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तो इसलिए श्रीकांत शिंदे को कहा जाता है गरीबों का मसीहा और इंफ्रास्ट्रक्चर मैन

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सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे को उनके सामाजिक कामों के लिए The CSR Journal Excellence Awards 2022 में Leadership for Social Change Award – 2022 से नवाजा गया। The CSR Journal की तरफ से आयोजित समारोह में सांसद डॉ श्रीकांत शिंदे (Shrikant Shinde, Member of Parliament) विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहें। श्रीकांत शिंदे को सामाजिक और सीएसआर इनिशिएटिव्ज़ के लिए Leadership for Social Change Award – 2022 का अवॉर्ड दिया गया। The CSR Journal Excellence Awards में कॉरपोरेट और सामाजिक जगत से जुड़ी दिग्गज हस्तियों का जमावड़ा रहा। दी सीएसआर जर्नल एक्सीलेंस अवॉर्ड में उन तमाम कॉरपोरेट कंपनियों और लोगों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने Corporate Social Responsibility (CSR) के माध्यम से समाज में अपनी जिम्मेदारी और अपने दायित्वों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक उत्थान के लिए बेहतरीन काम किये है।

इन्हीं में से एक है डॉ श्रीकांत शिंदे। श्रीकांत शिंदे ये एक शख्स ही नहीं बल्कि अपने अंदर कई शख्सियतों को समेटे हुए महाराष्ट्र की राजनीति का वो चेहरा है जिसे महाराष्ट्र की निर्बल, गरीब, जरूरतमंद जनता इस आस से देख रही है कि एकनाथ के साथ अगर उनका कोई मसीहा है तो वो है श्रीकांत शिंदे। श्रीकांत शिंदे कुशल मेडिकल डॉक्टर है, तो गौरवशाली राजनीति का लंबा खिलाड़ी है, श्रीकांत सांसद है तो श्रीकांत शिंदे सामाजिक कार्यकर्ता भी है। बालासाहेब ठाकरे हमेशा कहते थे कि हर एक राजनेता को कि 20 फीसदी राजनीति और 80 फीसदी समाजनीति करनी चाहिए। बालासाहेब ठाकरे और धर्मवीर आनंद दिघे के नक़्शे क़दमों पर चलते हुए श्रीकांत शिंदे ने ऐसी राह अपनाई है कि जो दूसरों के लिए मिसाल है।

श्रीकांत गरीब और जरूरतमंद जनता के लिए किसी मसीहा से काम नहीं

समाजनीति और राजनीति के बीच सामंजस्य का शानदार उदाहरण है श्रीकांत शिंदे। श्रीकांत गरीब और जरूरतमंद जनता के लिए किसी मसीहा से काम नहीं। कतार में खड़े आखिरी शख्स तक मदद के हाथ बढे इसके लिए श्रीकांत शिंदे ने एक फाउंडेशन बनाया जो दिन-रात महाराष्ट्र की जनता की सेवा में जुटी है। शिवसेना वैद्यकीय मदद सेल श्रीकांत की ही संकल्पना है जिसकी मदद से लाखों मरीजों को आर्थिक मदद मिल रही है। नन्ही आराध्या भी इनमें से एक है। आराध्या जब 6 महीने की थी तब मां नीता और पिता साईनाथ को ये पता चला कि उनकी बेटी आराध्या का लिवर खराब हो गया है जिसके इलाज के लिए 23 लाख रुपये खर्च लगेगा। श्रीकांत शिंदे ने ना सिर्फ बच्ची को नया जीवनदान दिया बल्कि अभी तक उसके इलाज का खर्च उठा रहे हैं।

श्रीकांत शिंदे की पहल से लोगों की जिंदगियों में हो रहा है सकारात्मक बदलाव

दीपाली लाड़ और अर्चना मंचे को राशन कार्ड बनाने के लिए बहुत जद्दोजहद करने पड़े। दीपाली की सास बीमार है और इन्हें मुफ्त इलाज के लिए राशन कार्ड की सख्त जरूरत है, सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी राशन कार्ड नहीं बन पा रहा था। यही हाल अर्चना का भी था, 5 साल से ना राशन कार्ड बना और ना ही राशन का गेंहू चावल मिला। ऐसे में श्रीकांत की पहल से इन्हे एक दिन में राशन कार्ड बन गया। उल्हास भी सरकारी लालफीताशाही के शिकार हुए, रोड कटिंग में घर जाने के बाद 9 साल तक इनके सिर पर छत नहीं था। लेकिन श्रीकांत ने इनके हक़ का घर दिलाया। दिव्यांग रोहिदास के भी जीवन में भी श्रीकांत ने ऐसा बदलाव लाया ताकी वो अपने पूरे परिवार की जीवनी चला सकें।

श्रीकांत के सांसद बनने के बाद कल्याण-डोंबिवली में हो रहा है तेजी से विकास का काम, श्रीकांत को लोग कहते हैं इंफ्रास्ट्रक्चर मैन

मुंबई से सटा कल्याण – डोंबिवली भले श्रीकांत शिंदे की कर्मभूमि है, लेकिन वर्चस्व दिल्ली तक है। श्रीकांत ने कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर, अंबरनाथ के इंफ्रास्ट्रक्चर का ना सिर्फ कायापलट की बल्कि सामाजिक क्षेत्र में श्रीकांत ने ऐसा काम किया है कि विरोधी भी श्रीकांत का लोहा मानते हैं। श्रीकांत की दूरगामी सोच का ही नतीजा है कि आज उनके निर्वाचन क्षेत्र का चौतरफा विकास हो रहा है। चाहे मेट्रो हो या फिर फ्लाईओवर, रोड वे या रेलवे श्रीकांत की छवि इन्फ्रास्ट्रक्चर मैन की हो रही है। राजनीति का एक अहम पहलू है विकास की नीति। और इसी विकास निति के माहिर खिलाड़ी है श्रीकांत शिंदे। शिव मंदिर का वैभवशाली जीर्णोद्धार हो या फिर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, कम्युनिटी हॉल हो या शूटिंग रेंज बनाना। श्रीकांत जनता की जरूरतों को तुरंत अमल में लाते हैं। इतना ही नहीं श्रीकांत की पहल से भविष्य में गुणवत्तापूर्ण क्रिकेट-फुटबॉल के मैदान, ओलम्पिक आकार के स्वीमिंग पूल आदि भी बन रहे हैं। ताकि यहां से बच्चे निकलकर अंतरराष्ट्रीय पटल से देश का नाम रौशन कर सकें। मदद के लिए एक पैरों पर खड़े रहने वाले श्रीकांत शिंदे युवा दिलों की ना सिर्फ धड़कन है मील का वो पत्थर है जो दूसरे राजनेतओं को रास्ता दिखाती है।