दूसरी शादी के आरोप में बर्खास्त CRPF जवान को हाईकोर्ट ने बहाल किया

The CSR Journal Magazine

बर्खास्तगी की वजह से पैदा हुई मुश्किलें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम मिदनापुर के एक CRPF जवान को दूसरी शादी के आरोपों पर बर्खास्तगी के बाद बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जवान को केवल सुनी-सुनाई बातों और शक के आधार पर नौकरी से निकाला गया था। इसे लेकर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर यह कार्रवाई जारी रहती, तो इससे जवान को प्रोफेशनल, पर्सनल और इमोशनल कठिनाइयों का सामना करना पड़ता।

शादी के आरोपों का मामला

पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में तैनात इस सीआरपीएफ जवान पर आरोप था कि उसने त्रिपुरा की एक महिला के साथ भागकर दूसरी शादी कर ली है, जबकि उसकी पहले से एक पत्नी थी। यह मामला 2001 का है। जवान ने 24 साल से सीआरपीएफ में कॉन्स्टेबल के तौर पर अपनी सेवाएँ दी हैं। इसके आरोपों पर चर्चा करते हुए जस्टिस अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि यह मामला केवल अनुमान और बिना ठोस सबूत के आधार पर खड़ा किया गया था।

डिसिप्लिनरी एक्शन की समीक्षा

जस्टिस गुप्ता के अनुसार, कोर्ट ने डिसिप्लिनरी एक्शन की समीक्षा करते हुए कहा कि वह अपील अथॉरिटी के तौर पर कार्य नहीं कर रहे थे। लेकिन, जब परिणाम स्पष्ट नहीं थे या कानून के अनुसार उल्लंघन हो रहा था, तो उनकी दखल जरूरी थी। ऐसा न होने से जवान की स्थिति और कठिन हो गई थी।

पहले की गई अपीलें असफल रही थीं

जवान ने पहले बेंगलुरु के डिप्टी IGP के सामने 29 सितंबर, 2020 को अपील की थी, जो नाकाम रही। अगले साल एक और रिविजनल एप्लीकेशन खारिज हो गई, और एक अलग अथॉरिटी के सामने की गई अपील भी असफल रही। इसके बाद उसने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया।

फर्जी हॉस्टल सब्सिडी का मामला

जवान पर एक और आरोप था कि उसने एक फर्जी हॉस्टल सब्सिडी भी जमा की थी, जिसके लिए उसे पहले ही सजा मिल चुकी थी। लेकिन कोर्ट ने इस मामले में भी कहा कि बर्खास्तगी का कारण केवल सुनी-सुनाई बातों और पुलिस रिपोर्ट थी, जिसमें दूसरी शादी के सही होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं था।

कोर्ट का बहाल करने का आदेश

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जवान को केवल बातों के आधार पर दोषी ठहराना उचित नहीं था। इस फैसले के बाद, कोर्ट ने जवान को मिदनापुर में बहाल करने का आदेश दिया है। अब वह अपनी नौकरी पर लौट सकते हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी।

बंगाल में नियमों की सख्ती

यह पूरा मामला बताता है कि CRPF के नियम कितने सख्त हैं और किसी भी जवान के करियर पर इस तरह के आरोपों का कितना असर पड़ सकता है। हालांकि, शहरों में शादी और पारिवारिक मामलों में गहरे आरोपों की जांच होने पर भी यह मामला महत्वपूर्ण बन गया है।

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