19 वर्षीय NEET छात्रा के दिमाग़ में बनी गांठों ने ली जान! डॉक्टरों के अनुसार परजीवी संक्रमण बना वजह, खान-पान की सफाई और सही पकाने पर विशेषज्ञों की सख्त सलाह !
Neurocysticercosis ने ली छात्रा की जान- खबर ने मचाई खलबली
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले की रहने वाली 19 वर्षीय इलमा कुरैशी की दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। इलमा NEET की तैयारी कर रही थीं। जांच में सामने आया कि उनके दिमाग में करीब 20 गांठें (सिस्ट) बन चुकी थीं। डॉक्टरों ने इसे न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस नाम की गंभीर बीमारी बताया, जो एक परजीवी संक्रमण के कारण होती है। लंबे इलाज के बावजूद डॉक्टर इलमा की जान नहीं बचा सके। डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि पत्ता गोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों या कच्चे/अधपके सुअर के मीट में मौजूद परजीवी के अंडे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। ये अंडे आंतों से होते हुए रक्त के माध्यम से दिमाग तक पहुंच जाते हैं और वहां गांठों का रूप ले लेते हैं।
AIIMS की डॉक्टर का बयान
एम्स से जुड़ी डॉक्टर ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि इस तरह के परजीवी संक्रमण से दिमाग में सूजन और गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि सब्जियों और मीट की सही सफाई और अच्छी तरह पकाना बेहद जरूरी है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल किसी एक सब्जी को सीधे दोषी ठहराना सही नहीं है, बल्कि कुल मिलाकर साफ-सफाई और हाइजीन की कमी असली कारण होती है।
इलाज लंबा चला, लेकिन नहीं बच सकी जान
इलमा का इलाज लंबे समय तक चला। उन्हें न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के साथ अस्पताल में भर्ती किया गया था। दिमाग में कई गांठें होने के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद आखिरकार उनकी मौत हो गई। इस घटना ने मेडिकल छात्रों और आम लोगों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है।
खान-पान की लापरवाही बनी जानलेवा
न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस एक गंभीर बीमारी है, जो शरीर में परजीवी कीड़े (टेपवर्म) के अंडे चले जाने से होती है। ये अंडे गंदे हाथों, ठीक से न धोई गई सब्जियों, दूषित पानी या अधपके मांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। आंतों से होते हुए ये दिमाग तक पहुंच जाते हैं और वहां गांठें या सिस्ट बना लेते हैं। इससे दिमाग में सूजन आ जाती है और व्यक्ति को दौरे, तेज सिरदर्द और कमजोरी जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस का इलाज
इस बीमारी का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में लंबे समय तक चलता है। मरीज को दिमाग की सूजन कम करने की दवाएं, परजीवी को खत्म करने की दवाएं और जरूरत पड़ने पर दौरे रोकने की दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता है और लगातार जांच की जाती है। समय पर इलाज मिलने से कई मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन देर होने पर बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
न्यूरोसिस्टिसर्कोसिस से बचने के लिए सावधानी ज़रूरी
इस बीमारी से बचाव के लिए साफ-सफाई सबसे जरूरी है। सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। मांस को पूरी तरह पकाकर खाएं और कच्चा या अधपका भोजन न करें। खाना बनाने और खाने से पहले हाथ जरूर धोएं। साफ पानी पिएं और खुले में रखा खाना खाने से बचें। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर इस गंभीर बीमारी से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सकता है।
इलमा कुरैशी की मौत एक सबक
यह दुखद घटना हम सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
• सब्जियों को अच्छी तरह धोकर पकाएं,
• मीट को पूरी तरह पकाकर ही खाएं,
• साफ पानी का इस्तेमाल करें,
• हाथों की नियमित सफाई करें। छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।
इलमा कुरैशी की मौत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि स्वस्थ जीवन की पहली शर्त साफ-सुथरा खान-पान और स्वच्छता है।
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