CRPF में लांस नायक और नायक रैंक की वापसी, जवानों के प्रमोशन में मिलेगी तेजी

The CSR Journal Magazine
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ जैसे रैंकों को फिर से लागू करने की योजना बनाई है। यह फैसला 30 साल पहले इन रैंकों को खत्म करने के बाद लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका मुख्य उद्देश्य जवानों के प्रमोशन में हो रही देरी को खत्म करना है। इसके साथ ही, अग्निवीरों को भी नए मौके दिए जाएंगे।

जवानों की राय महत्वपूर्ण

CRPF मुख्यालय ने देशभर में अपनी फील्ड इकाइयों से कहा है कि वे सैनिक सम्मेलनों का आयोजन करें। इस दौरान जवानों की राय ली जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ रैंक को फिर से लागू करने से कांस्टेबलों को ‘हेड कांस्टेबल’ रैंक तक पहुंचने से पहले दो और पदोन्नति के मौके मिलेंगे। इससे न केवल उनकी समस्याएं हल होंगी, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ेगा।

गृह मंत्रालय का आदेश

गृह मंत्रालय (MHA) के आदेश के तहत 1997 में CRPF से ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ रैंक हटा दिए गए थे। ये रैंक अब पुलिस के कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल रैंकों में समाहित हो गए हैं। हालांकि, सेना में ये रैंक अभी भी मौजूद हैं। इस बदलाव का एक और उद्देश्य CRPF की सेवा को अग्निवीरों के लिए आकर्षक बनाना भी है।

अग्निवीरों की एंट्री का रास्ता

अग्निवीरों का पहला बैच इस साल के अंत में रिटायर होना शुरू करेगा। वे CRPF समेत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में शामिल होने के लिए पात्र होंगे। अग्निवीर वे अल्पकालिक सैन्य कर्मी हैं, जिन्हें ‘अग्निपथ योजना’ के तहत चार साल के लिए भर्ती किया जाता है। फिलहाल, CAPF में कांस्टेबलों की वर्दी पर ‘सीनियर कांस्टेबल’ का रैंक लगाया जाता है, जो आधिकारिक तौर पर स्वीकृत नहीं है।

प्रमोशन की प्रक्रिया

CRPF में प्रमोशन की प्रक्रिया पदानुक्रम के अनुसार होती है। एक जवान जो कांस्टेबल के रूप में बल में शामिल होता है, उसे पहले पांच साल में ‘लांस नायक’ का प्रमोशन मिलता है। इसके बाद दस साल में ‘नायक’ और बीस साल में ‘हेड कांस्टेबल’ के रूप में पदोन्नति होती है। वर्तमान में, CRPF में लगभग 3.25 लाख कर्मियों के बीच प्रमोशन को लेकर भारी ठहराव है। एक कांस्टेबल को अपना पहला प्रमोशन मिलने में औसतन 22 से 25 साल लग जाते हैं।

जवानों में असंतोष का खतरा

एक ही रैंक पर लंबे समय तक बने रहने के कारण जवानों में असंतोष पैदा हो सकता है। इसी कारण नियमों में बदलाव करने पर विचार किया जा रहा है। CRPF और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में पहले सेना की इन्फैंट्री बटालियनों की तर्ज पर ये रैंक हुआ करते थे। एक वरिष्ठ कमांडेंट ने बताया कि एक बटालियन में 1,000 से ज्यादा पुरुषों और महिलाओं में 20 से अधिक अधीनस्थ अधिकारी होते हैं।

नई नीति का महत्व, अनुशासन बनाए रखना जरूरी

इसलिए, ऐसी किसी भी नीति को बनाते समय यूनिट की संगठनात्मक संरचना और कार्यक्षमता का ध्यान रखना आवश्यक है। ‘एक्स-पैरामिलिट्री पर्सनल एसोसिएशन’ के महासचिव ने कहा कि प्रस्तावित योजना का लाभ तभी होगा जब जवानों को समयबद्ध तरीके से प्रमोशन मिले। अन्यथा, यह पूरी कवायद बेकार साबित होगी। CRPF के एक वरिष्ठ कमांडेंट ने कहा कि सेना के इन दो रैंकों को फिर से लागू करना केवल दिखावे के लिए नहीं होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि बटालियन का अनुशासन बना रहे। इस प्रकार, CRPF में रैंकों की वापसी से जवानों के प्रमोशन में तेजी आएगी और अग्निवीरों को भी नए अवसर मिलेंगे।

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