दुनिया के कई हिस्सों में इस वक्त युद्ध और सैन्य तनाव की स्थिति बनी हुई है। कहीं सीधी जंग जारी है तो कहीं मिसाइल हमले, एयरस्ट्राइक और प्रॉक्सी वॉर के जरिए टकराव हो रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष, इजराइल-ईरान युद्ध और पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा विवाद जैसे बड़े संघर्ष वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को प्रभावित कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि ये लड़ाइयां कब से चल रही हैं, क्यों शुरू हुईं और अब तक कितने लोग मारे जा चुके हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध: 2022 से जारी भीषण जंग
रूस और यूक्रेन के बीच पूर्ण युद्ध 24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ, हालांकि इसकी जड़ें 2014 में क्रीमिया विवाद से जुड़ी हैं। रूस ने यूक्रेन के पूर्वी इलाकों पर सैन्य कार्रवाई शुरू की, जबकि यूक्रेन ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया।
क्यों चल रहा है युद्ध?
रूस चाहता है कि यूक्रेन NATO जैसे पश्चिमी सैन्य गठबंधनों से दूर रहे। वहीं यूक्रेन यूरोप के साथ अपने संबंध मजबूत करना चाहता है।
कितने लोग मारे गए?
अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के मुताबिक दोनों पक्षों के सैनिकों और नागरिकों को मिलाकर लाखों लोग हताहत हुए हैं। यूक्रेनी और रूसी सैनिकों की मौतें हजारों में हैं, जबकि लाखों लोग घायल हुए हैं। करोड़ों लोग विस्थापित हुए। युद्ध अब भी जारी है और किसी स्पष्ट समाधान के संकेत नहीं दिख रहे।
इजराइल-फिलिस्तीन (गाजा) संघर्ष: 7 अक्टूबर 2023 के बाद बढ़ी तबाही
इजराइल और फिलिस्तीन के बीच दशकों पुराना विवाद 7 अक्टूबर 2023 को और भड़क उठा, जब हमास ने इजराइल पर बड़ा हमला किया। इसके बाद इजराइल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया।
क्यों हो रहा है संघर्ष?
यह विवाद जमीन, राजनीतिक अधिकार और धार्मिक दावों से जुड़ा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर कब्जे और सुरक्षा खतरे के आरोप लगाते हैं।
कितना नुकसान?
गाजा में अब तक हजारों नागरिक मारे जा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार मरने वालों की संख्या दसियों हजार तक पहुंच चुकी है। इजराइल में भी सैकड़ों लोग मारे गए। गाजा का बड़ा हिस्सा बुरी तरह तबाह हो चुका है। मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
इजराइल-ईरान तनाव: छाया युद्ध से खुली टकराव तक
इजराइल और ईरान के बीच सीधा युद्ध तो घोषित नहीं है, लेकिन दोनों के बीच लंबे समय से प्रॉक्सी वॉर और मिसाइल हमले होते रहे हैं। सीरिया और लेबनान जैसे देशों में भी इनके समर्थित समूह आमने-सामने रहे हैं।
क्यों बढ़ा तनाव?
ईरान का परमाणु कार्यक्रम और इजराइल की सुरक्षा चिंताएं इस टकराव की मुख्य वजह हैं।
हताहतों का आंकड़ा
हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए हैं। यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर करने की क्षमता रखता है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान: सीमा पर बढ़ता तनाव
अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद तेज हुआ है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान जमीन से आतंकी संगठन हमले कर रहे हैं।
ताजा स्थिति
हाल के महीनों में सीमा पर गोलीबारी और एयरस्ट्राइक की खबरें आई हैं। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं।
नुकसान
सैनिकों और नागरिकों की मौतों की खबरें सामने आई हैं, हालांकि सटीक आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं। सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अन्य प्रमुख संघर्ष
यमन गृहयुद्ध: 2014 से जारी संघर्ष में लाखों लोग प्रभावित हुए। हजारों मौतें और भुखमरी का संकट।
नागोर्नो-काराबाख (आर्मेनिया-अजरबैजान): समय-समय पर हिंसक झड़पें होती रहती हैं।
वैश्विक असर और आगे क्या?
इन युद्धों का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है। तेल की कीमतें, खाद्य संकट, शरणार्थी समस्या और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र और कई देश युद्धविराम की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन स्थायी शांति अभी दूर दिखती है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रही इन लड़ाइयों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 21वीं सदी में भी युद्ध का खतरा खत्म नहीं हुआ है। कूटनीति और संवाद ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन जब तक राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक ये संघर्ष जारी रह सकते हैं।
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