Road and Building Department, Gujarat ने वाघई–सापुतारा (Saputara) घाट मार्ग के 40-किमी हिस्से पर “Roller crash barrier” लगाने का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह सड़क पहाड़ी इलाका है, जहां कई Sharp Curves हैं। अत: अतीत में हादसों, वाहनो के खाई में गिरने की शिकायतें आती रही थीं। पायलट के तहत कुल 11 ख़तरनाक़ Curves पर यह बैरियर लगाई गयी है। इस सिस्टम की वजह से कुछ पहले दर्ज-हुए हादसों को टाला जा चुका है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस का कहना है कि दुर्घटनाओं की संख्या कम हुई है।
वाघई–सापुतारा घाट पर रोलर बैरियर- मौत के मोड़ को मिली नई सुरक्षा ढाल
वाघई से सापुतारा तक का लगभग 40 किलोमीटर लंबा घाटी मार्ग वर्षों से एक “घातक सड़क” के रूप में जाना जाता रहा है। तीखे मोड़, गहरी खाइयां, घना जंगल और अचानक बदलते मौसम, इन सब कारणों से यह रास्ता ड्राइवरों के लिए चुनौतीपूर्ण बन जाता है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, हर वर्ष यहां सैकड़ों छोटे-बड़े हादसे दर्ज होते रहे हैं, जिनमें बसें, जीप और दोपहिया वाहन सबसे अधिक प्रभावित रहते हैं।
इन्हीं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने इस मार्ग के सबसे खतरनाक 11 मोड़ों पर रोलर क्रैश बैरियर लगाए हैं। ऐसी तकनीक जो टक्कर की ऊर्जा को अवशोषित कर वाहन को वापस सड़क की ओर मोड़ देती है, ताकि गहरी खाई में गिरने से बचाया जा सके। घाट क्षेत्रों में ऐसे बैरियर पहले कभी नहीं लगाए गए थे, इसलिए इसे सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
घाट पर होने वाले सालाना हादसे- कितनी गंभीर थी स्थिति!
स्थानीय पुलिस और परिवहन विभाग के बीते वर्षों के अभिलेखों से पता चलता है कि इस 40-किमी stretch पर हर वर्ष औसतन 180–220 दुर्घटनाएं होती थीं। इनमें से लगभग 30–35 बड़ी दुर्घटनाएं मानी जाती थीं, जिनमें कई बार वाहन खाई में गिर जाते थे। सालाना 40–50 लोग घायल होते थे और 8–12 मौतें भी दर्ज होती रही हैं। तेज़ गति, रात की ड्राइविंग, मोड़ों की तीव्रता और पर्यटक यातायात बढ़ने के कारण दुर्घटनाएं लगातार बढ़ती गईं। स्थानीय लोग इस सड़क को “खतरे की घाटी” कहते थे।
सबसे भयावह दुर्घटनाएं, जिनसे बदल गया पूरा दृष्टिकोण
1. तीर्थयात्रियों की बस खाई में गिरी
फरवरी 2025 में एक बेहद दर्दनाक घटना में, मध्यप्रदेश से द्वारका जा रही तीर्थयात्रियों से भरी बस अचानक मोड़ पर चालक का नियंत्रण खो बैठी। बस लगभग 35 फीट गहरी खाई में गिर गई। 5 लोगों की मौके पर मौत हो गई और 35–40 लोग घायल हुए। कई घायल इतनी गंभीर अवस्था में थे कि उन्हें फौरन अस्पतालों में रेफर करना पड़ा। यह घटना रात में हुई थी और अंधेरे में मोड़ का अचानक आना इसकी मुख्य वजह मानी गई।
2. बच्चों से भरी पर्यटन बस पलटी
जुलाई 2024 में हुई एक अन्य घटना में गर्मियों की छुट्टियों में घूमने आई एक पर्यटन बस घाट पर पलट गई। 2 बच्चों की जान गई, 60 से अधिक लोग घायल हुए। यह हादसा दिन के समय हुआ, जिससे साफ हुआ कि समस्या सिर्फ अंधेरे की नहीं, बल्कि सड़क की संरचना और सुरक्षा की भी थी।
3. जीप और दोपहिया वाहनों की लगातार दुर्घटनाएं
स्थानीय टैक्सियों, पर्यटक जीपों और बाइक सवारों से जुड़े छोटे-बड़े हादसे हर महीने दर्ज होते रहे।
ज़्यादातर मामलों में वाहन मोड़ों पर संतुलन खो देते थे और कई बार खाई की ओर फिसल जाते थे।
रोलर बैरियर लगाने से क्या बदला?
बैरियर लगाने के बाद जिन 11 तीखे मोड़ों को “खतरे के बिंदु” माना गया था, वहां दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत से अधिक कमी दर्ज की गई है। कई बार वाहन बैरियर से टकरा कर सड़क पर ही रुक गए जहां पहले वैसा वाहन सीधे खाई में गिर जाता। पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों का कहना है कि अब वाहन मोड़ों पर फिसलने के बजाय बैरियर से टकरा कर संभल जाते हैं। हालांकि घाट के पूरे 40 किमी हिस्से पर अभी बैरियर नहीं लगे हैं, इसलिए सुधार आंशिक है।
अभी भी क्या चुनौतियां बची हैं?
सड़क कई जगह अब भी संकरी है, विशेषकर जहां बसें और ट्रक एक साथ मोड़ पर आते हैं। रात में रोशनी की कमी है, जिससे खतरा बढ़ जाता है। तेज़ रफ्तार वाले पर्यटक वाहनों की संख्या बढ़ रही है। भारी वाहनों के ब्रेक और टायरों की नियमित जांच अधिकांश समय नहीं की जाती।
सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम, लेकिन सफर अभी बाकी
वाघई–सापुतारा घाट पर रोलर बैरियर लगना निश्चित रूप से एक सकारात्मक और आवश्यक कदम है। इससे जानलेवा मोड़ों पर होने वाले हादसों में कमी आई है और कई ज़िंदगियां बची हैं। लेकिन पूरी घाट सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए सड़क विस्तार, बैरियर, साइनबोर्ड, रात्रि-प्रकाश व्यवस्था, और ड्राइवरों के लिए सख्त नियम अभी भी ज़रूरी हैं।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

