, यह घटना यात्रियों के लिए एक चेतावनी भी है कि यात्रा से पहले अपने सामान की पूरी तरह जांच कर लें। हवाई यात्रा के दौरान हथियार, कारतूस या उनसे संबंधित कोई भी सामग्री, भले ही लाइसेंसधारी क्यों न हो, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मानी जाती है।
गौरतलब है कि वाराणसी एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त है और CISF द्वारा हर यात्री और सामान की गहन जांच की जाती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी ऐसी किसी भी चूक पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

एयरपोर्ट सुरक्षा में बार-बार चूक: यात्रियों की लापरवाही या सिस्टम की चुनौती?

भारत के अलग-अलग हवाई अड्डों पर समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं, जहां किसी यात्री के बैग से जिंदा कारतूस, मैगजीन या प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद होती हैं, एक गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। क्या यह केवल यात्रियों की लापरवाही है, या फिर एयरपोर्ट सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी प्रणालीगत चुनौती? दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, पटना, जयपुर और हाल ही में वाराणसी जैसे एयरपोर्ट्स पर ऐसी घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश मामलों में यात्री वैध आर्म्स लाइसेंसधारी पाए गए, जिन्होंने यह दलील दी कि कारतूस “अनजाने में” बैग में रह गए। इरादा भले आपराधिक न हो, लेकिन हवाई सुरक्षा के लिहाज से ऐसी चूक बेहद गंभीर मानी जाती है।

यात्री की जिम्मेदारी कहां?

हवाई यात्रा से पहले अपने सामान की जांच करना यात्री की मूल जिम्मेदारी है। हथियार या कारतूस रखना, भले ही लाइसेंस के साथ, हवाई नियमों का उल्लंघन है। अक्सर लोग रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले बैग को ही यात्रा में ले आते हैं, जिसमें पहले से कारतूस या अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं मौजूद होती हैं। यह लापरवाही न सिर्फ खुद यात्री के लिए कानूनी मुश्किलें पैदा करती है, बल्कि पूरे टर्मिनल की सुरक्षा पर असर डालती है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि ऐसी घटनाओं का पकड़े जाना खुद सुरक्षा प्रणाली की सक्रियता को दर्शाता है। CISF और एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियां स्कैनर, मैनुअल चेक और SOP के तहत समय रहते इन वस्तुओं को बरामद कर लेती हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यात्रियों के लिए पर्याप्त जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं? क्या टिकट बुकिंग से लेकर बोर्डिंग तक हर चरण पर स्पष्ट चेतावनियां प्रभावी ढंग से दी जा रही हैं?

कानून की सख्ती और मानवीय पहलू

कानून अपने स्थान पर सख्त है। आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई, कारतूस की जब्ती और पूछताछ, यह सब सुरक्षा के लिए जरूरी है। हालांकि, जब जांच में यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई आपराधिक मंशा नहीं थी और लाइसेंस वैध है, तो मानवीय दृष्टिकोण भी उतना ही जरूरी हो जाता है। संतुलन बनाना ही प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा है। इस समस्या का समाधान केवल सजा या चेतावनी से नहीं होगा।
यात्री जागरूकता: टिकट बुकिंग ऐप्स, SMS, ई-मेल और एयरपोर्ट डिस्प्ले पर स्पष्ट संदेश।
लाइसेंसधारियों के लिए गाइडलाइन: आर्म्स लाइसेंस जारी करते समय हवाई यात्रा संबंधी नियमों की अनिवार्य जानकारी।
स्मार्ट सिस्टम: AI-आधारित अलर्ट और प्रोफाइलिंग, जिससे जोखिम पहले ही कम किया जा सके।
सख्ती के साथ संवेदनशीलता: इरादे और परिस्थिति के अनुसार कार्रवाई।

यात्री की लापरवाही और सिस्टम की सुस्ती, दोनों ज़िम्मेदार

एयरपोर्ट सुरक्षा में बार-बार सामने आने वाली ये घटनाएं किसी एक पक्ष की गलती नहीं हैं। यह यात्रियों की लापरवाही और सिस्टम की जागरूकता की कमी, दोनों का परिणाम है। सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है। जब यात्री सतर्क होंगे और सिस्टम और अधिक संवादात्मक व जागरूक बनेगा, तभी हवाई यात्रा सच मायनों में सुरक्षित और निर्बाध हो सकेगी। सवाल साफ है-सुरक्षा केवल जांच से नहीं, जिम्मेदारी से भी मजबूत होती है।

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