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सीएसआर से बढ़ेगा टूरिज्म, बनेगा महाराष्ट्र टूरिज्म सोसाइटी

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महाराष्ट्र टूरिज्म सोसाइटी का गठन कर सीएसआर से राज्य में टूरिज्म को बढ़ावा देगी पर्यटन विभाग - मिलिंद बोरीकर, निदेशक, पर्यटन विभाग, महाराष्ट्र
 
कोरोना की बंदिशों के बाद टूरिज्म को एक्सप्लोर (Explore Maharashtra) करने के लिए हर एक राज्य पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ा रहें है। महाराष्ट्र पर्यटन विभाग ना सिर्फ सस्टेनेबल टूरिस्म को प्रोत्साहित कर रहा है बल्कि महाराष्ट्र टूरिज्म सोसाइटी बनाकर सीएसआर की मदद से टूरिस्ट डेस्टिनेशन को इको और एनवायरनमेंट फ्रेंडली भी बना रहा है। महाराष्ट्र देश का पहला राज्य है जहां एग्री टूरिज्म पालिसी है। महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जहां हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को इंडस्ट्री का दर्जा मिला हुआ है। महाराष्ट्र में गुफाएं हैं, समंदर के किनारें हैं, राजा महाराजा के किलें है, महाराष्ट्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। 27 सितंबर को विश्व टूरिज्म दिवस है ऐसे में The CSR Journal ने महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के निदेशक मिलिंद बोरीकर से ख़ास बातचीत की। (Exclusive Chat with Milind Borikar, IAS, Director, Directorate of Tourism, Govt. of Maharashtra)

आज World Tourism Day है, महाराष्ट्र टूरिज्म (Maharashtra Tourism) डिपार्टमेंट किस तरह से देश के कोने-कोने से लोगों को आकर्षित करने के लिए काम कर रही है?

कोविड काल एक ऐसा समय था जब पूरा विश्व थम सा गया था। ऐसा समय आया था जब मुंबई के भी रास्ते पूरी तरह से खाली मिल रहे थे। कोरोना के बाद अब मौका है कि हम टूरिस्ट को अट्रैक्ट कर सकें। हम पर्यटकों को महाराष्ट्र में आकर्षित करने के लिए कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। उसमें महत्वपूर्ण डेस्टिनेशंस है। अनेक नए स्थानों को हम एक्सप्लोर कर रहें है। हम उनके लिए वहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर (Tourism Infrastructure) बना रहे हैं, हम यह चाहते हैं कि लोग ऐसे नए स्थानों पर जाएं जहां पर भीड़ ना हो। जहां जाने में उनका समय ना लगे। जहां उनको शांति मिले, शांति के साथ पर्यटन का और नेचर का वो आनंद ले सकें। आज हम वर्ल्ड टूरिज्म डे (World Tourism Day) मना रहे हैं जिसका थीम है (Rethinking Tourism in Maharashtra)री थिंकिंग टूरिज्म यानी कि नई सोच, नई दिशा, हम जब पर्यटन बोलते हैं तो दो-चार ही विचार हमारे मन में आते हैं। हर पर्यटक वही जाने की सोचता है जहां लोग पहले जा चुके होते है या वहां सभी लोग जाते रहते है। लेकिन हम इस बार नए साल में लोगों को ऐसे जगहों से Explore करवाना चाहते हैं जहां जहां भीड़ कम हो। जहां पर वह शांति के साथ निसर्ग का आनंद ले सके। इसके लिए हमने 8 ऐसे प्वाइंट्स आईडेंटिफाई किए हैं जहां पर हम इंफ्रास्ट्रक्चर लेवल पर विकास करना शुरू कर दिए है।

आजकल सस्टेनेबल टूरिज्म की तरफ लोग बहुत ज्यादा देख रहे हैं। हर एक राज्य सस्टेनेबल टूरिज्म (Sustainable Tourism in Maharashtra) को बढ़ावा दे रहा है। महाराष्ट्र उसमें किस तरह से अग्रसर है?

हमारी पूरी कोशिश है कि हम पर्यावरण पूरक पर्यटन रखें। पर्यावरण को कोई भी हानि न हो। जैसे हमारे वर्ल्ड हेरिटेज साइट हैं, अजंता एलोरा है, गेट वे ऑफ इंडिया है, या फिर हिल स्टेशन है, महाबलेश्वर, लोनावाला या फिर महाराष्ट्र के बीचेस, कोकण के जो बीच हमारे फेमस हैं, रत्नागिरी हो, या फिर कोई जंगल जैसे ताडोबा। नेचर हमेशा हमें एक अनुकूल वातावरण देता है, आनंद देता है। उस नेचर को, वह पर्यावरण कायम रहे, उसको कोई हानि न पहुंचे, इस दृष्टिकोण से, जिम्मेदारी के साथ हम पर्यटन कैसे करें इस मामले में भी भी हम पर्यटकों को शिक्षा दे रहे हैं। अलग-अलग माध्यम से, टेलीविजन, रेडियो, एडवर्टाइजमेंट के जरिये हम पर्यटकों को सिखा रहें हैं। हम स्टेकहोल्डर्स के साथ अलग-अलग ट्रेनिंग कैंप करते है ताकि पर्यटक और हमारे स्टेकहोल्डर्स जिम्मेदारी के साथ पर्यटन का आनंद लें और पर्यावरण को कायम रखें। सस्टेनेबल टूरिज्म को Maharashtra Tourism Department बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। हमारे टूरिस्ट डेस्टिनेशंस (Tourist Destinations in Maharashtra) पर हम बायो टॉयलेट्स बना रहें है। उन डेस्टिनेशंस पर हम ई-बस चला रहें हैं। हम वहां पर प्रॉपर वेस्ट मैनेजमेंट कर रहें हैं। वहां पर ड्रेनेज सिस्टम को हम और भी दुरुस्त कर रहें है। हम अत्याधुनिक सुविधाओं को बढ़ा रहें है जो पर्यावरण पूरक पर्यटन को आगे लेकर जायेंगे।

महाराष्ट्र में टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। हम फिलहाल बीचेस, फोर्ट्स इन चीजों पर बहुत ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। लेकिन क्या महाराष्ट्र टूरिज्म डिपार्टमेंट एडवेंचर टूरिज्म, एग्रो टूरिज्म जैसे अन्य दूसरे संभावनाओं को भी तलाश रही है?

एग्री टूरिज्म में महाराष्ट्र सबसे आगे है। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बारिश का कम ज्यादा होना हमनें देखा है। बारिश की वजह से हमारे फार्मर बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं। एग्रो टूरिज्म हमारे किसानों के लिए अच्छा शाश्वत कमाई का सोत्र बन रहा है। अर्बन सिटी जैसे मुंबई, पुणे, औरंगाबाद इन मेट्रो शहरों की नई पीढ़ी शहरों में जन्म लेते हैं वही बड़े होते हैं जिन्हें ग्रामीण परिवेश और खेती-बाड़ी के बारे में कोई जानकारी नहीं है, वह वहां जाकर ग्रामीण सभ्यता का ज्ञान भी ले रहे हैं और इसके अलावा पर्यटन का भी मजा ले रहे हैं। इन युवाओं को अनुभव भी मिल रहा है और नैसर्गिक वातावरण में कैसे रहा जा सकता है, प्रदूषण मुक्त वातावरण में कैसे रहा जा सकता है उसका आनंद भी ले रहे हैं। इसके अलावा हम वैलनेस टूरिज्म के बारे में सोच रहे हैं। वैलनेस टूरिज्म में महाराष्ट्र बहुत बड़ा हब बन सकता है। मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर यहां बड़े-बड़े अस्पताल है जो बहुत ही चर्चित, बहुत फेमस बहुत बड़े अस्पताल है। जहां देश भर के कोने-कोने से लोग आते हैं। यहां इलाज करवाने के लिए न सिर्फ भारत से बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं। इसको हम एक प्लेटफार्म पर लाकर इसको कैसे बढ़ावा दे सकते हैं इस पर भी काम कर रहे हैं। वैलनेस पर हम सिर्फ हॉस्पिटलाइजेशन या फिर मेडिकेशन नहीं बल्कि प्रीवेंटिव वैलनेस पर भी जोर दे रहे हैं। जैसे की आयुर्वेदिक मसाज या फिर योगा, विपासना इन सभी को एक प्लेटफार्म पर लाकर जो भी मरीज बाहर से आएगा चाहे वह दूसरे स्टेट से, चाहे वह दूसरे देश से उसको कैसे तंदुरुस्त रखा जाए इस पर भी हम काम कर रहे हैं।

कई हेरिटेज साइट को मैंटेन या फिर इस तरह के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए CSR की क्या भूमिका होती है?

टूरिज़्म में सीएसआर (CSR in Tourism) की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है, नेशनल हेरिटेज को बढ़ावा देने के लिए सीएसआर फंड्स का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन महाराष्ट्र सरकार की टूरिस्म डिपार्टमेंट सरकारी होने की वजह से हम डायरेक्ट सीएसआर फण्ड (Corporate Social Responsibility Funds) नहीं ले सकते लेकिन हेरिटेज साइट को बरक़रार रखने के लिए फंड्स की तो जरूरत होती है। सीएसआर पाने के लिए टूरिस्म डिपार्टमेंट Maharashtra Tourism Society का गठन करेगी। ताकि CSR को टूरिस्म के बढ़ावे के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

टूरिज़्म में इकोनॉमिकली टूरिज्म हमेशा से देखा जाता है। हम टूरिस्ट बेसिक नेसेसिटी के बाद ही टूरिज्म की सोचते हैं, ऐसे में टूरिज्म को इकोनॉमिकली किस तरह से आप लोग बना रहे हैं?

हमारे जितने भी टूरिस्ट डेस्टिनेशंस है वहां पर हम हर तरह के लोगों को आकर्षित करते हैं। चाहे वह आम इंसान हो या ख़ास, मध्यमवर्गीय हो या फिर हाई क्लास। हमारे जितने भी टूरिस्ट डेस्टिनेशन है वहां पर हर प्रकार के होटल्स बना रहे हैं। इन टूरिस्ट डेस्टिनेशंस पर सस्ते होटल भी रहे और महंगे होटल भी हैं। हम आर्थिक क्षमताओं का विचार करते कई ऑप्शंस देते है। होमस्टे का प्रावधान भी है जहां पर्यटक कम पैसे में रह सकते हैं वहीं MTDC के होटल्स भी है।

लोकल कम्युनिटी के लिए टूरिस्ट डेस्टिनेशंस और टूरिज्म ही उनके कमाई का जरिया होता है। ऐसे में रोजगार के अवसर भी क्या टूरिज्म डिपार्टमेंट दे रहा है?

लोकल कम्युनिटी जैसे गाइड, ड्राइवर, होटल ओनर, वेटर ये ज्यादातर लोकल कम्युनिटी से ही होते है।  समय समय पर इन सभी को हम ट्रेनिंग प्रोग्राम में सम्मिलित करके उनको ट्रेनिंग देते हैं। यह लोग वहीं के स्थानीय लोग होते हैं और आने वाले टूरिस्ट को कितनी सहूलियत दे सकें इसके लिए हम उन्हें प्रोत्साहित भी करते है। आपको जानकार हैरानी होगी कि अकेले महाराष्ट्र टूरिज्म से 6 हज़ार लोगों को रोजगार मिला है।

The CSR Journal से बातचीत के लिए बहुत बहुत शुक्रिया