मुंबई महानगरपालिका (BMC) की सुधार समिति की बैठक में शुक्रवार को दो बड़े मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। वर्ली स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के लिए आरक्षित जमीन पर एसआरए (Slum Rehabilitation Authority) परियोजना के तहत ट्रांजिट कैंप इमारतों के कथित अवैध अनुमोदन और निर्माण का मामला उठाया गया। साथ ही दक्षिण मुंबई में नौसेना के एयर स्टेशन के पास एक ऊंची इमारत को अनुमति देने को लेकर भी सवाल खड़े किए गए।
अशरफ़ आज़मी ने लगाया आरोप
कांग्रेस के समूह नेता अशरफ आजमी ने आरोप लगाया कि वर्ली में जिस जमीन को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए आरक्षित किया गया था, वहां पर एसआरए प्रोजेक्ट के लिए ट्रांजिट कैंप इमारतों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि शहर की बुनियादी सुविधाओं और आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी गंभीर मामला है। बैठक में आजमी ने बताया कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (District Disaster Management Authority) ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वर्ली स्थित इस स्थल पर मौजूद पुराने और महत्वपूर्ण सीवर लाइनों को किसी भी प्रकार का नुकसान, विशेषकर मानसून के दौरान, भारी जलभराव और बाढ़ का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि मुंबई हर साल मानसून में जलभराव की समस्या से जूझती है, ऐसे में सीवेज सिस्टम से जुड़ी जमीन पर निर्माण की अनुमति देना बेहद चिंताजनक है।
ट्रांजिट कैंप के रहिवासियों के पुनर्वास का सवाल
आजमी ने सवाल उठाया कि BMC प्रशासन ने आखिर किस मजबूरी में STP के लिए आरक्षित जमीन को 10,000 वर्ग मीटर से अधिक कम कर दिया। उन्होंने मांग की कि इस फैसले के पीछे की पूरी प्रक्रिया और कारणों को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि जिस ट्रांजिट कैंप में वर्तमान में लोग रह रहे हैं, उसका भविष्य क्या होगा? यदि निर्माण नियमों के खिलाफ पाया जाता है तो वहां रह रहे लोगों के पुनर्वास की क्या योजना है?उन्होंने शहरी विकास विभाग (Urban Development Department) के साथ इस जमीन के आरक्षण को लेकर हुई पत्राचार और निर्णय प्रक्रिया का पूरा ब्यौरा भी मांगा। उनका कहना था कि शहर की दीर्घकालीन जल निकासी व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखे बिना लिए गए फैसले भविष्य में गंभीर संकट खड़ा कर सकते हैं।
सचिन पड़वल ने हाईराइज की अनुमति पर खड़े किए सवाल
इसी बैठक में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कॉरपोरेटर सचिन पडवल ने दक्षिण मुंबई स्थित नौसेना के एयर स्टेशन INS Shikra के आसपास एक हाईराइज इमारत को अनुमति दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि नौसेना प्रतिष्ठानों के आसपास ऊंचाई को लेकर सख्त प्रतिबंध लागू होते हैं, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा और उड़ान संचालन प्रभावित न हो। पडवल ने कहा कि जब नौसेना ठिकानों के आसपास निर्माण की ऊंचाई को लेकर स्पष्ट नियम मौजूद हैं, तो फिर इतनी ऊंची इमारत को कैसे मंजूरी दी गई? उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए कहा, “यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। ऐसे अवैध कार्यों को रोकने के लिए लोगों को उच्च न्यायालय (HC) का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़े?”
BMC अधिकारियों पर कार्यवाई की मांग
सचिन पड़वल ने मांग की कि जिन BMC अधिकारियों ने इस निर्माण को अनुमति दी, उनके खिलाफ जांच बैठाई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि शहर में विकास कार्यों के नाम पर नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती, खासकर जब मामला रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ा हो। बैठक के दौरान विपक्षी सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई में कई परियोजनाओं में जमीन के आरक्षण में बदलाव और एफएसआई (FSI) में छूट देने के मामलों में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना था कि यदि समय रहते इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो भविष्य में शहर की आधारभूत संरचना और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है।
BMC ने दी सफाई
BMC प्रशासन की ओर से अधिकारियों ने कहा कि सभी परियोजनाएं लागू नियमों और मंजूरी प्रक्रिया के तहत ही स्वीकृत की जाती हैं। हालांकि, सदस्यों ने इस पर संतोष व्यक्त नहीं किया और विस्तृत जांच की मांग दोहराई। वर्ली का मामला जहां शहर की जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन से जुड़ा है, वहीं INS Shikra के पास हाईराइज निर्माण का मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित बताया जा रहा है। दोनों मामलों ने BMC की कार्यप्रणाली और मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BMC इन आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करती है या नहीं, और यदि गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित डेवलपर्स के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। मुंबई जैसे महानगर में बुनियादी ढांचे, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार तेज होती जा रही है।
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