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January 13, 2026

MP में SIR बना भावनात्मक मिलन का जरिया: 22 साल बाद मां से मिला बेटा !

The CSR Journal Magazine

 

मध्य प्रदेश के मंदसौर में SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आई इंसानी रिश्तों की अनोखी कहानी! मां से मिला 22 साल पहले बिछड़ा बेटा! 

मंदसौर में 22 साल पुराने बिछोह का अंत, मतदाता सत्यापन बना सहारा

मध्य प्रदेश के पश्चिमी जिले मंदसौर में चल रही मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बीच एक ऐसी भावनात्मक कहानी सामने आई है, जिसने प्रशासनिक प्रक्रिया को मानवीय संवेदनाओं से जोड़ दिया। 45 वर्षीय विनोद गायरि, जो पिछले 22 वर्षों से अपने माता-पिता से अलग थे, आखिरकार अपनी मां से मिल पाए। यह मिलन न केवल एक परिवार के टूटे रिश्तों को जोड़ने वाला क्षण बना, बल्कि यह भी दिखाता है कि सरकारी दस्तावेज़ों और पहचान की प्रक्रिया किस तरह किसी के जीवन में गहरा असर डाल सकती है।

वोटर आईडी की खोज में मिला खोया रिश्ता

विनोद गायरि वर्तमान में राजस्थान के नागौर जिले में एक स्कूल में चपरासी के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में उन्होंने अपने माता-पिता के मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए अपने पैतृक गांव खिलचीपुरा पंचायत (मंदसौर जिला) से संपर्क किया। पंचायत कार्यालय में जब उनके परिवार से  जुड़ी जानकारी की जांच शुरू हुई, तो यह बात सामने आई कि विनोद वर्षों से अपने घर-परिवार से कोई संपर्क नहीं रखे हुए थे।

प्रेम विवाह के चलते छोड़ा घर

दरअसल, साल 2004 में विनोद ने अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ एक युवती से प्रेम विवाह किया था। युवती उनकी दूर की रिश्तेदार थी, जिसे लेकर परिवार में तीखा विरोध था। माता-पिता द्वारा रिश्ते को स्वीकार न किए जाने से आहत होकर तब 23 वर्षीय विनोद ने घर छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पसंद की महिला से विवाह कर लिया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। समय बीतता गया, लेकिन परिवार से दूरी बनी रही।

भावुक पुनर्मिलन से इमोशनल हुआ गांव

SIR प्रक्रिया के तहत जब पंचायत स्तर पर रिकॉर्ड खंगाले गए, तो यह जानकारी विनोद की मां तक पहुंची कि उनका बेटा जीवित है और उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। वर्षों से बेटे की कोई खबर न मिलने के कारण मां ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। ऐसे में बेटे के बारे में सूचना मिलते ही भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। पंचायत की पहल और स्थानीय लोगों की मदद से आखिरकार मां-बेटे के बीच संपर्क स्थापित हुआ। 22 साल बाद जब विनोद अपनी मां से मिले, तो यह दृश्य बेहद भावुक था। मां ने बेटे को गले लगाया, आंखों में आंसू थे और शब्द कम पड़ गए। गांव के लोगों के लिए भी यह पल अविस्मरणीय रहा।

SIR सामने ला रहा मानवीय पहलू

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि SIR का उद्देश्य भले ही नामों और दस्तावेजों की जांच करना हो, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे सामाजिक और मानवीय पहलू भी सामने आ रहे हैं, जो लोगों के जीवन को छू जाते हैं। यह घटना उसी का एक उदाहरण है, जहां पहचान से जुड़ी प्रक्रिया ने टूटे रिश्तों को फिर से जोड़ने का काम किया।
यह कहानी केवल एक परिवार के पुनर्मिलन की नहीं है, बल्कि यह बताती है कि समय, परिस्थितियां और गलतफहमियां चाहे जितनी बड़ी क्यों न हों, मानवीय रिश्तों में उम्मीद की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है
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