2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े UAPA मामले में शीर्ष अदालत ने भूमिका के आधार पर अलग-अलग फैसला सुनाया, अनुच्छेद 21 और लंबी हिरासत पर की अहम टिप्पणी! शीर्ष अदालत ने उमर ख़ालिद- शरजील इमाम को फिलहाल जेल में रखने का आदेश!
दिल्ली दंगा केस: सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर खींची स्पष्ट लक्ष्मण रेखा
सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़ी साजिश मामले में दायर जमानत याचिकाओं पर आज अपना फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं, जबकि गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को सशर्त जमानत दे दी।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
• अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता) संविधान में केंद्रीय स्थान रखता है।
• प्री-ट्रायल हिरासत को सजा नहीं माना जा सकता, लेकिन UAPA जैसे विशेष कानून में जमानत की शर्तें अलग हैं।
• लंबी देरी और लंबी हिरासत न्यायिक जांच को और कड़ा बनाती है।
• UAPA की धारा 43D(5) सामान्य जमानत प्रावधानों से अलग है, लेकिन यह न्यायिक समीक्षा को पूरी तरह समाप्त नहीं करती।
• जमानत चरण पर बचाव पक्ष का ट्रायल नहीं किया जा सकता, पर अदालत को संरचित जांच करनी होती है-
• क्या प्रथम दृष्टया अपराध बनता है?
• क्या आरोपी की भूमिका का अपराध से युक्तिसंगत संबंध है?
अलग-अलग भूमिका, अलग फैसला
अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी आरोपी समान स्थिति में नहीं हैं।
• उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की भूमिका अन्य आरोपियों से गुणात्मक रूप से भिन्न पाई गई।
• इनके खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप सामने आते हैं, इसलिए इस चरण में जमानत नहीं दी जा सकती।
• हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि संरक्षित गवाहों की जांच पूरी होने या एक वर्ष बाद वे फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
पांच आरोपियों को जमानत
गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी गई। कोर्ट ने साफ किया कि जमानत देना आरोपों को कमजोर करना नहीं है। सभी को करीब 12 सख्त शर्तों के साथ रिहा किया जाएगा। शर्तों के उल्लंघन पर ट्रायल कोर्ट को जमानत रद्द करने का अधिकार होगा।
ट्रायल में तेजी के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि:
• संरक्षित गवाहों की गवाही बिना देरी के हो।
• मुकदमा निरंतरता के साथ चले और अनावश्यक रूप से लंबा न खिंचे।
2020 दिल्ली दंगे- घटना की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भड़के। दिल्ली पुलिस के अनुसार, दंगों में 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। पुलिस का आरोप है कि यह दंगे एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे। मामले में IPC और UAPA की गंभीर धाराएं लगाई गईं। अधिकतर आरोपी 2020 से हिरासत में हैं और कई FIRs के कारण अलग-अलग अदालतों में जमानत याचिकाएं दायर की गईं।
उमर ख़ालिद और शरजील इमाम का केस
• उमर ख़ालिद की गिरफ्तारी सितंबर 2020 में हुई।
• ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
• शरजील इमाम को अन्य मामलों में कुछ राहत मिली, लेकिन दिल्ली दंगा साजिश केस में वह अभी भी हिरासत में हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भूमिका का स्तर निर्णायक होता है। जहां केंद्रीय भूमिका वाले आरोपियों को जमानत से इनकार किया गया, वहीं सहायक भूमिका वाले आरोपियों को सख्त शर्तों के साथ राहत दी गई। यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विशेष कानूनों के संतुलन को रेखांकित करता है।
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