app-store-logo
play-store-logo
January 4, 2026

Delhi -NCR 2025: साल बदल गया लेकिन घुटती सांसें अब भी वैसी की वैसी

The CSR Journal Magazine
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अब केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे साल लोगों की ज़िंदगी पर असर डाल रहा है। CREA की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहर भारत के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल हैं। राजधानी का वार्षिक PM2.5 स्तर राष्ट्रीय मानक से 2.4 गुना अधिक रहा, जबकि WHO की सुरक्षित सीमा से यह 19 गुना अधिक है।

NCR के शहरों का हाल: हवा में खतरा हर दिन

एनसीआर के 29 शहरों में से अधिकांश ने राष्ट्रीय PM2.5 मानक पार कर लिया। दिल्ली में सबसे प्रदूषित मॉनिटरिंग स्टेशन जहांगीरपुरी रहा, जहां सालाना औसत PM2.5 130 माइक्रोग्राम/घन मीटर दर्ज किया गया। NSIT द्वारका, जिसे कम प्रदूषित माना जाता है, का स्तर भी 73 माइक्रोग्राम/घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक से 1.8 गुना अधिक है।
गाजियाबाद में सबसे ज्यादा दिन ऐसे आए जब PM2.5 स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा। नोएडा, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा भी चिंताजनक स्थिति में हैं। साल 2025 में NCR का औसत AQI 201 रहा, जो हाल के वर्षों में थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन समस्या जड़ में कम नहीं हुई।

प्रदूषण के मुख्य कारण

CREA और CSE के विश्लेषण के अनुसार, ट्रांसपोर्ट सेक्टर NCR में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जो कुल प्रदूषण का लगभग 46% जिम्मेदार है। इसके अलावा, फसल अवशेष जलाना, निर्माण धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।Delhi 
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण अब सालभर की समस्या बन गया है और इसके पीछे शॉर्ट-टर्म उपायों की सीमाएं और क्षेत्रीय समन्वय की कमी मुख्य कारण हैं।

दिल्लीवासियों की चुनौतियां

  • स्वास्थ्य पर असर: PM2.5 जैसी महीन कणिकाएं फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर अस्थमा, हृदय रोग और समय से पहले मौत का कारण बनती हैं।
  • दैनिक जीवन प्रभावित: सर्दियों में AQI 400-450 तक पहुंचने से लोग घर में ही सीमित रह जाते हैं। स्कूल ऑनलाइन हो जाते हैं, मास्क पहनना अनिवार्य होता है, और बाहर निकलना जोखिम भरा होता है।
  • आर्थिक नुकसान: प्रदूषण से उत्पादकता घटती है, स्वास्थ्य खर्च बढ़ता है, निर्माण और उड़ानें प्रभावित होती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है।

समाधान की राह: क्या कर सकते हैं?

1. परिवहन सुधार

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, 5,000 ई-बसें और 18,000 चार्जिंग स्टेशन जोड़ना, सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, और BS-VI/ईवी वाहनों को अनिवार्य करना प्रमुख उपाय हैं।

2. फसल अवशेष प्रबंधन

किसानों को बायो-डिकंपोजर और मशीनरी उपलब्ध कराना, जलाने पर रोक और पड़ोसी राज्यों से समन्वय करना प्रदूषण कम कर सकता है।

3. औद्योगिक और निर्माण नियंत्रण

प्रदूषक फैक्ट्रियों को नियंत्रित करना, निर्माण स्थलों पर रीयल-टाइम डस्ट मॉनिटरिंग और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करना जरूरी है।

4. घरेलू ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन

LPG/PNG/इलेक्ट्रिक कुकिंग को सब्सिडी देना, बायोमास जलाने पर रोक लगाना, और अपशिष्ट बायोमाइनिंग व रीसाइक्लिंग बढ़ाना लाभकारी होगा।

5. शासन और मॉनिटरिंग सुधार

CAQM को मजबूत करना, क्षेत्रीय समन्वय बढ़ाना, AI-आधारित पूर्वानुमान और अतिरिक्त एयर क्वालिटी स्टेशन लगाना, और जन जागरूकता अभियान चलाना जरूरी है।

6. हरी पहल

शहरी हरियाली बढ़ाना, रूफटॉप सोलर को प्रोत्साहित करना, और क्लाउड-सीडिंग जैसे पायलट प्रोजेक्ट अपनाना हवा की गुणवत्ता सुधार सकता है।
दिल्ली-NCR के लिए यह साफ है कि प्रदूषण केवल मौसम का मुद्दा नहीं, बल्कि हर दिन की वास्तविकता बन गया है। साल बदलते हैं, लेकिन अगर ठोस और दीर्घकालिक उपाय नहीं किए गए, तो घुटती सांसों का दौर जारी रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल समन्वित और सतत प्रयासों से ही राजधानी और NCR की हवा को सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates
App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos