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February 6, 2026

घूसखोर पंडत फिल्म पर योगी की सख्ती, निर्देशक और टीम पर FIR, नेटफ्लिक्स कंटेंट पर भी एक्शन

The CSR Journal Magazine

लखनऊ के हजरतगंज थाने में मामला दर्ज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की Zero Tolerance Policy के तहत सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ एक बार फिर सख्त कार्रवाई देखने को मिली है। ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर प्रचारित हो रही आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ लखनऊ के थाना हजरतगंज में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई धार्मिक और जातिगत भावनाएं आहत करने, वैमनस्य फैलाने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों में की है।

फिल्म का टाइटल और कंटेंट बना विवाद की जड़

हजरतगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह के अनुसार, फिल्म का शीर्षक और उसके प्रचार में इस्तेमाल किए गए संवाद prima facie आपत्तिजनक पाए गए हैं। एफआईआर में कहा गया है कि ‘घूसखोर पंडत’ नाम एक समुदाय विशेष, खासकर ब्राह्मण समाज, को लक्षित कर अपमानित करने की मंशा से रखा गया प्रतीत होता है। नेटफ्लिक्स और सोशल मीडिया पर जारी किए गए प्रोमो और कंटेंट को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।

ब्राह्मण संगठनों में आक्रोश, प्रदर्शन की चेतावनी

फिल्म के नाम और कथित कंटेंट को लेकर ब्राह्मण समाज और कई सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखी गई। कुछ संगठनों ने उग्र प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी भी दी थी। पुलिस के अनुसार, इससे सार्वजनिक शांति और कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी, जिसे देखते हुए तत्काल कार्रवाई जरूरी हो गई।

योगी सरकार की नीति: सौहार्द से समझौता नहीं

प्रदेश सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि धार्मिक या जातिगत भावनाओं को आहत करने, समाज को बांटने और वैमनस्य फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इसी नीति के तहत पुलिस ने फिल्म के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया है। यह संदेश भी दिया गया है कि OTT Content Regulation के नाम पर किसी को भी सामाजिक ताने-बाने से खेलने की छूट नहीं दी जाएगी।

जांच जारी, आगे और कार्रवाई संभव

पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है। प्रचारित कंटेंट, सोशल मीडिया पोस्ट्स और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी। जरूरत पड़ी तो ओटीटी प्लेटफॉर्म से भी जवाब तलब किया जा सकता है। यह मामला एक बार फिर OTT platforms, freedom of expression और social harmony के बीच संतुलन की बहस को तेज करता दिख रहा है, वहीं योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि सामाजिक सौहार्द से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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