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March 9, 2026

कच्चे तेल की कीमतें 114 डॉलर पार, फिर भी भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर

The CSR Journal Magazine
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में सोमवार (9 मार्च) को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। देश के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं। हालांकि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे आने वाले समय में भारत में भी पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आया है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है।

प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम

देश के अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है, क्योंकि इसमें राज्य सरकारों के टैक्स और स्थानीय शुल्क शामिल होते हैं। सोमवार को प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम इस प्रकार रहे-
• मुंबई: पेट्रोल ₹103.50, डीजल ₹90.03 प्रति लीटर,
• दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77, डीजल ₹87.67 प्रति लीटर,
• बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92, डीजल ₹90.99 प्रति लीटर,
• कोलकाता: पेट्रोल ₹105.41, डीजल ₹92.02 प्रति लीटर,
• चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80, डीजल ₹92.39 प्रति लीटर!
अन्य शहरों की बात करें तो हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.46 और डीजल ₹95.70 प्रति लीटर है, जबकि पटना में पेट्रोल ₹106.11 और डीजल ₹91.77 प्रति लीटर बिक रहा है। जयपुर में पेट्रोल ₹104.72 और डीजल ₹90.21, जबकि पुणे में पेट्रोल ₹104.03 और डीजल ₹90.49 प्रति लीटर दर्ज किया गया। गुरुग्राम में पेट्रोल ₹95.44 और डीजल ₹87.90 प्रति लीटर है। वहीं नोएडा, लखनऊ और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी पेट्रोल की कीमत लगभग ₹94 से ₹95 के बीच बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

वैश्विक बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो वर्ष 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। विशेषज्ञों के अनुसार यह कीमत पिछले शुक्रवार के मुकाबले लगभग 23 प्रतिशत अधिक है। वहीं अमेरिका में उत्पादित वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी करीब 114 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले सप्ताह के मुकाबले लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।

तेल की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं

कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेष रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति को लेकर बाजार में चिंता बढ़ी हुई है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल विभिन्न देशों को भेजा जाता है। अगर इस क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक तेल बाजार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसके अलावा ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमलों और कुछ तेल उत्पादन क्षेत्रों में उत्पादन कम होने से भी बाजार में दबाव बढ़ा है। रिपोर्टों के अनुसार कुवैत ने भी भंडारण की सीमाओं के कारण कुछ तेल क्षेत्रों में उत्पादन कम कर दिया है।

भारत में कीमतें क्यों स्थिर हैं

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई 2022 से लगभग स्थिर बनी हुई हैं। उस समय केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने ईंधन पर टैक्स घटाए थे, जिसके बाद कीमतों में राहत मिली थी। भारत में तेल विपणन कंपनियां रोज सुबह 6 बजे पेट्रोल-डीजल के दाम अपडेट करती हैं। ये कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरों, रुपये-डॉलर विनिमय दर, टैक्स और अन्य लागतों के आधार पर तय होती हैं। हालांकि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद अभी तक घरेलू बाजार में दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। माना जा रहा है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत में भी ईंधन महंगा हो सकता है।

आयात नीति में बदलाव की तैयारी

रिपोर्टों के अनुसार सरकार खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए अन्य देशों से कच्चे तेल का आयात बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। इसमें रूस और ब्राजील जैसे देशों से अधिक तेल खरीदने की योजना शामिल हो सकती है। भारत की स्पष्ट रणनीति रही है कि ‘एक ही देश पर निर्भर नहीं रहना !’ भारत फिलहाल तीन काम कर रहा है-
1. रूस से तेल खरीद जारी रखना,
2. अमेरिका, अफ्रीका और अन्य देशों से भी आयात बढ़ाना,
3. तेल भंडार (Strategic Reserves) सुरक्षित रखना!
इसका उद्देश्य यह है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य या मध्य-पूर्व की सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत में ईंधन की कमी न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आपूर्ति के जोखिम को कम करने और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

आम लोगों पर संभावित असर

अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका प्रभाव खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल देश में ईंधन के दाम स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है।

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