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फोनी ने मिटाया, आपदा प्रबंधन ने बचाया

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Cyclone Fani
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को फोनी तूफान से सबसे ज्यादा प्रभावित ओडिशा का दौरा किया और मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता भी की। इस दौरान पीएम ने इस भीषण तूफान से मुकाबले के लिए सीएम नवीन पटनायक सहित यहां के लोगों की प्रशंसा भी की। साथ ही उन्होंने 1 हज़ार करोड़ रुपये की मदद का भी ऐलान किया। पीएम ने बताया कि इस भीषण तूफान की तबाही से निकालकर ओडिशा को पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से पहले भी 381 करोड़ रुपये की मदद दी जा चुकी है। पीएम नरेंद्र मोदी हवाई सर्वेक्षण करते हुए राज्य के विभिन्न जिलों की स्थिति का जायजा लिया।शुक्रवार को ओडिशा में आए फोनी तूफान से राज्य में भारी तबाही हुई है। इस तूफान से ओडिशा के 11 जिलों के 14,835 गांवों के लगभग 1.08 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक इस तूफान के कारण 38 लोगों की मौत हो चुकी है।
20 साल पहले आए ऐसे ही तूफान से ओडिशा तबाह हो गया था। लगभग 10 हजार लोग मारे गए। तूफान के बीच और जाने के बाद के दृश्य भयावह थे। उसे पल्रय का तूफान कहा गया। फोनी चक्रवात भी अपने पूरे प्रकोपी ताकत के साथ ही आया। 240 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रहीं हवाएं और भारी बारिश ने ओडिशा को तहसनहस कर दिया। तूफान के बाद आई शांति और तबाही के मंजर को देख किसी की भी दिल सिहर जाय। चारों ओर तबाही का मंजर। हालांकि पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश तो बच गया। लेकिन इतने भीषण चक्रवात और उसके द्वारा मचाई गई तबाही के बावजूद भारत जन और धन के महवाविनाश से बच गया और यह पूरी दुनिया के लिए मिसाल है। सही मायने में देखा जाये तो ये आपदा प्रबंधन की एक मिसाल है। आपदा प्रबंधन में आपदा आने के पूर्व विनाश को कम करने के लिए उठाए गए कदम, आपदा के बीच उसका सामना करना और आपदा चले जाने के बाद राहत, बचाव और पुनर्वास..तीन बातें आतीं हैं। पुनर्वास तो आगे की बात है लेकिन अन्य मामलों में भारत के इस आपदा प्रबंधन की ना सिर्फ पीएम, देशवासी बल्कि दुनिया इसकी वाहवाही कर रही है। संयुक्त राष्ट्र तक भारत के प्रयासों की जमकर तारीफ कर रहा है।
मौसम विभाग की सटीक चेतावनी की वजह से ही उड़ीसा के तूफान में जनहानि कम हुई, क्योंकि आपदा प्रबंधन की टीमों ने लोगों को पहले ही शिविरों और शेल्टर होमों में शिफ्ट कर दिया। तबाही के बाद पीड़ितों को फिर से उनकी पुरानी जिंदगी में लाने में समय लगेगा, लेकिन जिस तरह पूर्व तैयारी के कारण युद्धस्तर पर काम हो रहा है और केंद्र एवं राज्य के बीच अद्भुत समन्वय है उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि जल्दी ही जीवन पटरी पर आ जायेगी। अभी तक भारत आपदा प्रबंधन के मामले में पिछड़ा देश माना जाता था। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत को इसके पूर्व कभी विश्व स्तर पर प्रशंसा शायद ही मिली हो। आखिर वही मौसम विभाग, जिसका उपहास उड़ाया जाता था वो अब बदल रहा है, अत्याधुनिक तकनीक से लैस हो रहा है, यही कारण है कि अब मौसम विभाग का भविष्यवाणी सटीक हो रहा है। वजह है मौसम विभाग के नए हरिकेन मॉडल, जो भारत की चक्रवातों में जीरो कैजुएलिटी का हिस्सा है उसकी मदद से हजारों लोगों की जान बचाने में मदद मिली। इसने दिखाया कि सटीक ट्रैकिंग और पूर्वानुमान लगाने की दिशा में प्रगति हुई है। साथ ही हमारे देश के जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया। ओडिशा में एनडीआरएफ ने 65 टीमें उतारीं, जो किसी क्षेत्र में अभी तक की सबसे बड़ी तैनाती है। एक टीम में 45 लोग शामिल थे। तूफान के दिन से लेकर अब तक ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बंगाल की सड़कें दुरु स्त करने, कानून-व्यवस्था और भोजन की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त टीमें लगाई गई हैं। वास्तव में फोनी से निपटने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी थी। पुरी के गोपालपुर में सेना की तीन टुकड़यिां स्टैंडबाय पर थीं और पनागर में इंजिनियरिंग टास्क फोर्स थी। भारतीय वायुसेना ने दो सी -17, दो सी-130 और चार एएन-32 को स्टैंडबाय पर रखा था। नौसेना ने राहत कार्यों के लिए 6 जहाजों को तैनात किया। मेडिकल और डाइविंग टीम अलर्ट पर थीं। देश में चुनाव चल रहा है। राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप अपने चरम पर है लेकिन जब देश पर कोई विपदा आती है तब राजनीति अपनी जगह देश का काम अपनी जगह होता है। हमें ये भी कतई नही भूलना चाहिए कि जो हम प्रकृति को देते है वही प्रकृति हमें वापस कर देती है। ऐसे में अब तो हम संभल जाए और पर्यावरण को लेकर संजीदगी से सोंचे।