दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अब केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे साल लोगों की ज़िंदगी पर असर डाल रहा है। CREA की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहर भारत के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में शामिल हैं। राजधानी का वार्षिक PM2.5 स्तर राष्ट्रीय मानक से 2.4 गुना अधिक रहा, जबकि WHO की सुरक्षित सीमा से यह 19 गुना अधिक है।
NCR के शहरों का हाल: हवा में खतरा हर दिन
एनसीआर के 29 शहरों में से अधिकांश ने राष्ट्रीय PM2.5 मानक पार कर लिया। दिल्ली में सबसे प्रदूषित मॉनिटरिंग स्टेशन जहांगीरपुरी रहा, जहां सालाना औसत PM2.5 130 माइक्रोग्राम/घन मीटर दर्ज किया गया। NSIT द्वारका, जिसे कम प्रदूषित माना जाता है, का स्तर भी 73 माइक्रोग्राम/घन मीटर रहा, जो राष्ट्रीय मानक से 1.8 गुना अधिक है।
गाजियाबाद में सबसे ज्यादा दिन ऐसे आए जब PM2.5 स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर रहा। नोएडा, गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा भी चिंताजनक स्थिति में हैं। साल 2025 में NCR का औसत AQI 201 रहा, जो हाल के वर्षों में थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन समस्या जड़ में कम नहीं हुई।
प्रदूषण के मुख्य कारण
CREA और CSE के विश्लेषण के अनुसार, ट्रांसपोर्ट सेक्टर NCR में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जो कुल प्रदूषण का लगभग 46% जिम्मेदार है। इसके अलावा, फसल अवशेष जलाना, निर्माण धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।Delhi
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण अब सालभर की समस्या बन गया है और इसके पीछे शॉर्ट-टर्म उपायों की सीमाएं और क्षेत्रीय समन्वय की कमी मुख्य कारण हैं।
दिल्लीवासियों की चुनौतियां
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स्वास्थ्य पर असर: PM2.5 जैसी महीन कणिकाएं फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर अस्थमा, हृदय रोग और समय से पहले मौत का कारण बनती हैं।
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दैनिक जीवन प्रभावित: सर्दियों में AQI 400-450 तक पहुंचने से लोग घर में ही सीमित रह जाते हैं। स्कूल ऑनलाइन हो जाते हैं, मास्क पहनना अनिवार्य होता है, और बाहर निकलना जोखिम भरा होता है।
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आर्थिक नुकसान: प्रदूषण से उत्पादकता घटती है, स्वास्थ्य खर्च बढ़ता है, निर्माण और उड़ानें प्रभावित होती हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है।

