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January 12, 2026

SIR में पूर्व नौसेना प्रमुख से फिर मांगे दस्तावेज़, पति-पत्नी को अलग-अलग तारीखों पर 18 किमी दूर पेश होने का निर्देश ! 

The CSR Journal Magazine

 

गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दौरान वीर चक्र से सम्मानित एडमिरल अरुण प्रकाश को ‘अनमैप्ड’ श्रेणी में रखा गया, जटिल नोटिस और बुज़ुर्ग दंपती को अलग-अलग तारीखों पर बुलाए जाने पर उठे सवाल!

पूर्व नौसेना प्रमुख से SIR में और दस्तावेज़ मांगे

भारत के पूर्व नौसेना प्रमुख और वीर चक्र से सम्मानित एडमिरल अरुण प्रकाश तथा उनकी पत्नी को गोवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) के दौरान निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने के नोटिस जारी किए गए हैं। सेवानिवृत्ति के बाद गोवा में बस चुके एडमिरल अरुण प्रकाश को मतदाता सूची में “अनमैप्ड (Unmapped)” श्रेणी में चिन्हित किया गया है।एडमिरल अरुण प्रकाश के मुताबिक उन्हें और उनकी पत्नी को निर्वाचन अधिकारियों के समक्ष दो अलग-अलग तारीखों पर उपस्थित होने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा, “नोटिस की भाषा काफी जटिल है और समझना आसान नहीं है। फिर भी हम निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन करेंगे।”

नोटिस में क्या कहा गया

इस सप्ताह की शुरुआत में जारी नोटिस में कहा गया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है और उनका हस्ताक्षरित एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त हो चुका है। हालांकि, जांच के बाद यह पाया गया कि फॉर्म में ऐसे विवरण नहीं भरे गए हैं, जिनसे यह स्थापित हो सके कि वे या उनके परिजन पिछले SIR के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में पंजीकृत मतदाता रहे हैं।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में एडमिरल अरुण प्रकाश ने कहा, “सेवानिवृत्ति के 20 वर्षों में मैंने कभी किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं की। मेरी पत्नी और मैंने SIR के फॉर्म नियमों के अनुसार भरे थे और हमें खुशी थी कि हमारे नाम गोवा की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 2026 में निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर दिखाई दिए। फिर भी हम आयोग के नोटिस का पालन करेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर तीन बार आए थे और यदि किसी अतिरिक्त जानकारी की आवश्यकता थी, तो उसी समय मांगी जा सकती थी। एडमिरल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि SIR फॉर्म आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, तो उनके प्रारूप में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा, “हम 82 और 78 वर्ष के दंपती हैं और हमें 18 किलोमीटर दूर, दो अलग-अलग तारीखों पर उपस्थित होने के लिए कहा गया है।”

मामले का सरकारी पक्ष

एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नोटिस इसलिए जारी किया गया क्योंकि 2002 की मतदाता सूची, जब गोवा में पिछला SIR हुआ था, उसमें एडमिरल अरुण प्रकाश और उनकी पत्नी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। अधिकारी के अनुसार, एन्यूमरेशन फॉर्म में कुछ विवरण अधूरे थे, इसलिए यह कार्रवाई की गई। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) संजय गोयल से इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

पहले भी सामने आए ऐसे मामले, गोवा में बड़े पैमाने पर नाम कटे

इससे पहले, दक्षिण गोवा से सांसद और सेवानिवृत्त नौसेना अधिकारी तथा कारगिल युद्ध के दिग्गज विरियातो फर्नांडिस को भी निर्वाचन आयोग से नोटिस मिला था, जिसमें उनसे अपनी पहचान और मतदाता होने का प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा गया था। गौरतलब है कि गोवा में ड्राफ्ट मतदाता सूची से एक लाख से अधिक नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 8.44 प्रतिशत है। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा पिछले महीने साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 11,85,034 मतदाता थे, जिनमें से 10,84,992 (91.56 प्रतिशत) ने अपने एन्यूमरेशन फॉर्म जमा किए।

बड़े हैं SIR धांधली के आंकड़े

ड्राफ्ट सूची से हटाए गए 1,00,042 मतदाताओं में-
• 25,574 मृत पाए गए,
• 29,729 अनुपस्थित या पता न चलने वाले हैं,
• 40,469 स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं,
• 1,997 के नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज पाए गए,
• जबकि 2,273 ऐसे हैं, जिन्होंने किसी कारणवश मतदाता के रूप में पंजीकरण की इच्छा नहीं जताई।एडमिरल अरुण प्रकाश का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब गोवा में SIR को लेकर व्यापक चर्चा और चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। खासतौर पर बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और लंबे समय से पंजीकृत मतदाताओं को दस्तावेज़ी प्रक्रियाओं में आ रही कठिनाइयों को लेकर।

देशभर में SIR को लेकर विवाद: मतदाता सूची शुद्धिकरण या लोकतांत्रिक अधिकारों पर संकट?

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को “शुद्ध, अद्यतन और पारदर्शी” बनाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कई राज्यों में विवादों के घेरे में आ गया है। विभिन्न राज्यों से यह शिकायतें सामने आ रही हैं कि इस प्रक्रिया के दौरान वैध और लंबे समय से पंजीकृत मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, या उन्हें दोबारा नागरिकता और पहचान साबित करने के लिए मजबूर  किया जा रहा है। विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया संवेदनशीलता और व्यावहारिक समझ के साथ नहीं चलाई गई, तो यह मताधिकार जैसे संवैधानिक अधिकार को कमजोर कर सकती है।

किन-किन राज्यों से उठे सवाल?

1. गोवा

गोवा में SIR के दौरान 8 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए जाने ने सबसे अधिक ध्यान खींचा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश, सांसद और कारगिल युद्ध के दिग्गज विरियातो फर्नांडिस जैसे प्रतिष्ठित नागरिकों को भी दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के नोटिस मिले। इससे यह सवाल उठा कि जब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले नागरिक इस प्रक्रिया में फंस रहे हैं, तो आम मतदाता की स्थिति क्या होगी।

2. महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों से शिकायतें आई हैं कि लंबे समय से एक ही पते पर रह रहे मतदाताओं को “स्थानांतरित” बताया गया। BLO द्वारा घर पर मुलाकात किए बिना ही रिपोर्ट भर दी गई और बुज़ुर्ग और अकेले रहने वाले नागरिकों के नाम सूची से हटाए गए। विपक्षी दलों ने इसे “चुनिंदा इलाकों में मतदाता आधार कमजोर करने की कोशिश” बताया।

3. बिहार

बिहार में SIR को लेकर आशंका जताई गई कि प्रवासी मजदूरों के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जा रहे हैं। आधार या अन्य दस्तावेज़ न होने पर नाम “संदिग्ध” श्रेणी में डाल दिए गए। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों तक फॉर्म ही नहीं पहुंचे। नागरिक संगठनों ने मांग की कि प्रवासी और गरीब तबकों के लिए विशेष छूट और सरल प्रक्रिया अपनाई जाए।

4. पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी हुई। कुछ इलाकों में दावा किया गया कि अल्पसंख्यक और सीमावर्ती क्षेत्रों में नाम अधिक कटे। BLO की रिपोर्टिंग पर पारदर्शिता न होने के आरोप लगे। राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग से विस्तृत डेटा सार्वजनिक करने की मांग की।

5. असम और पूर्वोत्तर

असम और पूर्वोत्तर राज्यों में SIR को अक्सर NRC जैसी प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
• नागरिकता साबित करने का डर,
• पुराने दस्तावेज़ मांगने की शिकायतें,
• आदिवासी और दूरदराज़ के क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, इन कारणों से लोगों में भ्रम और आशंका का माहौल बना।

आम तौर पर सामने आ रही समस्याएं

देशभर से जो सामान्य शिकायतें सामने आई हैं, उनमें शामिल हैं-
• जटिल और कानूनी भाषा में नोटिस,
• बुज़ुर्गों और दिव्यांगों को कार्यालयों में बुलाना,
• पति-पत्नी या परिवार के सदस्यों को अलग-अलग तारीखों पर बुलाना,
• BLO द्वारा अतिरिक्त जानकारी मौके पर न मांगना,
• ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रक्रिया में तालमेल की कमी!

निर्वाचन आयोग का पक्ष

निर्वाचन आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मृत मतदाताओं के नाम हटाना, डुप्लिकेट एंट्री समाप्त करना और स्थानांतरित मतदाताओं को अपडेट करना है। आयोग के अनुसार, आपत्ति दर्ज कराने और नाम पुनः जोड़ने की प्रक्रिया खुली और समयबद्ध है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन इस दावे से मेल नहीं खाता।

लोकतंत्र के लिए क्यों गंभीर है यह मुद्दा?

मतदान का अधिकार संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा माना जाता है। यदि वैध मतदाताओं के नाम बिना पर्याप्त सुनवाई के हटाए जाएं, या प्रक्रिया इतनी जटिल हो कि गरीब, बुज़ुर्ग और प्रवासी मतदाता उससे बाहर हो जाएं, तो यह लोकतांत्रिक सहभागिता को कमजोर कर सकता है।
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