Indian Navy Submarine Takshak: समुद्र में दुश्मन का काल बनेगा ‘तक्षक’, होगा साइलेंट किलर, दुश्मन को नहीं लगेगी भनक

The CSR Journal Magazine

ताकतवर टॉरपीडो का आ रहा है आगाज

Indian Navy Submarine Takshak: भारत अपनी समुद्री शक्ति को बढ़ाने के लिए एक नया कदम उठाने जा रहा है। स्वदेशी हैवीवेट टॉरपीडो ‘तक्षक’ का ट्रायल जल्द ही शुरू होगा। इसे भारतीय नौसेना की Kalvari-Class Submarine से लॉन्च किया जाएगा। यदि यह ट्रायल सफल रहता है तो 2027 में लाइव वारहेड टेस्ट भी होगा। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है।

आधुनिक तकनीक से लैस ‘तक्षक’

तक्षक टॉरपीडो, जिसे DRDO की नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी (NSTL) ने विकसित किया है, एक एडवांस इलेक्ट्रिक हेवीवेट टॉरपीडो है। यह पुराने वरुणास्त्र का ज्यादा आधुनिक संस्करण है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों और जहाजों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भरता मिलेगी और विदेशी टॉरपीडो पर निर्भरता कम होगी।

Indian Navy Submarine Takshak: कठिन टेस्टिंग की तैयारी

समुद्र में तक्षक के ट्रायल विभिन्न परिस्थितियों में किए जाएंगे। मीडिया सूत्रों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में दिसंबर 2024 में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस की Naval Group के साथ 877 करोड़ रुपये की डील की है, जिसके तहत तक्षक को SUBTICS Combat Management System से जोड़ा जाएगा। इस सिस्टम से टॉरपीडो के इस्तेमाल में आसानी होगी।

नवीनतम तकनीकों का समावेश

तक्षक टॉरपीडो एक खास संरचना के साथ बनाया गया है, जिसकी लंबाई लगभग 6.4 मीटर है। इसमें Ring Laser Gyro आधारित नेविगेशन और स्वदेशी NavIC सैटेलाइट गाइडेंस सिस्टम शामिल है। यह दुश्मन की नौकाओं और पनडुब्बियों पर सटीकता से हमला करने की क्षमता रखता है। INS कलवरी में तॉरपीडो के लिए एक विशेष स्विम-आउट लॉन्च सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे यह बिना जोर से आवाज किए पानी में निकल सकेगा।

लॉन्च के लिए चुनौतियाँ

हालांकि, इस प्रोजेक्ट में कई चुनौतियाँ भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती फाइबर-ऑप्टिक तारों को सुरक्षित रखना है, क्योंकि अगर यह टूट जाती है तो टॉरपीडो का नियंत्रण समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा, पनडुब्बी की स्टेल्थ बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। यदि तक्षक सफल होता है, तो भारतीय नौसेना की ताकत में काफी बढ़ोत्तरी होगी।

टेस्टिंग की समयसीमा

यदि सभी ट्रायल सफल होते हैं, तो 2027 में लाइव वारहेड टेस्ट होगा, जिसमें टॉरपीडो को किसी पुराने जहाज या टारगेट पर दागा जाएगा। भारतीय नौसेना की उन्नति के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे समुद्री सुरक्षा को और मजबूत किया जा सकेगा।

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