महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बड़ा फैसला लेते हुए 9 फरवरी को अपना जन्मदिन न मनाने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस दुख की घड़ी में किसी भी तरह का उत्सव, कार्यक्रम या औपचारिक आयोजन उचित नहीं है। एकनाथ शिंदे ने कहा कि अजित पवार के असमय निधन से महाराष्ट्र को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने इसे सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत नुकसान बताया। शिंदे के मुताबिक, अजित पवार उनके सहयोगी ही नहीं, बल्कि मित्र भी थे। ऐसे में इस समय जन्मदिन मनाना उन्हें नैतिक रूप से सही नहीं लगता। उन्होंने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि उनके जन्मदिन के मौके पर न तो फूलों के गुलदस्ते लाए जाएं, न शुभकामना होर्डिंग्स लगाए जाएं और न ही किसी तरह का समारोह या कार्यक्रम आयोजित किया जाए। यह फैसला महाराष्ट्र की संवेदनशील राजनीतिक स्थिति और शोक के माहौल को देखते हुए लिया गया है।
शोक के माहौल में लिया संवेदनशील निर्णय
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने अपने संदेश में कहा कि अजित पवार के जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसकी भरपाई संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा राज्य पवार परिवार के दुख में सहभागी है। यह समय आत्ममंथन और संवेदना जताने का है, न कि जश्न मनाने का। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला एकनाथ शिंदे की संवेदनशील छवि को और मजबूत करता है। अक्सर राजनीति में ऐसे मौके देखने को मिलते हैं, जब नेता निजी अवसरों को भी सामाजिक और राजनीतिक हालात से जोड़कर निर्णय लेते हैं। शिंदे का यह कदम उसी दिशा में देखा जा रहा है।
कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील
एकनाथ शिंदे ने खास तौर पर अपने समर्थकों और शिवसेना कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का सार्वजनिक प्रदर्शन, जुलूस या बधाई कार्यक्रम न किया जाए। इससे शोक की भावना को ठेस पहुंच सकती है। राज्य में पहले से ही Ajit Pawar death news और Maharashtra political news को लेकर माहौल भावुक बना हुआ है। ऐसे में यह निर्णय राजनीतिक शालीनता और मानवीय संवेदना का संदेश देता है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का जन्मदिन न मनाने का फैसला यह दिखाता है कि दुख की घड़ी में राजनीति से ऊपर उठकर संवेदना और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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