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February 21, 2026

ED ने गुरुग्राम के रियल एस्टेट घोटाले में 82 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की, जांच जारी

The CSR Journal Magazine
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुग्राम के अंसल हब-83 से जुड़े 82 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। निवेशकों से धोखाधड़ी और सरकारी मंजूरियों के बिना प्रोजेक्ट की यूनिट बेचने के आरोपों के चलते यह कार्रवाई की गई है। ED का गुरुग्राम जोनल ऑफिस इस मामले की जांच कर रहा है और करीब 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गई हैं। अंसल हब-83 प्रोजेक्ट सेक्टर-83 में स्थित है, जिसमें 147 दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और 2 रेस्टोरेंट शामिल हैं।

जांच का आगाज़ कैसे हुआ?

इस मामले की जांच जून 2023 में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी, जिसे हरियाणा पुलिस ने दर्ज किया था। FIR में अंसल हाउसिंग लिमिटेड के प्रमोटरों और अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। इस मामले में मुख्य आरोपी कंपनी के होलटाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल और अन्य जुड़े हुए कंपनियां सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड तथा आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड हैं। शिकायत HUB-83 आवंटी कल्याण संघ की ओर से की गई थी, जो 1000 से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करती है।

जांच में सामने आईं गंभीर गड़बड़ियां

ED की जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरियां मिलने से पहले ही यूनिट बेची गईं। इसके अलावा, दिसंबर 2015 में लाइसेंस समाप्त हो जाने के बावजूद डेवलपर्स ने इसे रिन्यू नहीं कराया और सितंबर 2023 तक निवेशकों से पैसे लेते رہے। निवेशकों को समय पर कब्जा और वर्ल्ड-क्लास सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन लगभग 15 साल बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ। वर्तमान में ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है, और किसी को कब्जा नहीं मिला है।

निवेशकों का पैसा निजी फायदे के लिए इस्तेमाल

जांच से पता चला कि प्रोजेक्ट को पूरा करने के बजाय निवेशकों का पैसा अन्य कामों और निजी लाभ में प्रयोग किया गया। कई परेशान निवेशकों ने हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (HRERA) में भी शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस हल नहीं निकल सका। यह सब ऐसे समय में हुआ जब निवेशकों ने अपनी मेहनत की कमाई इस प्रोजेक्ट में लगाई थी।

कितनी संपत्ति और क्यों अटैच हुई?

जांच में सामने आया कि 2011 से 2023 के बीच निवेशकों से 82 करोड़ रुपये से अधिक वसूले गए थे। इसीलिए, भविष्य में संपत्ति बेचने या ट्रांसफर कर साक्ष्य मिटाए न जा सकें, इसलिए प्रोजेक्ट की जमीन और अब तक का निर्माण अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई उन गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए की गई है, जो निवेशकों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए हैं। इस मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है, और ED सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए तत्पर है।

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